अब शराब की भी होगी किल्लत
कांच की बोतलों की कमी और एलपीजी आपूर्ति से उत्पादन प्रभावित

मुंबई /दि.26- इस समय जहां एक ओर पेट्रोल व डीजल सहित एलपीजी सिलेंडरों की जबरदस्त किल्लत चल रही है. वहीं दूसरी ओर अब राज्य में शराब की भी किल्लत पैदा होने की पूरी संभावना है. क्योंकि महाराष्ट्र में शराब और बियर उद्योग इस समय दोहरी मार झेल रहा है. एक ओर कांच की बोतलों की भारी कमी है, तो दूसरी ओर एलपीजी गैस आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
जानकारी के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर स्थित कांच की बोतल बनाने वाली प्रमुख कंपनी ‘कैनपैक’ पर इस संकट का सबसे ज्यादा असर पड़ा है. कांच उत्पादन के लिए करीब 1700 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है, जिसे लगातार बनाए रखना जरूरी होता है. यदि गैस आपूर्ति बाधित होती है, तो भट्टी ठंडी होने का खतरा रहता है, जिससे करीब 600 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. इस कंपनी को प्रतिदिन लगभग 12 मीट्रिक टन एलपीजी की जरूरत होती है. गैस की कमी के चलते उत्पादन रुकने की आशंका बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बियर और शराब बनाने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है, क्योंकि वे कांच की बोतलों पर निर्भर हैं.
जानकारी के मुताबिक राज्य में कई बियर और मद्य उत्पादक इकाइयां इसी सप्लाई पर निर्भर हैं. बोतलों की कमी के कारण उत्पादन घट सकता है, जिससे बाजार में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है. साथ ही राज्य के आबकारी राजस्व पर भी असर पड़ सकता है. ज्ञात रहे कि, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई है. भारत की बड़ी मात्रा में गैस आयात पर निर्भरता होने से व्यावसायिक गैस आपूर्ति पर दबाव बना है, जिसका असर उद्योगों पर दिख रहा है. सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक गैस आपूर्ति पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे होटल और अन्य उद्योगों के साथ-साथ कांच और मद्य उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं.
उद्योग जगत का कहना है कि कच्चे माल, पैकेजिंग और गैस की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो रहा है. ऐसे में आने वाले समय में मद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि संभव है. कांच की बोतलों की कमी और एलपीजी आपूर्ति संकट के कारण महाराष्ट्र का मद्य उद्योग दबाव में है. यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो उत्पादन, आपूर्ति और सरकारी राजस्व-तीनों पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है.





