फायर एनओसी लेना जरुरी, अन्यथा कुछ अनुचित घटित होने पर दर्ज होगी फौजदारी

अग्निशमन विभाग का पथक कभी भी कर सकता है जांच-पडताल

अमरावती/दि.13– अस्पतालों व आईसीयू के उपकरणों में शॉर्ट सर्किट या तकनीकी गडबडी के चलते आग लगकर मरीजों की जान खतरे में पडने की घटनाएं लगातार बढ रही है. जिसे ध्यान में रखते हुए मनपा के अग्निशमन विभाग ने अमरावती मनपा क्षेत्र अंतर्गत स्थित सभी अस्पतालों व नर्सिंग होम संचालकों से अपनी आस्थापनाओं का फायर ऑडिट कराते हुए एनओसी लेने हेतु कहा है. साथ ही चेतावनी दी है कि, यदि किसी अस्पताल या नर्सिंग होम के पास फायर एनओसी नहीं है और वहां पर कोई अनुचित घटना घटित होती है, तो संबंधितों के खिलाफ सीधे फौजदारी कार्रवाई की जाएगी.
बता दें कि, बॉम्बे नर्सिंग होम एक्ट के अनुसार किसी भी निजी अस्पताल को पंजीयन करवाते समय और फिर प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर अपने लाईसेंस का नूतनीकरण अनिवार्य रुप से करवाना होता है, जिसके साथ फायर एनओसी करवाना भी बंधनकारक है. परंतु अधिकांश अस्पतालों द्वारा इस नियम का पालन ही नहीं किया जाता. जिसे ध्यान में रखते हुए अमरावती महानगर पालिका के अग्निशमन विभाग ने सीएस कार्यालय को पत्र भी जारी किया है. जिसमें बताया गया है कि, शहर के कई अस्पतालों व नर्सिंग होम ने अपना फायर ऑडिट नहीं करवाया है. जिसमें से कुछ अस्पतालों व नर्सिंग होम के एनओसी की मुदत खत्म हो चुकी है. शहर में अधिकांश अस्पताल घनी बस्तियों व संकरी गलियों में भी स्थित है. जहां से आपातकालिन निकासी का कोई मार्ग भी नहीं है. इसके अलावा कई अस्पतालों में अग्निशमन उपकरण धूल खाते पडे है.

क्या कहता है कानून?
किसी भी इमारत में अग्निशमन यंत्रणा को कार्यान्वित रखने की पूरी जिम्मेदारी इमारत के मालिक या उपयोगकर्ता की होती है. फायर ऑडिट छमाही प्रमाणपत्र होता है. जिसके चलते साल में दो बार जनवरी व जुलाई माह में परवानाधारक एजेंसी से फॉर्म-बी प्राप्त कर अग्निशमन विभाग के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है. साथ ही अग्निशमन दल के अधिकारियों को भी किसी भी वक्त अस्पतालों व नर्सिंग होम सहित निजी आस्थापनाओं, प्रतिष्ठानों व बहुमंजिला इमारतों की जांच-पडताल करने तथा कोई भी त्रुटि पाए जाने पर संबंधितों के नाम नोटिस जारी करने का अधिकार होता है.

* कारावास व दंड का प्रावधान
किसी भी गंभीर लापरवाही के चलते अग्निकांड जैसी दुर्घटना के घटित होने अथवा बार-बार कानून का उल्लंघन करने जैसी वजहों के चलते अस्पताल व्यवस्थापन व मालिक के खिलाफ फौजदारी अपराध दर्ज हो सकता है. महाराष्ट्र आग प्रतिबंधक कानून के अनुसार अपराध की तीव्रता को देखते हुए 6 माह से 3 साल तक कारावास तथा 50 हजार रुपयों से 1 लाख रुपयों तक जुर्माने का प्रावधान है. इसके साथ ही अग्निकांड के समय फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र नहीं रहने पर बीमा कंपनी द्वारा नुकसान का दावा खारिज किया जा सकता है.

* ऐसी है एनओसी की प्रक्रिया
अग्निशमन विभाग द्वारा फायर सेफ्टी को लेकर एनओसी प्राप्त करने हेतु काफी बडी प्रक्रिया को पूरा करना होता है. केवल अस्पताल के कहने व बताने पर ही एनओसी नहीं दी जाती, बल्कि अग्निशमन विभाग के अधिकारी अस्पताल को प्रत्यक्ष भेंट देकर अग्निशमन संबंधी उपायों की विस्तृत जांच करते है.

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