मंत्रालय में अधिकारियों ने दादा के निधन के दिन कर दी थी 75 फाइले मंजूर
मुख्यमंत्री ने लगाई रोक और दिए जांच के आदेश

मुंबई/दि.16 – प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अजीत दादा पवार के निधन के कुछ घंटो बाद ही मंत्रालय में तीव्र वेग से फाइल मंजूरी के प्रकरण में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए जांच के आदेश निर्गमीत किए. जिससे राजनीति में हलचल देखी जा रही है. 20 संस्थाओं की 75 शालाओं को अल्पसंख्यक श्रेणी देने का निर्णय किया गया था. अधिकारियों द्वारा यह कारनामा किए जाने का आरोप और चर्चा हो रही है. युवक कांग्रेस महासचिव अक्षय जैन ने दावा किया कि, गत 28 जनवरी को दादा के निधन पश्चात 30 जनवरी की शाम तक उपरोक्त फाइलों का निपटारा किया जाना संदेह पैदा कर रहा है. मुख्यमंत्री इसे गंभीरता से लेते हुए न केवल फाइल मंजूरी को रोक लगा दी, बल्कि जांच के भी निर्देश दिए.
* क्या हुआ था
उल्लेखनीय है कि, माणिकराव कोकाटे के त्यागपत्र पश्चात संबंधित विभाग की जिम्मेदारी भी उपमुख्यमंत्री अजीत दादा देख रहे थे. ऐसे में उपरोक्त अवधि में 75 फाइलों को क्लीयर किया गया. जबकि तीन माह पहले उपरोक्त संस्थाओं के प्रमाणपत्रों को रोका गया था. यह भी बताया गया कि, शाला को अल्पसंख्यक श्रेणी मिलने के बाद अध्यापक भर्ती में टीईटी लागू नहीं होती. इन शालाओं पर आरटीई कानून भी लागू नहीं होता. गत 12 अक्तूबर को मंत्री माणिकराव कोकाटे ने आदेश दिए थे, किंतु इन आदेशों को रोक दिया गया था. आरोप है कि, मंत्रालय के असंवेदनशील अधिकारियों ने अजीत दादा के निधन के तुरंत बाद प्रमाणपत्र धडाधड जारी कर दिए. इन निर्णयों के पीछे आर्थिक हितसंबंध बताए जा रहे है, यह भी चर्चा है कि, कोई अकेला अधिकारी ऐसा नहीं कर सकता. इसके पीछे पूरा नेटवर्क रहने की संभावना जताते हुए युवक कांग्रेस महासचिव अक्षय जैन ने मुख्यमंत्री के पास उपरोक्त अधिकारियों पर एक्शन लिए जाने की डिमांड की है.
* सीएम ने लगाई रोक, उच्चस्तरीय जांच
मुख्यमंत्री ने हडबडी में किए गए निर्णय रोक दिए है. उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने के साथ दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने कहा है. दावा किया जा रहा है कि, अजीत पवार के विमान हादसे में मृत्यु उपरांत मंत्रालय में उस दिन 3 बजकर 9 मिनट को पहला प्रमाणपत्र जारी किया गया. पोद्दार इंटरनैशनल की 25 शालाओं का उसमें समावेश रहने का दावा किया जा रहा है. 6 शालाओं को उसी दिन प्रमाणपत्र जारी किए गए. बडी हडबडी में यह निर्णय होने का दावा कर निर्णयों पर पुनर्विचार की अपेक्षा व्यक्त की गई थी. उसी प्रकार अजीत दादा के निधन पश्चात गुपचुप रुप से प्रमाणपत्रों की बंदरबाट करनेवाले अधिकारियों पर कार्रवाई होती है क्या, यह अब देखनेवाली बात होगी.





