स्वेच्छा से कैडर बदलने पर पुरानी वरिष्ठता खत्म

नागपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला

* पदोन्नति की मांग खारीज
नागपुर/दि.28 – मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी स्वेच्छा से नए कैडर में स्थानांतरित होता है, तो उसे पुराने कैडर की वरिष्ठता का लाभ नहीं मिल सकता. ऐसे कर्मचारी को नए कैडर में कनिष्ठ माना जाएगा और पुराने कर्मचारियों की वरिष्ठता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. यह निर्णय न्यायमूर्ति महेंद्र चांदवानी ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता वर्ष 2002 से यवतमाल जिला परिषद में प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर कार्यरत थे. वर्ष 2010 में उन्होंने स्वेच्छा से पंचायत विस्तार अधिकारी पद पर स्थानांतरण की मांग की, जिसके बाद उन्हें 16 जून 2016 को इस पद पर नियुक्त किया गया और 1 जुलाई 2016 से उन्होंने कार्यभार संभाला. बाद में संभागीय आयुक्त द्वारा महाराष्ट्र विकास सेवा श्रेणी में पदोन्नति सूची जारी करते समय उनकी पूर्व सेवा (प्रयोगशाला तकनीशियन के रूप में) को नहीं जोड़ा गया. इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई, जिसे खारिज कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने स्वेच्छा से कैडर परिवर्तन किया था, इसलिए पुराने पद की वरिष्ठता को नए कैडर में नहीं जोड़ा जा सकता. साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें पदोन्नति से वंचित करने का कारण दिव्यांगता नहीं, बल्कि आवश्यक सात वर्षों के अनुभव की कमी थी.
अदालत ने माना कि संबंधित कैडर में अन्य कर्मचारी उनसे वरिष्ठ हैं और याचिकाकर्ता का दावा कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है. इस आधार पर न्यायालय ने याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया. इस फैसले को सेवा मामलों में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माना जा रहा है, जिससे स्पष्ट होता है कि स्वेच्छा से कैडर बदलने पर पूर्व वरिष्ठता का दावा नहीं किया जा सकता.

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