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देश में डेढ वर्ष में 854 तेंदूओ की मौत

महाराष्ट्र के 239 तेंदुओ का समावेश

* तेंदुओ के शिकारियों को गंभीरता से देखने की आवश्यकता
नागपुर/दि.3- वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया व्दारा हाल ही में घोषित की गई आंकडेवारी से देश में पिछले डेढ साल में 854 तेंदुओ की मृत्यु होने की जानकारी समाने आई है. इसमें आरक्षित जंगल तथा जंगल के बाहर के तेंदुओ का समावेश है.
डेढ वर्ष में सडक और रेलवे दुर्घटना, कुएं में गिरने, शिकार, बिजली का करंट समेत नैसर्गिक व अन्य कारणों से यह मृत्यु होने की जानकारी है. कुत्ता यह तेंदुए का पंसदीदा खाद्य है. इस कारण गांव के पास उनका संचार अधिक रहता है. परिणामस्वरुप किसान अथवा ग्रामवासियों के लिए तेंदुए घातक साबित होते है. उनसे बचाव के लिए ग्रामवासी तार के कम्पाउंड विद्युत प्रवाह छोडते है. इस कारण अनेक तेंदुओ की बिजली का करंट लगने से मृत्यु हो रही है. अब बावरिया शिकारियों ने बाघ के साथ तेंदुओ पर ध्यान केंद्रीत किया रहने से इस शिकार में बढोतरी हुई है. वन विभाग केवल बाघ की मृत्यु गंभीरता से ले रहे है. विभाग के तेंदुओ की तरफ अनदेखी बताई जाती है. वर्ष 2022 में देश में 518 तेंदुओ की मौत हुई. इसमें 356 मृत्यु नैसर्गिक कारणों से बताई गई है. शेष 162 तेंदुओ का शिकार हुआ. आंकडेवारी से बताया जाता है. वर्ष 2023 में छह माह में 336 तेंदुओ की मृत्यु दर्ज हुई है. इसमें 96 तेंदुओ की शिकार से मृत्यु हुई है जबकि 236 तेंदुओ की मृत्यु नैसर्गिक रुप से होने की बात रिपोर्ट में दर्ज है.
* मनुष्य-तेंदुए का संघर्ष बढ रहा
तेंदुए की बदलती परस्थिति के कारण बडी संख्या में प्रजोत्पादन के कारण उनकी संख्या बढ रही है. गन्ने की फसल उनका पंसदीदा आश्रय स्थान है. तेंदुओ का सभी तरह संचार रहने से राष्ट्रीय व राज्य महामार्ग तथा अन्य जिला मार्ग पर भी वाहनों की टक्कर में उनकी मृत्यु होने की घटना घटित होती रहती है. शिकार के लिए तेंदुआ नागरिकों की बस्ती में आता रहने से मनुष्य और तेंदुओ के बीच संघर्ष बढ रहा है, ऐसा अधिकारियों का कहना है. राज्य में पिछले वर्ष में 162 तेंदुओ की मृत्यु हुई. इसमें के शिकार के कारण 52 तेंदुए मृत होने की बात कही जाती है. जबकि वर्ष 2023 में 75 तेंदुओ की मृत्यु हुई है.
* तेंदुओ की तरफ अनदेखी
वन विभाग का बाघ के संवर्धन की तरफ अधिक ध्यान रहने से तेंदुओ की मृत्यु की तरफ अनदेखी हो रही है. बावरिया गिरोह व्दारा तेंदुओ पर ध्यान केंद्रीत किए जाने की जानकारी सामने आई है. इस कारण इन शिकारियों का बंदोबस्त करना आवश्यक है. वनरक्षक से लेकर वन अधिकारियों पर अन्य काम का बोझ रहने से शिकार का प्रमाण बढा है.
– सुरेश चोपन,
पर्यावरण अभ्यासक
* भारती की स्थिति महाराष्ट्र
वर्ष मृत्यु वर्ष मृत्यु
2022 518 2022 162
2023 336 2023 75

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