
नागपुर/ दि.१६– मौसम में बदलाव यानी केवल हिमनदी पिघलना और समुद्र का स्तर बढना इतना ही नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य पर उसका बुरा परिणाम होता है. 2050 तक भारत में लगभग 40 करोड महिला व 10 करोड बच्चों के शरीर में हिमोग्लोबिन की कमी के कारण एनीमिया होने का खतरा रहेगा. जिसका परिणाम कोविड से भी बुरा होगा. ऐसा खतरनाक वक्तव्य पद्मभूषण व पब्लिक हेल्थ फाऊंडेशन के अध्यक्ष डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी ने किए.
अकादमी ऑफ मेडिकल सायन्सेस (एएमएस) व डायबेटिक एसोसिशन ऑफ इंडिया ( डीएआय) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में वे बोल रहे थे. मंच पर डॉ. शरद पेंंडसे, डॉ. जय देशमुख, एएमएच के अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र सरनाईक, डॉ. राजू खंडेलवाल, डीआय के अध्यक्ष डॉ. प्राजक्ता देशमुख, डॉ. नैनेश पटेल, डॉ. प्रशांत जोशी व डॉ. पीयूष खेरडे उपस्थित थे.
* बदलते मौमस के परिणाम संबंध में जागरूक होना आवश्यक
डॉ. रेड्डी ने कहा कि बदलते मौसम के वास्तविक परिणाम संबंध में प्रत्येक को जागरूक होना आवश्यक है. डॉक्टरों ने इसके लिए प्रयास करना चाहिए. दुष्परिणाम इतना सहज नहीं है कि उसे रोका जा सके. पेड लगाना और पानी की बचत करना ही काफी नहीं बदलते मौसम को कैसे सामना करेंगे, यह सीखना चाहिए.
* नागपुर सहित दो शहरों के लिए हीट ऍक्शन प्लॅन
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने (पीएचएफआय)नागपुर सहित अहमदाबाद, भुवनेश्वर जैसे शहरों के लिए हीट एक्शन प्लॅन तैयार किया है. इस योजना का स्थानीय प्रशासन की ओर से योग्य पालन होना जरूरी है. विशेष रूप से गर्मी से बचने के लिए निवास, पानी की व्यवस्था करनी चाहिए. ड्यूटी के घंटे भी बदलना चाहिए. इसके अलावा निजी वाहन कम करने के लिए सार्वजनिक यातायात मजबूत करना, अधिकाधिक पेड लगाना आदि उपाय की जरूरत है, ऐसा डॉ. रेड्डी ने कहा.