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कंपनियों की सीएसआर निधी खर्च का प्रमाण कम

कोरोना निर्बंध का असर, सरकार तक रिपोर्ट पहुंचने में विलंब

नागपुर/दि.16- देश में कोरोना की पहली लहर (2019-20) की तुलना में दूसरी लहर के समय (2020-21) सामाजिक दायित्व निधि (सीएसआर) खर्च करने वाली कंपनियों की संख्या एवं रकम में भी कमी होने की बात केंद्रीय कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के पंजीयन से स्पष्ट हुई है. सीएसआर खर्च का प्रमाण कम होने के पीछे कोरोना निर्बंध यह प्रमुख कारण बताया जा रहा है.
देश में 2019-20 में 22,664 कंपनियों ने 24,863 करोड़ रुपए सीएसआर के माध्यम से सामाजिक उपक्रमों पर खर्च किया गया था. जिसकी तुलना में 2020-21 में 8,633 कंपनियों ने 20,360.25 करोड़ रुपए खर्च किए जाने के बारे में दर्ज है.
500 करोड़ से अधिक आर्थिक उहापोह वाली कंपनियों को उन्हें होने वाले नफे से कुछ रकम सामाजिक उपक्रमों के लिए खर्च करना बंधनकारक है. कोरोना काल में अनेक कंपनियों ने उनके सीएसआर निधि से स्वास्थ्य सेवा मजबूतीकरण के लिए खर्च किया था. 2020-21 में इसमें कमी होने की बात सामने आयी. इसके पीछे कोरोना काल का निर्बंध यह प्रमुख कारण बताया जा रहा है. निर्बंध के कारण अनेक कंपनियां वार्षिक सर्वसाधारण सभा नहीं ले सकी. इन सभाओं में कंपनियों का नफा एवं तत्सम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है. विदर्भ इंडस्ट्रीज असोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अतुल पांडे ने इसे समर्थन दिया. उन्होंने कहा कि 2019-20 इस आर्थिक वर्ष में कंपनियों ने उनकी सीएसआर निधि खर्च की रिपोर्ट सरकार को दी थी. जिसके चलते इस वर्ष में निधि और कंपनियों की संख्या अधिक दिखाई दे रही है. लेकिन 2020-21 में कोरोना का प्रादुर्भाव अधिक था. इस समय भी कंपनियों ने उनका सीएसआर निधि खर्च किया. लेकिन उनकी जांच सरकार के सामने प्रस्तुत करने में विलंब हुआ होगा. इसलिए रकम कम दिखाई दे रही है. लेकिन 2019-20 से वह अधिक है. विदर्भ डिफेन्स असोसिएशन के संयोजक दुष्यंत देशपांडे ने कहा कि कोरोना काल के कारण अनेक कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर परिणाम हुआ. आय देखकर ही सीएसआर निधि खर्च करने का कंपनियों का विचार है.

खर्च की रिपोर्ट
वर्ष             कंपनियां        निधि (करोड़ में)
2019-20     22,664           24,863.84
2020-21     8,633             20,360.25

2019-20 की तुलना में 2020-21 में सीएसआर निधि खर्च का प्रमाण कम दिखाई दिया फिर भी प्रत्यक्ष में वह अधिक है. अनेक कंपनियों की रिपोर्ट सरकार तक नहीं पहुंची. वह प्रक्रिया शुरु है.
– अतुल पांडे, पूर्व अध्यक्ष, विदर्भ इंडस्ट्रीज असो.,नागपुर.

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