
* ग्रामीण, उपजिला अस्पताल मेंं मिलेगी सुविधा
यवतमाल/दि.5- मरीजों की दवा खर्च में बचत हो, इसके लिए ग्रामीण एवं उपजिला अस्पताल में सस्ती औषधि की दूकानें लगाई जाएगी. राज्यभर के 455 स्थानों पर यह सुविधा उपलब्ध होगी. दवा का कालाबाजार नहीं होगा, इस पर भी यंत्रणा द्वारा ध्यान दिया जाएगा. इन दूकानों के कामकाज पर नियंत्रण रखने के लिए जिला शल्य चिकित्सक स्तर पर अधिकारी एवं अन्न औषध प्रशासन के प्रतिनिधियों की समिति गठित की गई है.
जेनेरिक दवाईयों की यह दूकानें शुरु करने के लिए नई दिल्ली की नॅफोक इंडिया लिमिटेड नामक संस्था को महाराष्ट्र शासन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने अनुमति दी है. सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की स्वास्थ्य संस्था में यानि ग्रामीण रुग्णालय, उपजिला अस्पताल के परिसर में दर्शनी भाग में इन दूकानों को लगाने के लिए 200 से 250 फुट जगह 20 वर्ष के लिए किराए पर दी जाएगी. हर तीन वर्ष में जगह का किराया बढ़ाया जाएगा.
भारत सरकार के प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधी केंद्र योजना अंतर्गत गरीबों को कम दाम में दवा उपलब्ध हो, इसके लिए जेनेरिक जनऔषधालय योजना शुरु की गई है. जिसके चलते औषधियों पर होने वाले खर्च में 10 से 70 प्रतिशत तक बचत होने की बात कही जा रही. इससे पूर्व नगरविकास विभाग अंतर्गत स्थानिक स्वराज्य संस्था द्वारा चलायी जाने वाली अस्पताल परिसर में यह दूकानें शुरु की गई है. इसी तर्ज पर अब ग्रामीण, उपजिला अस्पताल के परिसर में यह दूकानें शुरु की जाएगी.
1500 फार्मासिस्ट को मिलेगा काम
सरकारी अस्पताल परिसर में शुरु की जाने वाली सस्ती दवा की दूकानें 24 घंटे शुरु रखनी पड़ेगी. जिससे आठ घंटे के लिए एक के अनुसार कम से कम तीन पंजीकृत औषध निर्माण अधिकारियों की नियुक्ति बंधनकारक की गई है. 455 दूकानें शुरु होने वाली है, इसके लिए 1500 लोगों को काम मिलने वाला है. इनमें दिव्यांग व्यक्ति, महिलाओं को प्रधानता रहेगी.
* यवतमाल जिले में 17 दूकानें
यवतमाल जिले में 17 स्थानों पर सस्ती दवा दूकानें शुरु होने की स्थिति है. दारव्हा, पुसद, पांढरकवडा, उमरखेड इन चार स्थानों पर यहां उपजिला अस्पताल है. वहीं 11 तहसीलों में ग्रामीण अस्पताल कार्यरत है. बावजूद दारव्हा एवं पांढरकवडा तहसील में प्रत्येकी एक ग्रामीण अस्पताल कार्यान्वित है. इन सभी स्थानों पर आगामी समय में सस्ती दवाओं की दूकानें शुरु दिखाई देगी.