‘सेफ हाऊस’ में पहुंचा पहला प्रेमी जोडा
अंतरजातिय प्रेमीयुगल की सहायता के लिए सामने आया हाईकोर्ट
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* राज्य में ‘सेफ हाऊस’ शुरु होने के बाद अपनी तरह का पहला मामला
नागपुर/दि. 25 – प्रगतिशील राज्य के तौर पर पहचान रखनेवाले महाराष्ट्र में आज आंतरजातिय व आंतर धर्मिय विवाह को समाज स्वीकार नहीं करता, साथ ही ‘सैराट’ फिल्म की तरह असल जिंदगी में भी प्रेमीयुगलों की जान के लिए खतरा होता है. नागपुर में घटित ऐसे ही एक मामले में अंतरजातिय विवाह करनेवाले प्रेमीयुगल की सहायता हेतु मुंबई उच्च न्यायालय का नागपुर खंडपीठ सामने आया और प्रेमविवाह करनेवाले युगल को पुलिस सुरक्षा के तहत ‘सेफ हाऊस’ में तीन माह रखने का निर्देश जारी किया. अंतरजातिय विवाह करनेवाले युवा जोडों के लिए राज्य सरकार द्वारा ‘सेफ हाऊस’ उपक्रम शुरु होने के बाद यह अपनी तरह का राज्य में पहला मामला है.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक वाणिज्य विषय में पदव्युत्तर पदविधर रहनेवाली 25 वर्षीय युवती ने पेशे से व्यवसायी रहनेवाले अपने प्रेमी के साथ 21 दिसंबर 2023 को चोरी-छिपे प्रेमविवाह कर लिया था. जिसकी भनक लगते ही युवती के पिता ने आक्रामक होकर दोनों को जान से मार देने की धमकी दी थी और युवती को अपने घर में कैद करके रख लिया था. जिसके बाद प्रेमी युवक ने अपनी प्रेमिका को छुडाने हेतु विविध स्तर पर प्रयास किए और अंत में उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दाखिल की. पश्चात अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद पुलिस ने प्रेमिका व उसके पिता को अदालत में हाजिर किया, जहां पर अदालत ने उक्त युवती की सुरक्षा व गोपनीयता को कायम रखने के लिहाज से उसके साथ चेंबर में संवाद साधा. इस समय युवती ने अपने मर्जी से विवाह करने की बात कहते हुए अपने प्रेमी युवक के साथ रहने की इच्छा जताई. जिसके चलते अदालत ने इस प्रेमीयुगल का पुनर्मिलन कराया और दोनों को जान का खतरा रहने तक पुलिस सुरक्षा के तहत ‘सेफ हाऊस’ में रखने का आदेश जारी किया. जहां पर इस प्रेमीयुगल को कम से कम तीन माह पूरी सुरक्षा के साथ रखा जाएगा. राज्य में ‘सेफ हाऊस’ की संकल्पना के साकार होने के बाद यह अपनी तरह का पहला मामला है.