कपास की फसल पत्ते कुतरने वाली गुलाबी इल्लियों का हमला
पत्ते गलकर गिर रहे, उपज के घटने की संभावना

अमरावती/दि.21 – पहले ही विविध संगठनों का सामना कर रहे किसानों के संकटों को अब पत्ते कुतरने वाली इल्लियों ने और अधिक बढा दिया है. इन इल्लियों द्वारा कपास की फसल पर किये गये हमले की वजह से कपास की फसल के हाथ से चले जाने का खतरा पैदा हो गया है. क्योंकि इन इल्लियों द्वारा किये गये हमले की वजह से कपास के पौधों के पत्तें गलकर गिर रहे है. जिसके चलते इस बार कपास की उपज के कम रहने की संभावना है. जिसकी वजह से क्षेत्र के किसानों में अच्छी-खासी चिंता की लहर देखी जा रही है. कपास की फसल पर पत्तें कुतरने वाली इल्लियों के हमले का सर्वाधिक असर दर्यापुर व अंजनगांव क्षेत्र में देखा जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक दर्यापुर एवं अंजनगांव तहसीलों में बडे पैमाने पर कपास की बुआई की गई है और अब जैसे-तैसे पैधों पर कपास उगनी शुरु हुई है. कपास की फसल फिलहाल फुल व फल धारणा की अवस्था में है. जिसे देखकर किसानों को इस बार अच्छी खासी आय होने की उम्मीद जगी थी. परंतु इसी दौरान पत्ते कुतरने वाली इल्लियों के रुप में किसानों के सामने आसमानी संकट खडा हो गया है. इस वर्ष इन दोनों तहसीलों में अतिवृष्टि होने के चलते पहले ही किसानों का बुआई खर्च दो गुना हो गया है. जिसके चलते लागत खर्च भी निकलेगा अथवा नहीं, ऐसी चिंता किसानों को सता रही है. क्योंकि तहसील के अधिकांश हिस्से में कपास के पत्तों पर तंबाखू के पत्ते खाने वाली स्पोडोप्टेरा लिदुरा नामक इल्ली का प्रादुर्भाव दिखाई दे रहा है. इन इल्लियों के प्रयोग की शुरुआत आकोट तहसील के खेत परिसरों में सबसे पहले दिखाई दी. जिसके चलते किटकशास्त्र विभाग के वैज्ञानिकों व कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का प्रत्यक्ष दौरा किये जाने पर पता चला कि, दर्यापुर तहसील में भी इन इल्लियों का प्रवेश व प्रादूर्भाव हो चुका है.जिसके चलते इस टीम ने दर्यापुर तहसील के कुछ गांवों को भेंट देते हुए वहां के खेत परिसरों का मुआयना किया और किसानों को इस बारे में जानकारी दी.
विशेष उल्लेखनीय है कि, यह इल्लियां दिन के समय फसल पर दिखाई नहीं देती, बल्कि जमीन की दरारों में छिपकर बैठी रहती है और रात के समय फसल पर चढकर पत्तों को कुतरते हुए नुकसान करती है. ऐसे में दिन के समय किसानों द्वारा फसलों पर किये जाने वाले किटनाशकों के छिडकाव का इन इल्लियों पर कोई असर नहीं होता. इसके चलते अब किसानों को मजबूरन अपनी जान खतरे में डालकर रात के समय फवारणी का काम करना पड रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह इल्लियां बहुभक्षि रहने के चलते उनका प्रादूर्भाव तुअर और हरभरे की फसल पर भी हो सकता है. जिसके चलते क्षेत्र के किसानों में भय व चिंता का माहौल देखा जा रहा है.
इन इल्लियों के पतंगे तैयार होने के चलते यह इल्लियां बडी तेजी के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर फैलती है. ऐसे में सामूहिक रुप से किट व्यवस्थापन करना बेहद जरुरी है. साथ ही फवारणी करते समय अलग-अलग किटनाशकों को एकत्रित करना टाला जाना चाहिए और गैस पॉइजन की फवारणी करनी चाहिए. इसके साथ ही जमीन के भीतर इन इल्लियों के कोष सुप्त अवस्था में रह सकते है. जिसके चलते फसल निकलने के बाद खेत में काफी गहरी जुताई करनी चाहिए.
– प्रशांत पाटिल,
किटकशास्त्रज्ञ, अकोला.