… वर्ना राणा ही होते असल ‘धुरंधर’
भाजपा की वजह से तीन सीटों पर वायएसपी की हुई सीधी हार

* अन्य कुछ सीटों पर भी वायएसपी को भाजपा की वजह से हुआ नुकसान
अमरावती/दि.19 – जब से महानगर पालिका के चुनावी नतीजे घोषित हुए है, तब से सबसे प्रमुख चर्चा इस बात को लेकर ही चल रही है तथा विशेष तौर पर भाजपा के पराजित प्रत्याशियों व कुछ पदाधिकारियों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि, मनपा के चुनाव में युवा स्वाभिमान पार्टी की वजह से भाजपा को कई सीटों पर हार के साथ ही नुकसान का सामना करना पडा और भाजपा केवल 25 सीटों पर सिमट गई. जबकि पिछली बार अमरावती मनपा में भाजपा के रिकॉर्ड 45 पार्षद निर्वाचित हुए थे और मनपा के इतिहास में पहली बार किसी भी पार्टी को इतना स्पष्ट बहुमत मिला था. परंतु भाजपाईयों द्वारा बडे जोर-शोर के साथ उठाए जा रहे इस मुद्दे के शोरगुल में यह तथ्य लगभग अनदेखा रह गया है कि, पिछले चुनाव में केवल 3 सीटों पर जीत हासिल करनेवाली युवा स्वाभिमान पार्टी ने इस बार जबरदस्त उछाल भरते हुए 15 सीटों पर जीत दर्ज की है और 3 सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी को स्पष्ट रुप से भाजपा प्रत्याशियों के साथ हुए वोटों के बंटवारे की वजह से हार का सामना करना पडा अन्यथा उन 3 सीटों पर भी वायएसपी प्रत्याशियों की जीत लगभग सुनिश्चित थी. साथ ही अन्य 2 से 3 सीटों पर भी युवा स्वाभिमान पार्टी उलटफेर कर सकती थी. उस स्थिति में युवा स्वाभिमान पार्टी के 18 से 20 पार्षद निर्वाचित हुए होते और तब वायएसपी के नेता व विधायक रवि राणा लगभग भाजपा के बराबर खडे दिखाई देते.
उल्लेखनीय है कि, बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रवि राणा के नेतृत्ववाली युवा स्वाभिमान पार्टी ने बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र में शामिल अमरावती मनपा के प्रभागों में शानदार प्रदर्शन किया और इन प्रभागों से 14 सीटें जीती. वहीं अमरावती विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा रहनेवाले प्रभाग क्र. 6 विलास नगर-मोरबाग से भी एक सीट जीतते हुए अमरावती मनपा में 15 सीटें हासिल की. खास बात यह भी रही कि, युवा स्वाभिमान पार्टी ने बडनेरा शहर के प्रभाग 22 नई बस्ती बडनेरा की चारों सीटों पर जीत हासिल करने के साथ ही प्रभाग क्र. 21 जुनी बस्ती बडनेरा की भी एक सीट जीती. साथ ही जुनी बस्ती बडनेरा की अन्य 3 सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी दूसरे तथा भारतीय जनता पार्टी तीसरे स्थान पर रही. वहीं इन तीनों सीटों पर एमआईएम के प्रत्याशी विजयी रहे. ऐसे में कहा जा सकता है कि, यदि इन तीनों सीटों पर भाजपा व युवा स्वाभिमान पार्टी की युति रही होती या फिर इन तीनों सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी के खिलाफ भाजपा के प्रत्याशी नहीं रहे होते, तो उस स्थिति में निश्चित रुप से इन तीनों सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी का दावा एमआईएम पर भारी पडता और बडनेरा शहर के दोनों प्रभागों की आठों सीटों पर एमआईएम के प्रत्याशी ही निर्वाचित हुए होते. इसके साथ ही प्रभाग क्र. 17 गडगडेश्वर-रवि नगर की ड-सीट पर भले ही भाजपा प्रत्याशी आशीष अतकरे ने 6795 वोटों के साथ जीत दर्ज की है. परंतु इस सीट पर उनके निकटतम प्रतिद्वंदी वायएसपी प्रत्याशी राजा बागडे ने भी 5970 वोट हासिल कर उन्हें कडी टक्कर दी. ऐसे में हार और जीत का अंतर केवल मात्र 825 वोटों का रहा. जिसमें थोडा भी ‘इधर-उधर’ अगर हो जाता, तो वायएसपी प्रत्याशी राजा बागडे की सीट क्लीयर हो जाती. लगभग यही स्थिति शहर के अन्य कुछ प्रभागों में भी रही. जहां पर भाजपा, शिंदे सेना और युवा स्वाभिमान पार्टी के बीच हुए वोटों के बंटवारे की वजह से युवा स्वाभिमान पार्टी को अच्छा-खासा नुकसान उठाना पडा. वर्ना इस बार के मनपा चुनाव में विधायक रवि राणा ही ‘असल धुरंधर’ दिखाई दिए होते.
* 41.66 फीसद रहा ‘सक्सेस रेशो’
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, जहां एक ओर भाजपा, कांग्रेस, शिंदे सेना, राकांपा (अजीत पवार) जैसे दलों ने 70 से लेकर 85 सीटों पर अपने प्रत्याशी खडे किए थे. वहीं विधायक राणा के नेतृत्व वाली युवा स्वाभिमान पार्टी ने केवल 36 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को खडा किया था. जिसमें से 15 प्रत्याशी चुनाव जीतने में सफल भी रहे. जिसके चलते विधायक राणा और उनकी युवा स्वाभिमान पार्टी की सफलता का प्रतिशत 41.66 फीसद रहा. वहीं दूसरी ओर कई सीटें ऐसी भी रही, जहां पर युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे और उन सीटों पर हार व जीत के बीच वोटों का अंतर 200 वोटों के आसपास रहा, यानि थोडे भी वोट इधर-उधर हुए होते, तो युवा स्वाभिमान पार्टी का ‘सक्सेस रेशो’ और भी अधिक रहा होता. खास बात यह भी रही कि, जिन सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी को हार का सामना करना पडा, उसमें से कई सीटें ऐसी भी थी, जिन पर भाजपा की वजह से वायएसपी को नुकसान उठाना पडा है.





