रात भर पढ़ी जाएगी नमाज

कुरान की तिलावत और दुआ-ए-मगफिरत

अमरावती/दि.2- इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, शाबान का महीना इबादत और तैयारी का अहम दौर माना जाता है। इसी महीने की 15वीं रात को शब-ए-बारात मनाई जाती है, जिसे मगफिरत (माफी) और तकदीर (फैसले) की रात भी कहा जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इस मुबारक रात अल्लाह अपने बंदों पर रहमत फरमाते हैं और दुआएं कुबूल की जाती हैं. कल मंगलवार को शब-ए-बारात मनाई जाएगी जिससे यह भी संकेत मिलता है कि रमजान का पाक महीना अब ज्यादा दूर नहीं है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, शब-ए-बारात शाबान महीने की 14वीं और 15वीं तारीख की दरमियानी रात को मनाई जाती है. साल 2026 में शब-ए-बारात 3 फरवरी की रात को है.
* शब-ए-बारात की अहमियत
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, यह वह रात है जब अल्लाह अपने बंदों के आने वाले साल का लेखा-जोखा तय करते हैं. इस रात रिज्क (अल्लाह की तरफ से मिलने वाली हर नेमत और रोजी), सेहत, जिंदगी और मौत से जुड़े फैसले लिखे जाने की मान्यता है. इसे निस्फ-ए-शाबान भी कहा जाता है. इस रात मुसलमान समुदाय पूरी रात नमाज, कुरान की तिलावत और दुआ-ए-मगफिरत में मशगूल रहते हैं. लोग कब्रिस्तान जाकर अपने मरहूम अजीजों के लिए दुआ करते हैं.
* इस दिन शुरू होगा रमजान
शब-ए-बारात का आना इस बात का ऐलान माना जाता है कि इबादतों का सबसे पाक महीना रमजान बेहद करीब है. आमतौर पर शब-ए-बारात के करीब 15 दिन बाद रमजान शुरू हो जाता है. साल 2026 में रमजान का आगाज 17 या 18 फरवरी से होने की संभावना है, हालांकि इसकी भी अंतिम घोषणा चांद दिखने के बाद ही की जाएगी.
* शब-ए-बारात के दिन क्या करते हैं?
इस रात पूरी रात नमाज, कुरान पढ़ने और दुआएं करने की जाती हैं. इस मौके पर लोग अपने घरों में हलवा और दूसरे पकवान बनाकर गरीबों में बांटते हैं. मान्यता है कि इस रात शोर-शराबे से बचकर, खामोशी और खुलूस के साथ अल्लाह की इबादत की जाती है. अपने गुनाहों पर तौबा कर दिल से मगफिरत की दुआ मांगना इस रात की सबसे बड़ी इबादत मानी जाती है.

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