मनपा प्रशासन के दूसरे ठेके पर भी लगा प्रश्नचिन्ह

‘नेकॉफ’ का ‘बायोमायनिंग’ ठेका रोका

* स्थायी समिति ने अगली बैठक तक प्रक्रिया पर लगाई रोक
* विधायक गजानन लवटे ने भी तारांकित प्रश्न खडा किया था
अमरावती/दि.12 – अमरावती महानगर पालिका द्वारा साफ-सफाई को लेकर दिए गए एकल व संयुक्त ठेके पर जहां विगत दिनों हुई मनपा की आमसभा में जमकर बवाल मचा था, वहीं अब मनपा की ओर से घनकचरा व्यवस्थापन हेतु नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. नामक कंपनी को ठेका दिए जाने की प्रक्रियापर स्थायी समिति ने अपनी पहली ही बैठक में रोक लगा दी है. साथ ही साथ अमरावती महानगर पालिका द्वारा घनकचरा व्यवस्थापन हेतु जनवरी माह के दौरान अमल में लाई गई ठेका प्रक्रिया में बडे पैमाने पर अनियमितता होने का मुद्दा दर्यापुर निर्वाचन क्षेत्र के शिवसेना उबाठा विधायक गजानन लवटे ने भी तारांकित प्रश्न के जरिए विधानसभा में उपस्थित किया था. ऐसे में कहा जा सकता है कि, सफाई ठेके के बाद अब घनकचरा व्यवस्थापन के काम हेतु दिया जानेवाला अमरावती महानगर पालिका का दूसरा ठेका सवालों एवं विवादों के घेरे में फंसता नजर आ रहा है.
बता दें कि, गत रोज ही मनपा स्थायी समिति की बैठक में स्थायी समिति सदस्य प्रशांत महल्ले ने घनकचरा व्यवस्थापन के ठेके हेतु चलाई गई निविदा प्रक्रिया के तहत मनपा प्रशासन द्वारा नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. नामक कंपनी का कई नियमों व शर्तों की अनदेखी करते हुए चयन किए जाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता गणेश अनासाने द्वारा उठाई गई आपत्तियों व आक्षेपों को उपस्थित करते हुए जानना चाहा था कि, आखिर किन उद्देश्यों के चलते इस कंपनी को नियमबाह्य तरीके से घनकचरा व्यवस्थापन का ठेका दिए जाने के लिए मनपा प्रशासन द्वारा काफी हद तक अडियल भूमिका निभाई जा रही है. इस समय यह मुद्दा उपस्थित किया गया कि, नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. नामक कंपनी ने निविदा-शर्तों के अनुरुप अपने कामों का डीपीआर प्रस्तुत नहीं किया था. साथ ही इस कंपनी द्वारा भोपाल शहर में घनकचरा व्यवस्थापन का काम सही ढंग से नहीं किए जाने के चलते भोपाल महानगर पालिका ने इस कंपनी के नाम 7 अगस्त 2024 को टर्मिनेशन की नोटिस जारी करते हुए कंपनी को दिया गया ठेका भी स्थगित कर दिया था. साथ ही कंपनी पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति मुआवजे के लिए दंड भी लगाया गया था. ऐसे में उसी कंपनी को अमरावती महानगर पालिका के आयुक्त व तत्कालीन प्रशासक द्वारा किस आधार पर घनकचरा व्यवस्थापन का ठेका दिए जाने को मंजूरी दी जा रही है.
स्थायी समिति सदस्य प्रशांत महल्ले द्वारा उपस्थित किए गए इस मुद्दे का एक अन्य सदस्य द्वारा अनुमोदन किए जाते ही स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने मनपा प्रशासन से इस निविदा प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी, तो मनपा के अधिकारियों का कहना रहा कि, चूंकि यह मुद्दा ऐन समय पर उपस्थित किया गया है. जिसके चलते अभी तुरंत इससे संबंधित सवालों का जवाब नहीं दिया जा सकता. जिसके चलते स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने मनपा के अधिकारियों को स्थायी समिति की अगली बैठक में सभी सवालों के जवाब पेश करने का निर्देश देने के साथ ही यह व्यवस्था भी दी कि, घनकचरा व्यवस्थापन के ठेके को लेकर स्थिति को ‘जस का तस’ रखा जाए तथा नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. को वर्क ऑर्डर जारी करने के संदर्भ में फिलहाल कोई अगली कार्रवाई न की जाए. इसे एक तरह से घनकचरा व्यवस्थापन के ठेके को लेकर मनपा प्रशासन द्वारा चलाई जा रही प्रक्रिया पर स्थायी समिति की स्थगिती माना जा रहा था.
* स्थायी समिति के पास है तीन बैठकों तक आयुक्त के प्रस्ताव को रोकने का अधिकार
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, मनपा आयुक्त की ओर से मंजूर किए गए किसी भी प्रस्ताव को अपने पास अपनी तीन बैठकों तक रोककर रखने का अधिकार स्थायी समिति को होता है और यदि स्थायी समिति द्वारा मनपा आयुक्त की ओर से मंजूर किए गए किसी प्रस्ताव को अपने पास अपनी लगातार तीन बैठकों तक रोककर रखा जाता है, तो फिर उस स्थिति में मनपा आयुक्त द्वारा उस प्रस्ताव को सीधे नगर विकास मंत्रालय के पास मंजूरी हेतु भेजा जाता है. चूंकि इस समय मनपा आयुक्त की ओर से घनकचरा व्यवस्थापन प्रकल्प की निविदा प्रक्रिया को दी गई मंजूरी पर स्थायी समिति द्वारा कल अपनी पहली ही बैठक में रोक लगा दी गई और इस बारे में मनपा प्रशासन की ओर से समाधानकारक जवाब दिए जाने के बाद अगली बैठक में इस विषय पर कोई निर्णय लेने की बात कही है. ऐसे में यदि स्थायी समिति की अगली यानि दूसरी बैठक में भी इस मामले का कोई हल नहीं निकलता है, तो स्थायी समिति के पास इस प्रस्ताव को ज्यादा से ज्यादा एक और बैठक तक स्थगित रखने का अधिकार होगा. साथ ही यदि स्थायी समिति की लगातार तीनों बैठकों में यह मामला इसी तरह से अनिर्णित रहता है, तो फिर इस प्रस्ताव को मनपा आयुक्त द्वारा मंजूरी के लिए सीधे नगर विकास मंत्रालय के पास भेजा जा सकता है.

* जब ठेकेदार की पात्रता ही नहीं, तो ठेका कैसे दे सकते हैं?
इस पूरे मामले को लेकर जानकारी व प्रतिक्रिया हेतु संपर्क किए जाने पर मनपा की स्थायी समिति के सभापति अविनाश मार्डीकर ने बताया कि, हकीकत में मनपा का नया सदन अस्तित्व में आने से पहले ही तत्कालीन प्रशासक राज के दौरान मनपा आयुक्त द्वारा सफाई ठेके की तरह ही बेहद जल्दबाजी में घनकचरा व्यवस्थापन के ठेके की निविदा प्रक्रिया चलाई गई और इस काम के लिए नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. नामक कंपनी के निविदा प्रस्तावर को मंजूरी भी दी गई. लेकिन जिस समय यह प्रक्रिया चल रही थी, तभी गणेश अनासाने नामक एक व्यक्ति द्वारा नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. को ठेका दिए जाने का, यह कहते हुए विरोध किया गया कि, इस कंपनी ने इससे पहले भोपाल महानगर पालिका में भी घनकचरा व्यवस्थापन का ठेका हासिल किया था. जहां पर काम में काफी हद तक अनियमितता पाए जाने के चलते भोपाल महानगर पालिका ने इस कंपनी पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की ऐवज में दंड लगाने के साथ ही कंपनी को दिए गए ठेके को बीच में ही खत्म यानि टर्मिनेट कर दिया था. साथ ही इस कंपनी ने अमरावती महानगर पालिका क्षेत्र में घनकचरा व्यवस्थापन का ठेका हासिल करने हेतु निविदा के नियमों व शर्तों के मुताबिक अपना डीपीआर भी पेश नहीं किया था. जबकि बिना डीपीआर के किसी भी निविदा प्रस्ताव को मंजूरी ही नहीं दी जाती. ऐसे में यह अपने-आप में वाकई हैरतवाली बात है कि, मनपा आयुक्त द्वारा आखिर किस आधार पर और किन वजहों के चलते नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. को अमरावती मनपा क्षेत्र में घनकचरा व्यवस्थापन का ठेका दिए जाने को मंजूरी प्रदान की गई.
साथ ही स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने इस बात को लेकर भी हैरत जताई कि, निविदा शर्तों का खुले तौर पर उल्लंघन होने की बात समझ में आते ही मनपा प्रशासन ने नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. को दिया गया ठेका रद्द कर देना चाहिए था, परंतु ऐसा करने की बजाए मनपा प्रशासन द्वारा ठेकेदार कंपनी को उसकी त्रुटियां बताते हुए स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है, यह पूरी तरह समझ से परे है.

* विधायक गजानन लवटे ने विधानसभा में उठाया मामला
यहां पर खास बात यह भी है कि, अमरावती महानगर पालिका द्वारा घनकचरा व्यवस्थापन के काम हेतु जनवरी 2026 में चलाई गई बायोमायनिंग ठेका प्रक्रिया में बडे पैमाने पर अनियमितता होने की बात का मुद्दा दर्यापुर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक गजानन लवटे द्वारा तारांकित प्रश्न के जरिए विधानसभा में उपस्थित किया गया तथा इस ठेका प्रक्रिया को लेकर गणेश अनासाने की ओर से उपस्थित की गई आपत्तियों व आक्षेपों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा. साथ ही साथ इस पूरे मामले की सघन जांच किए जाने की मांग भी उठाई.
* अमरावती मनपा ने भोपाल मनपा से मांगी थी जानकारी, मिला जवाब
यहां यह भी उल्लेख करनेलायक बात है कि, बायोमायनिंग प्रकल्प के लिए चलाई गई निविदा प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां व आक्षेप उठने के बाद अमरावती महानगर पालिका ने भोपाल महानगर पालिका से इस बारे में ई-मेल के जरिए संपर्क साधते हुए यह जानने का प्रयास किया था कि, क्या भोपाल मनपा द्वारा नेकॉफ इंडिया प्रा. लि. को कभी ब्लैक लिस्टेड करते हुए काली सूची में डाला था. जिसका जवाब देते हुए भोपाल मनपा ने अमरावती मनपा को जवाब भेजा है कि, नेकॉफ इंडिया नामक कंपनी को ब्लैक लिस्टेड तो नहीं किया गया था. अलबत्ता समाधानकारक काम नहीं रहने के चलते इस कंपनी को टर्मिनेशन की नोटिस जारी करते हुए 7 अगस्त 2024 को उसका ठेका टर्मिनेट कर दिया गया था. साथ ही कंपनी पर पर्यावरण को हुए नुकसान की ऐवज में दंड व जुर्माना भी लगाया गया था.

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