‘रघुवीर’ शुरु कर रहा विश्वास, गुणवत्ता और स्वाद की परंपरा का नया अध्याय
स्वाद की परंपरा, गुणवत्ता का विश्वास और हर खुशी का मीठा हिस्सा है ‘रघुवीर’

अमरावती /दि.19- शून्य से शिखर तक पहुँचने की प्रेरक कहानी है मंगलभाई पोपट के जीवन की. मेहनत, ईमानदारी और समाज से जुड़े रहने की संवेदनशीलता के बल पर खड़ा हुआ ‘रघुवीर’ आज विदर्भ भर में मिठास और भरोसे का पर्याय बन चुका है. साधारण परिवार से आए मंगलभाई ने संघर्षों से घबराए बिना अपने कर्तृत्व के दम पर अमरावती के व्यावसायिक और सामाजिक जीवन में मजबूत पहचान बनाई.
गुजरात में जन्मे मंगलभाई बचपन से ही परिश्रमी स्वभाव के थे. पढ़ाई के साथ कुछ अलग करने की ललक उन्हें मात्र 22 वर्ष की उम्र में अमरावती ले आई. वर्ष 1970 में श्याम चौक पर एक छोटी-सी चाय की टपरी से उन्होंने व्यवसाय की शुरुआत की. खास स्वाद वाली चाय, उत्कृष्ट नाश्ता और ग्राहकों से आत्मीय व्यवहार के कारण ‘रघुवीर’ की पहचान बनने लगी और देखते-देखते यह नाम विश्वास का प्रतीक बन गया. गुणवत्ता पर कभी समझौता नहीं, यही उनका मूलमंत्र रहा. इसी सिद्धांत पर खड़ा ‘रघुवीर’ आज सौ से अधिक प्रकार की मिठाइयों और नमकीन के लिए प्रसिद्ध है. शुद्धता, स्वच्छता और भरोसे ने इसे अमरावती ही नहीं, बल्कि पूरे विदर्भ के परिवारों की खुशियों का हिस्सा बना दिया है. विदेशों में रहने वाले अमरावतीकर भी यहाँ की मिठाइयाँ विशेष रूप से मंगवाते हैं.
संस्थापक के संस्कारों की परंपरा अब अगली पीढ़ी आगे बढ़ा रही है. चंद्रकांत मंगलजीभाई पोपट और तेजस चंद्रकांत पोपट के नेतृत्व में आधुनिकता के साथ विस्तार करते हुए ‘रघुवीर’ की नई शाखा शुरू की जा रही है. दस्तूर नगर रोड, एसबीआई बैंक के पास शुक्रवार 20 फरवरी 2026 को खुलने वाला यह आउटलेट सफलता की कहानी का नया अध्याय बनेगा. नई शाखा में सिंधी विशेष व्यंजन और मिठाइयाँ उपलब्ध रहेंगी, जिनमें दाल-पकवान, सिंधी पेड़ा और गेहूँ के आटे का लड्डू खास आकर्षण होंगे. इस अवसर पर सभी अमरावतीवासियों को स्नेहपूर्वक आमंत्रित किया गया है.
श्याम चौक की छोटी-सी टपरी से शुरू हुआ यह सफर आज विदर्भ के दिल में गहरी जगह बना चुका है. यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि विश्वास, परिश्रम और समाजसेवा की परंपरा है, जो अब नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रही है.





