‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत दबोचे राजस्थान के ड्रग्स माफिया

गुजरात में तीन दिन क्राइम ब्रांच के दल ने जमाये रखा डेरा

* एमडी उत्पादक को दबोचने तडके 3.30 बजे हुए गुजरात से रवाना
* पांच वाहनों के साथ 3 अधिकारी और 14 जवानों ने सफल किया ऑपरेशन
* दोपहर 3 बजे और राजस्थान के अरनोद थाना क्षेत्र के ढाबे पर घेरा आरोपियों को
* सुबह से रेत कामगार के भेस में थे सभी जवान
* पूरे ढाबे को ले लिया था अपने कब्जे में, कुछ जवान निभा रहे थे वेटर की भूमिका
* माफियाओं को दबोचते समय जोरदार हुई झडप, 4 जवान हो गये घायल
अमरावती/दि.9 – अमरावती में सुकली वनारसी परिसर में जाल बिछाकर दो आरोपियों को दबोचकर जब्त किये गये 2.81 किलो एमडी ड्रग्ज प्रकरण में मुख्य उत्पादक समेत सहयोगी माफिया को राजस्थान से दबोचने के लिए अमरावती क्राइम ब्रांच पुलिस को ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ चलाना पडा. इस ऑपरेशन के समय पुलिस को काफी सतर्कता बरतते हुए राजस्थान पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए गुजरात सीमा में तीन दिन तक डेरा जमाए बैठे रहना पडा. जिस दिन आरोपियों को दबोचा गया. क्राइम ब्रांच का दल गुजरात की सीमा से तडके 3.30 बजे राजस्थान के लिए रवाना हुए. ढाई घंटे का सफर तय करने के बाद प्रतापगढ जिले के अरनोद थाना क्षेत्र में आने वाले नदी किनारे स्थित एक ढाबे को अपने कब्जे में ले लिया. वहां कुछ जवान कामगार की भूमिका निभाते हुए रेत निकालते रहे वहीं कुछ जवान ढाबे पर वेटर की भूमिका में रहे और एक अधिकारी काउंटर पर बैठकर मैनेजर की भूमिका निभाते रहे. दोपहर 3 बजे ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ को अंजाम देकर दोनों ड्रग्ज माफिया को दबोचा गया. आरोपियों को दबोचते समय उनके साथियों के साथ जोरदार झडप हुई. इसमें 4 जवान मामूली रुप से घायल भी हुए. लेकिन अधिकारी और जवानों ने साहस का परिचय देते हुए बडी मुश्तैदी से दोनों आरोपियों को दबोच लिया और अमरावती ले आये. यह पूरा ऑपरेशन क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संदीप चव्हाण के नेतृत्व में सफल हुआ. अभी भी इस प्रकरण का एक आरोपी फरार है.
बता दें कि, क्राइम ब्रांच के दल ने सुकली वनारसी परिसर से दो पैडलर को मुंबई से एमडी ड्रग्ज अमरावती लाते समय 8 मार्च को पकड लिया था. उनके पास से 2.81 किलो एमडी जब्त किया गया था. पूछताछ में इन दोनों आरोपियों ने मुंबई के अजीम शेख से यह ड्रग्ज लाने की जानकारी दी गई. इसके तहत 20 मार्च को क्राइम ब्रांच के दल ने अजीम शेख को गिरफ्तार किया था. उसने पूछताछ में बताया था कि, यह ड्रग्ज उसने राजस्थान के मांगीलाल गणपतसिंग सिंघावत 48 से खरीदा है. इस जानकारी के आधार पर निरीक्षक संदीप चव्हाण ने ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ चलाते हुए मांगीलाल और एमडी ड्रग्ज के मुख्य उत्पादक कुख्यात विष्णुलाल मोहनलाल गायरी (32) को दबोचने की योजना बनाई. यह कुख्यात प्रतापगढ जिले के अरनोद थाना क्षेत्र में आने वाले मोहोडा गांव का रहने वाला है. पुलिस के सामने दोनों कुख्यातों को दबोचने की बडी चुनौती थी. इन आरोपियों को पकडने के 15 दिन पूर्व ही क्राइम ब्रांच का दल राजस्थान पहुंच गया था. वहां 4-5 दिन रहने के बाद पूरी जानकारी ली गई. पश्चात पुलिस के दल ने राजस्थान की सीमा से सटकर स्थित गुजरात के रतलाम शहर में अपना डेरा जमाया.् वहां पर पूरी योजना तैयार की गई. सर्वप्रथम मांगीलाल और विष्णुलाल को पहचानने वाले एक व्यक्ति को जयपुर से कब्जे में लिया और उसी के जरिए निरीक्षक संदीप चव्हाण ने जाल बिछाया. उस व्यक्ति के जरिए मांगीलाल और विष्णुलाल से संपर्क किया गया और 50 किलो एमडी ड्रग्ज की मांग की गई. तब तय हुआ कि, प्रतापगढ जिले के अरनोद थाना क्षेत्र में आने वाले दलोत से प्रतापगढ मार्ग पर नदी किनारे स्थित ढाबे पर 3 अप्रैल को इसकी डील होगी. इसके तहत क्राइम ब्रांच के दल ने बडी सावधानीपूर्वक योजना तैयार की और उसी दिन तडके 3.30 बजे से ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ शुरु हुआ.
* पांच वाहनों में सवार होकर पहुंचे राजस्थान
क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संदीप चव्हाण किसी भी हालत में एमडी ड्रग्ज उत्पादक और उसके सहयोगी माफिया को छोडना नहीं चाहते थे. इसके तहत उन्होंने राजस्थान पुलिस को चकमा देने के लिए काफी सतर्कता बरती. पांच वाहनों पर राजस्थान राज्य की नंबर प्लेट लगाई और सभी अधिकारी और जवानों ने अपना हुलिया बदल दिया. महाकाल के भगत के रुप में वाहनों में सवार होकर वे तडके 3.30 बजे रतलाम शहर से राजस्थान की तरफ रवाना हुए और ढाई से तीन घंटे के सफर के बाद वे राजस्थान के प्रतापगढ जिले में पहुंच गये.
* डील का समय सुबह 8 बजे का हुआ था तय
सूत्रों के मुताबिक एमडी ड्रग्ज उत्पादन विष्णुलाल गायरी से अरनोद थाना क्षेत्र के दलोत मार्ग के ढाबे पर एमडी ड्रग्ज की डिलिंग सुबह 8 बजे करना तय हुआ था. इसके मुताबिक सुबह 5.30 से 6 बजे के दौरान निरीक्षक संदीप चव्हाण के नेतृत्व में 3 अधिकारी और 14 जवान पांच वाहनों से वहां पहुंच गये. किसी को भनक न लगने के लिए कामगारों के हुलिए में कुछ जवान रेती निकालने लगे और कुछ जवान ढाबे पर वेटर की भूमिका में लग गये.
* संपूर्ण ढाबे को लिया अपने कब्जे में
क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संदीप चव्हाण ने दलोत मार्ग के इस ढाबा संचालक को जाते ही अपना परिचय देते हुए विश्वास में लेकर पूरा ढाबा अपने कब्जे में लिया. उसे भरोसा दिलाया गया था कि, पूरे दिन की ढाबे पर जो कमाई होती है, वह उसे अदा की जाएगी. साथ ही यह भी विश्वास दिलाया गया था कि, उसे कुछ नहीं होगा. तब ढाबा संचालक ने सहयोग की भूमिका निभाते हुए अमरावती क्राइम ब्रांच के दल को ढाबा सौंप दिया. लेकिन इस बात की भनक न लगने देने के लिए पुलिस ने ढाबा संचालक को इधर-उधर कही भटकने नहीं दिया और जब तक ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ पूर्ण नहीं हुआ तब तक उसे (ढाबा संचालक) को पुलिस वाहन में ही बैठाकर रखा.
* शातीर था विष्णुलाल गायरी
एमडी ड्रग्ज उत्पादक विष्णुलाल गायरी का अपराधिक रिकॉर्ड काफी खतरनाक है. वह राजस्थान पुलिस के भी हाथ नहीं लग रहा था. उस पर अनेक मामले दर्ज है. वह हमेशा अपने आगे-पीछे सुरक्षा का कडा कवच रखता था. उसके सशस्त्र साथी हमेशा चारों तरफ रहते थे. सुबह 8 बजे का समय देने के बावजूद वह हर एक घंटे बाद अलग-अलग कारण बताता हुआ समय बिताता गया. दोपहर 12 बजे के समय उसने एमडी के सौदे के सौदे के लिए किसी कारणवश आने से इंकार भी कर दिया था. लेकिन बडी सुझबुझ से उसे निगोशिएशन कर बुलाया गया.
* पहले दो वाहनों से पहुंचे चार साथी
अभिनेता आमीर खान की फिल्म सरफरोश में मिर्ची सेठ और गुलफाम हसन गैंग के सदस्यों की तरह विष्णुलाल गायरी के ढाबे पर पहुंचने से पूर्व दो मोटर साइकिल पर उसके चार साथी इस ढाबे पर पहुंचे. उन्होंने पहले संपूर्ण परिसर की रेकी की. पश्चात अपने मालिक विष्णुलाल गायरी को ढाबे पर पहुंचने की झरी झंडी दी और कुछ समय बाद विष्णुलाल गायरी स्कार्पिओ कार में ढाबे पर पहुंचा.
* पल-पल की नजर रखे हुए थे पुलिस जवान
रेत कामगार की भूमिका में ढाबे के आसपास फैले पुलिस जवान बडी बारिकी से ढाबे की हर गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे. वहीं वेटर की भूमिका में 4 जवान ढाबे पर थे और एक को काउंटर पर मैनेजर की भूमिका में बैठाकर रखा गया था. विष्णुलाल गायरी की स्कार्पिओ के आगे-पीछे दो आपाची वाहन थे. इन वाहन में भी 6 लोग सवार थे. ढाबे पर पहुंचते ही विष्णुलाल को छोडकर सभी लोग वाहनों से उतरकर ढाबे में पहुंच गये.
* 20 मिनट तक विष्णुलाल बैठा रहा कार में
विष्णुलाल गायरी के साथी ढाबे में प्रवेश कर चारो तरफ फैलकर टेबल पर बैठ गये. कुल 10 साथियों ने ढाबे में प्रवेश किया था. वहां से 20 मिनट बाद जब विष्णुलाल गायरी को खतरा न रहने का सिग्नल दिया गया, तब विष्णुलाल अपनी कार से नीचे उतरा और ढाबे पर पहुंचा. मांगीलाल और विष्णुलाल के वहां पहुंचते ही क्राइम ब्रांच के दल ने सिग्नल मिलते ही उन्हें घेर लिया. लेकिन इतने आसानी से ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ पूरा नहीं होने वाला था.
* विष्णुलाल को घेरते ही साथी हुए अलर्ट
क्राइम ब्रांच के दल ने जैसे ही विष्णुलाल गायरी को घेर लिया. उसी समय आसपास के टेबल पर बैठे उसके साथी अलर्ट हो गये. वे अपने मालिक को किसी भी तरह से छूडाकर भागने के प्रयास में थे. इस दौरान उनकी शुरुआत तूतू-मैमै से हुई. जब उन्हें पता चला कि, वेटर के और कामगारों के हुलिया में यह सभी पुलिस अधिकारी और जवान है, तब उन्होंने रंगदारी दिखाना शुरु किया और पुलिस के साथ जोरदार झडप शुरु हो गई. पूरा वातावरण काफी तनावपूर्ण हो गया था. निरीक्षक संदीप चव्हाण ने अपने सहयोगी अधिकारी और जवानों को मांगीलाल और विष्णुलाल को ही टारगेट करने की सूचना दी. इसके तहत सभी लोगों ने दोनों को दबोच लिया और अपनी वर्दी का हाथ बताते ही विष्णुलाल के साथी वहां से भाग खडे हुए.
* तत्काल वाहन में डालकर रवाना हुए
सूत्रों के मुताबिक निरीक्षक संदीप चव्हाण ने अपने अधिकारी और जवानों को विष्णुलाल गायरी और मांगीलाल सिंघावत को अपने वाहनों में डाला और समय गंवाए बगैर गुजरात की तरफ रवाना हो गये. तेज रफ्तार से वाहन दौडते हुए राजस्थान पुलिस को चकमा देकर गुजरात की सीमा में प्रवेश करने के बाद सभी अधिकारी और जवानों ने राहत की सांस ली.
* जय महाकाल था कोडवर्ड
‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ चलाते समय सभी अधिकारी और जवान कामगार और महाकाल भगत के रुप में कपडों का परिधान करे हुए थे. कपाल पर तिलक, कान में बाली पहनकर सभी से वे जय महाकाल कह रहे थे. पुलिस को यह भी जानकारी थी कि, विष्णुलाल के साथियों के पास हथियार रहते है. इस कारण वे पहले से ही पूरी तरह सतर्क थे. जख्मी जवानों का गुजरात में उपचार भी किया गया.
* सरफरोश के ‘शिवा’ की भूमिका में 4 साथी
सूत्रों ने बताया कि, सरफरोश फिल्म में जिस तरह गुलफाम हसन के कट्टर साथी मकरंद देशपांडे ने ‘शिवा’ की भूमिका निभाई थी. उसी तरह विष्णुलाल के 4 साथी जो दुपहिया वाहन से पहले ढाबे पर रेकी करने पहुंचे थे, वे थे. वह भी ‘शिवा’ की तरह अपनी भूमिका निभा रहे थे. लेकिन निरीक्षक संदीप चव्हाण के नेतृत्व वाले दल ने किसी को भी मौका नहीं दिया और बडे साहस और चालाकी के साथ दोनों कुख्यातों को अमरावती लेकर पहुंच गये.
* 12 तक दोनों आरोपी रिमांड पर
मांगीलाल सिंघावत और विष्णुलाल मोहनलाल गायरी को स्थानीय न्यायालय में पेश कर 12 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है. पूछताछ में इन आरोपियों ने जिस कारखाने में एमडी ड्रग्ज तैयार किया जाता था, उसका कैमिकल कहां से लाया जाता था, इस बात की भी जानकारी ली है. इस प्रकरण में अभी भी अरनोद थाना क्षेत्र के कोडीनेरा में रहने वाला राधेश्याम श्रीपाद दमामी फरार है. पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है. मामले की जांच क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संदीप चव्हाण आगे कर रहे हैं.
* सीपी ने की प्रशंसा
‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ सफल होने पर और एमडी ड्रग्ज उत्पादक विष्णुलाल गायरी व माफिया मांगीलाल सिंघावत दबोचे जाने पर पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने क्राइम ब्रांच दल के इस साहस की प्रशंसा की है. उन्होंने इस प्रशंसनीय जांच के लिए और आरोपियों को दबोचे जाने पर पुलिस महासंचालक के पास पुरस्कार की सिफारिश भी की है.
* ‘अब ऑपरेशन वाईप आउट’
क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संदीप चव्हाण ने अमरावती मंडल को बताया कि, ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ सफल होने के बाद 15 अगस्त 2025 से अमरावती में ड्रग्ज तस्करों के खिलाफ शुरु किया गया ‘ऑपरेशन वाईट आउट’ को और तेजी से चलाया जाएगा. इस ऑपरेशन की विस्तृत खबर दैनिक अमरावती मंडल को कल शुक्रवार 10 अप्रैल के अंक में प्रकाशित की जाएगी.

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