राजूरा की हरी मिर्च से होता है लाखों का कारोबार

उपबाजार ने दिलायी अंतर्राष्ट्रीय पहचान

* मिरची उत्पादन से समृद्धि की दिशा
वरूड/दि.20 -वरूड तहसील सहित नागपुर जिले में काटोल, वर्धा जिले के आष्टी और कारंजा इन तहसीलों में बडे पैमाने पर मिरची का उत्पादन लिया जाता है. वर्तमान में राजूरा बाजार में व्यापक स्वरूप में रोजाना मिरची का बाजार लगता है. कईबार तो राजूरा बाजार की मिरची खरीदने के लिए सीधे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से व्यापारी आते है. इसलिए राजूरा बाजार से व्यवसायिक संबंध अब सीधे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से आ गया है.
लगभग 7 हजार आबादी रहने वाले वरूड तहसील में राजूरा बाजार यह गांव वरूड से आष्टी मार्ग पर है. यहां पर वरूड कृषि उपज बाजार समिति का उपबाजार लगता है. लेकिन जनवरी के बाद यहां मिरची की आवक कम होती है. उसी प्रकार बाजार मं व्यवहार भी कम होने लगता है. गणेशोत्सव, दुर्गोत्सव में मिरची बाजार में बडे पैमाने पर आवक रहती है. हरसाल कोलकाता से बडी संख्या में व्यापारी राजूरा बाजार में आते है. कोलकाता सहित पश्चिम बंगाल में नवरात्रि उत्सव अधिक उत्साह और व्यापक स्वरूप में मनाया जाता है. इसलिए वहां पर मिरची मांग भी ज्यादा रहती है. जिसके कारण कोलकाता के व्यापारी मिरची खरीदी के लिए सीधे राजूरा बाजार पहुंचते है. हर साल नवरात्रि उत्सव के नौं दिनों में राजूरा बाजार से हर दिन कोलकाता के लिए 500 से 600 क्विंटल मिर्च खरीदी कर ले जायी जाती है, ऐसा स्थानीय विक्रेताओं का कहना है.
* स्थानीय व्यापारियों सहित अन्य व्यापारी भी
राजूरा बाजार में स्थानीय तथा अन्य स्थान से हर दिन 27 से 28 व्यापारी मिरची खरीदने के लिए आते है. माल की आवक बढने के बाद स्थानीय व्यापारियों सहित मुंबई, दिल्ली, कोलकाता इन स्थानों के व्यापारी भी मिरची खरीदने के लिए यहां के बाजार में पहुंचते है, ऐसा स्थानीय लोगों ने बताया.

किसानों को अधिकार का मार्केट
राजूरा बाजार के मिरची उपबाजार में व्यापक किसान हित को देखते हुए बाजार समिति द्वारा सभी सुविधाओं की उपलब्धता पर जोर दिया जा रहा है. इस बाजार के कारण किसानों को हरी मिर्च विक्री के लिए नजदीक ही अधिकार का मार्केट उपलब्ध हुआ है. इसलिए किसान बडे पैमाने पर मिरची का उत्पादन ले रहे है. बाजार समिति का वार्षिक कारोबार लगभग पौने दो करोड तक ले जाने में इस मार्केट का भी योगदान है.
-नरेंद्र उर्फ बबलू पावडे, सभापति,
बाजार समिति, वरूड

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