खोडके के बिना भी पूरी तैयारी कर ली थी राणा ने
45 के जादुई आंकडे का जुगाड

* महापालिका महापौर- उप महापौर चुनाव
अमरावती/ दि. 7- महापालिका के 9 वर्षो बाद हुए आम चुनाव के नतीजे गत 16 जनवरी को वोटों की गिनती के साथ घोषित किए गये. तत्पश्चात थोडी खींचतान से ही शुक्रवार का महापौर और उप महापौर का चुनाव हो सका. ऐसे में सियासी जानकार शुक्रवार को मनपा सदन के घटनाक्रम, वोटिंग, क्रास वोटिंग और तटस्थता को बारीकी से अवलोकन कर रहे हैं. उनके अवलोकन का सार यही निकला है कि विधायक संजय खोडके के बगैर भी महायुति उप महापौर और महापौर चुनाव जीत जाती. विधायक रवि राणा ने युवा स्वाभिमान के अपने 15 सदस्यों के अलावा भी नगरसेवक जुटा लिए थे. सदन में आवश्यक 44 का बहुमत का जादुई आंकडा राष्ट्रवादी कांग्रेस अजीत पवार के सदस्यों के बगैर हासिल कर लिया था.
मनपा चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद से ही संजय खोडके के नेतृत्व वाला राष्ट्रवादी अजीत पवार खेमा नाराज था. प्रीपोल अलायन्स नहीं हो पाया था. पोस्ट पोल अलायन्स में भी विधायक राणा ने बयानबाजी कर मनपा की सत्ता से संजय खोडके को दूर रखने की कोशिशें प्रारंभ कर दी थी. ऐसे में मनपा सदन में महायुति के साथ बैठने में खोडके के राजी नहीं होने की चर्चा रही. वे विधायक रवि राणा से दूरी बनाए रखना चाहते थे.
विधायक संजय खोडके मनपा में महायुति से कदाचित फासला रखनेवाले थे. इसी बीच पूरे महाराष्ट्र को हिला देनेवाला उप मुख्यमंत्री अजीत दादा पवार का हादसा हो गया. अजीत दादा की प्लेन दुर्घटना में मृत्यु से विधायक खोडके ने अपनी राजनीतिक समझ से काम लिया. अपने रूख को नरम किया. बारंबार कह रहे थे कि सीएम को अजीत दादा ने जबान दी है. आड ली जा रही थी. ऐसे में पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले खोडके के घर पहुंचे. जिससे खोडके के लिए महायुति का साथ देना और आसान हो गया.
सियासी जानकार कह रहे है कि खोडके इतने अपरिपक्व नेता नहीं है कि मनपा की सत्ता में कुछ न मिलने पर भी समर्थन दे दे. राजनीतिक मजबूरी न होती तो खोडके फैसला नहीं लेते. ऐसे में विधायक रवि राणा ने मनपा फ्लोर की जोरदार तैयारी की थी. उन्होंने एमआयएम के दो सदस्यों को तैयार कर लिया था. इसके अलावा दो सदस्यों वाले एक दल के वोट को भी फोड लिया था. फलस्वरूप भाजपा के 25, युवा स्वाभिमान के 15, शिंदे गट के दो और उपरोक्त तीन ऐसे मिलाकर 44- 45 का जादुई आंकडा वे पूर्ण करने जा रहे थे.
विधायक संजय खोडके ने चार दिन पहले ही भूमिका स्पष्ट कर दी थी. उन्होंने बयान भी दिया था कि राष्ट्रवादी मनपा में महायुति के साथ रहेगी. आपरेशन राणा ढीला कर दिया गया. इस ऑपरेशन में शामिल सदस्यों में से एक ने खुले तौर पर मतदान किया. जबकि शिवसेना उबाठा का सदस्य तटस्थ रहा. राणा ने कदम कदम पर यही कहा कि मनपा में भाजपा का महापौर बैठायेंगे. मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को उन्होंने इस बात का वचन दिया था. जिससे उनकी पूरी तैयारी, प्लानिंग थी. यह बात शुक्रवार की आमसभा में खासकर महापौर और उप महापौर चुनाव में जो हुआ उससे स्पष्ट परिलक्षित हो रही है.





