महाराष्ट्र में रिक्षा, टैक्सी और बस चालकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, जनजीवन प्रभावित

मुंबई /दि.5- महाराष्ट्र में ई-चलान प्रणाली के विरोध में परिवहन संगठनों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. इस हड़ताल के कारण मुंबई, पुणे और ठाणे सहित कई बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई है और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी (एम-टैक) के आह्वान पर 5 मार्च की मध्यरात्रि से रिक्षा, टैक्सी, बस और मालवाहक वाहनों के चालक हड़ताल पर चले गए हैं. परिवहन संगठनों का आरोप है कि ई-चलान प्रणाली के माध्यम से पुलिस द्वारा मनमाने ढंग से जुर्माना लगाया जा रहा है, जिसे उन्होंने डिजिटल वसूली करार दिया है.
* ठाणे में चक्का जाम, लंबा ट्रैफिक जाम
ठाणे के मुलुंड जकात नाका क्षेत्र में सुबह से ही तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली. बस मालिक सेवा संघ और अन्य संगठनों के सदस्यों ने काले झंडे लेकर बसों को सड़क के बीच खड़ा कर चक्का जाम आंदोलन किया. इसके कारण मुंबई की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. आंदोलनकारियों ने पुलिस उपायुक्त प्रशांत कदम को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा. स्थिति को देखते हुए नवघर पुलिस ने पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया है.
* पुणे में भी प्रदर्शन
पुणे में भी रिक्षा यूनियन और मालवाहतूकदार संयुक्त कृती समिति ने जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान करीब दो घंटे तक रिक्षा और मालवाहक वाहनों की सेवा पूरी तरह बंद रखी गई. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ई-चलान के माध्यम से अवैध वसूली की जा रही है और इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए.
* मुंबई में आजाद मैदान पर शक्ति प्रदर्शन
मुंबई के आजाद मैदान में भी बड़ी संख्या में परिवहन व्यवसायी एकत्रित होकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इस आंदोलन में ट्रक, स्कूल बस, निजी ट्रैवल्स, टेम्पो, टैक्सी और ऑटो-रिक्शा संगठनों ने भाग लिया है. आंदोलनकारियों का कहना है कि एक ही गलती के लिए दिन में कई बार ई-चलान जारी किए जाते हैं और कई स्थानों पर पार्किंग की सुविधा न होने के बावजूद चालान काटा जाता है.
* सरकार से बातचीत बेनतीजा
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ हुई बैठक भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि सरकार केवल मौखिक आश्वासन दे रही है. जब तक सरकार इस विषय पर आधिकारिक शासनादेश (जीआर) जारी नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. अब इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस क्या निर्णय लेते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. परिवहन संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा.
* आम जनता पर पड़ेगा असर
इस हड़ताल में स्कूल बस संगठनों के शामिल होने से विद्यार्थियों, विशेषकर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा दूध, सब्जी और ईंधन की आपूर्ति पर भी अगले 48 से 72 घंटों में असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. मुंबई और पुणे में रिक्षा और टैक्सी की कमी के कारण दफ्तर जाने वाले लोगों को भी आवागमन में भारी कठिनाई झेलनी पड़ रही है.

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