मेलघाट में अब सडक हादसे लील रहे जिंदगियां

दो साल में सडक हादसों में हुआ जबरदस्त इजाफा

* बिना फिटनेस के दौड रहे ओवरलोडेड वाहन
* प्रशासन निष्क्रिय, जनप्रतिनिधि भी मौन
अमरावती /दि.27 – किसी समय कुपोषण सहित माता मृत्यु व बाल मृत्यु की वजह से चर्चा में रहनेवाला मेलघाट विगत दो वर्षों से आए दिन होनेवाले सडक हादसों की वजह से चर्चा में है. क्योंकि विगत दो वर्षों के दौरान मेलघाट क्षेत्र में आए दिन कहीं न कहीं कोई न कोई भीषण सडक हादसा घटित हो रहा है और ऐसे हादसों में कई लोगों की मौत होने के साथ-साथ कई लोग गंभीर रुप से घायल भी हुए है. लेकिन इसके बावजूद प्रशासन द्वारा मेलघाट क्षेत्र में सडक हादसों को टालने हेतु कोई उपाययोजनाएं नहीं की गई है. साथ ही साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा भी इस विषय को लेकर कुछ भी नहीं कहा जा रहा. ऐसे में प्रशासनिक निष्क्रियता व अनदेखी के चलते मेलघाट क्षेत्र के पहाडी व घुमावदार रास्तों पर ओवरलोडेड यात्री व मालवाहक वाहन बिना फिटनेस के धडल्ले के साथ दौड रहे है. जिनकी वजह से मेलघाट क्षेत्र के भोलेभाले आदिवासी सडक हादसों का शिकार हो रहे है.
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र की धारणी व चिखलदरा तहसीलों के ग्रामीण इलाकों में यात्री ढुलाई हेतु निजी यात्री वाहनों का धडल्ले के साथ अवैध रुप से प्रयोग किया जाता है तथा यात्री ढुलाई करनेवाले काली-पीली टैक्सी वाहन सहित क्रूझर, पीकअप वैन व निजी बस जैसे वाहन बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के ही सडकों पर पर्र्‍हाटा भरते दिखाई देते है. खास बात यह भी है कि, इसमें से कई वाहनों की वैलिडिटी यानि निर्धारित कार्य अवधि भी समाप्त हो चुकी है. लेकिन इसके बावजूद ऐसे पुराने व खस्ता हाल वाहन सडकों पर उतरकर यात्री ढुलाई करते हुए क्षेत्र के आदिवासियों की जिंदगी के साथ खिलवाड कर रहे है.
ऐसा नहीं है कि, आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र की इस वास्तविकता से जिला प्रशासन व आरटीओ विभाग अंजान है. लेकिन सबकुछ जानते-समझते रहने के बावजूद भी जानबूझकर इस समस्या की ओर अनदेखी की जा रही है. साथ ही साथ हैरत की बात यह भी है कि, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा भी इस गंभीर विषय को लेकर कोई आवाज नहीं उठाई जा रही.

* होली पर्व के समय बढ जाती है सडक हादसों की आशंका
ध्यान दिला दें कि, मेलघाट क्षेत्र के आदिवासी पूरे सालभर रोजगार एवं काम की तलाश में मेलघाट से स्थलांतरित होकर अन्य शहरों व जिलों में चले जाते है तथा होलिका त्यौहार मनाने के लिए अपने परिवार सहित अपने गांव वापिस लौटते है. मेलघाट क्षेत्र के आदिवासियों में होली के त्यौहार को सबसे बडा पर्व माना जाता है और क्षेत्र के आदिवासियों द्वारा 4 से 5 दिनों तक होलिका त्यौहार बडी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. जिसके चलते होली का पर्व आते-आते मेलघाट के ग्रामीण इलाकों में सडकों पर वाहनों की आवाजाही अच्छी-खासी बढ जाती है. क्योंकि आदिवासियों की मेलघाट वापसी का फायदा उठाने हेतु कई निजी यात्री वाहन चालकों द्वारा मेलघाट में यात्री ढुलाई का काम शुरु किया जाता है. जिसके तहत सभी यात्री वाहनों में ठुंस-ठुंसकर यात्रियों को भरा जाता है तथा वाहनों की छतों पर भी यात्रियों को बिठाने से कोई परहेज नहीं किया जाता. जिसके चलते ऐसे ओवरलोडेड वाहनों के साथ मेलघाट के पहाडी, घुमावदार व संकरे रास्तों पर सडक हादसे होने की संभावना हमेशा ही बनी रहती है.

* मेलघाट क्षेत्र में विगत दो वर्ष के दौरान हुए प्रमुख सडक हादसे
– 23 सितंबर 2024 – सेमाडोह में चावला ट्रैवल्स की बस पुलिया से नीचे गिरी, 4 यात्रियों की मौके पर मौत, 45 से अधिक घायल.
– 15 अप्रैल 2025 – हरिसाल मार्ग के काढव फाटे पर पिकअप की टक्कर में एक दोपहिया चालक की मौत.
– 6 मई 2025 – धारणी-परतवाडा मार्ग के मांगीया घाट में निजी बस दुर्घटना, 33 घायल, 7 गंभीर.
– 27 जून 2025 – राणीगांव घाट में बिना परमिट निजी बस दुर्घटनाग्रस्त, 1 यात्री मृत, 20 घायल.
– 22 अगस्त 2025 – कढाव फाटे पर हीरो स्प्लेंडर दुर्घटना, 2 लोगों की मौत.
– 22 फरवरी 2026 – शिवाझिरी घाट में पिकअप खाई में गिरी, 5 मजदूरों की मौत, 10 से अधिक घायल.
– 25 फरवरी 2026 – भवई फाटे पर बोलेरो और एसटी बस की टक्कर, 7 यात्री घायल.

* दो माह में 152 वाहनों से 10.53 लाख का जुर्माना
वहीं दूसरी ओर आरटीओ द्वारा दावा किया गया कि, विगत दो माह के दौरान 152 वाहनों की जांच-पडताल की गई और नियमों का उल्लंघन करनेवाले वाहनों से 10.53 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया. खुद आरटीओ ने यह स्वीकार किया कि, मेलघाट क्षेत्र में फिटनेस प्रमाणपत्र, परमीट, ओवरलोडींग सहित यातायात के अन्य नियमों के उल्लंघन को लेकर यह कार्रवाई की गई.

Back to top button