गोंद के लिए सालई के पेडों पर नजर, केमिकलयुक्त इंजेक्शन के कारण पेड सूखे
वनसंपदा खतरे में, मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प की एमपी की सीमा पर गोंद की आंतरराज्यीय तस्करी

अमरावती /दि.17 – मेलघाट के जंगल पर अब तस्करों की तिरछी नजर है. मूल्यवान सालई पेडों की साल निकालकर उसमें से गोंद निकालने का अवैध सिलसिला भारी मात्रा में शुरु रहने की घटना वन विभाग के सुसर्दा परिक्षेत्र में हुई कार्रवाई में उजागर हुई है.
अधिक गोंद मिलने के लिए केमिकलयुक्त इंजेक्शन लगाए जाने से मेलघाट के सालई के पेड सूखकर नष्ट होने और लुप्त होने के मार्ग पर है. अकोट वन्यजीव विभाग के धुलघाट रेलवे रेंज और प्रादेशिक वन विभाग के मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित जंगल में जैवविविधता को भारी खतरा निर्माण हो गया है.
* इस क्षेत्र का जंगल रडार पर
धारणी तहसील के मेलघाट प्रादेशिक वन विभाग तथा अकोट वन्यजीव विभाग अंतर्गत आनेवाले झिवाझीरी, हिराबंबई, राणीगांव, गोलाई, मोथाखेडा, सिनबंद, भादुबल्डा, धुलघाट रेलवे, सुसर्दा, बारातांडा, बिरोटी, चेंडो, जामपानी, पलसाकुंडी आदि गांव से सटकर स्थित इलाकों के जंगल फिलहाल तस्करों के रडार पर है. इस कारण वन और व्याघ्र प्रकल्प के अधिकारियों द्वारा विशेष ध्यान देना आवश्यक है.
* तस्करी की श्रृंखला
तस्कर सालई के पेडों की छाल उतारने के लिए धारदार हथियारों का इस्तेमाल करते है. पेडों को चोट पहुंचाने के बाद उसमें से निकलने वाला गोंद सूख जाता है और बोरियों में भर लिया जाता है. इस गोंद को बोरियों में भरकर मध्य प्रदेश सीमा से अंतरराज्यीय बाजार में भेजा जाता है. सडक सुसर्दा से होकर गुजरती है. इसलिए वन अधिकारी सतर्क है.
* गश्ती और तीन कार्रवाई
सुसर्दा वनपरिक्षेत्र सहित अकोट वन्यजीव विभाग क्षेत्र में यह घटना सामने आई है. वन विभाग दिन-रात गश्त कर रहा है. पिछले महिने इस क्षेत्र में तीन कार्रवाई हुई है.
* रसायन का जानलेवा प्रयोग
तस्करी का व्यापार इतना भयावह है कि, नैसर्गिक रुप से मिलनेवाले गोंद से अधिक उत्पादन मिलने की लालसा में जंगल में अवैध रुप से प्रवेश कर पेडों को खतरनाक रसायनों का इंजेक्शन लगाया जा रहा है. रासायनिक इंजेक्शन पेडों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर रहे है और उन्हें अंदर से सडा रहे है. यह रसायन पेडों को समय से पहले सूखने का कारण बन रहे है. परिणामस्वरुप वन विशेषज्ञों ने आशंका व्यक्त की है कि, मेलघाट के जंगल में पाई जानेवाली सालई प्रजाति भविष्य में विलुप्त हो सकती है.
* तस्करों पर नजर
सुसर्दा वनपरिक्षेत्र में सालई के पेडों को काटकर उसमें से गोंद निकालने का प्रयास किया जा रहा है. यह जानकारी सामने आने पर हमारी टीम रात-दिन गश्त कर रही है. इस संबंध में तीन कार्रवाई की गई है. हम तस्करी रोकने पर विशेष ध्यान दे रहे है.
– अंजना बनसोडे, वनपरिक्षेत्र अधिकारी, सुसर्दा.





