अपने ही ‘घर’ में चारों खाने चित हुए शिवराय कुलकर्णी व जयंत डेहनकर
दोनों पर भाजपा में पूरे शहर की थी जिम्मेदारी, कोर कमिटी में थे दोनों शामिल

* डेहनकर को पार्टी ने बनाया था मनपा का निर्वाचन प्रमुख, नई बस्ती बडनेरा का भी सौंपा था जिम्मा
* प्रदेश प्रवक्ता रहनेवाले कुलकर्णी पर जुनी बस्ती बडनेरा की सौंपी गई थी जिम्मेदारी
* शहर भाजपा के दोनों प्रमुख पदाधिकारी कुलकर्णी व डेहनकर है बडनेरा के ही निवासी
* बडनेरा के दोनों प्रभागों में भाजपा का हुआ ‘सुपडा साफ’, वायएसपी व एमआईएम ने किया ‘क्लीन स्वीप’
अमरावती/दि.17 – गत रोज घोषित हुए अमरावती महानगर पालिका के चुनावी नतीजों में सबसे रोचक परिणाम अमरावती का उपनगरीय क्षेत्र रहनेवाले बडनेरा शहर से सामने आया है. जहां के दो प्रभागों की 8 सीटों पर भाजपा का पूरी तरह से ‘सुपडा साफ’ हो गया है. जिसमें से प्रभाग क्र. 22 नई बस्ती बडनेरा में विधायक राणा के नेतृत्ववाली युवा स्वाभिमान पार्टी ने ‘क्लीन स्वीप’ करते हुए चारों सीटें जीत ली. वहीं प्रभाग क्र. 21 जुनी बस्ती बडनेरा की तीन सीटों पर एमआईएम तथा एक सीट पर वायएसपी ने जीत दर्ज करते हुए भाजपा को एक तरह से बडनेरा शहर से ‘हद्द पार’ ही कर दिया है. जिसके चलते बडनेरा क्षेत्र से वास्ता रखनेवाले शहर भाजपा के कद्दावर नेता रहनेवाले प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी एवं पार्टी के मनपा निर्वाचन प्रमुख रहनेवाले प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जयंत डेहनकर के नेतृत्व और उनकी अपने गृह क्षेत्र पर पकड को लेकर अब सवालिया निशान उठ रहे है. क्योंकि ये दोनों ही नेता अपने ही घर में चारों खाने चित हो गए है.
बता दें कि, जुनी बस्ती बडनेरा से वास्ता रखनेवाले भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी तथा नई बस्ती बडनेरा से वास्ता रखनेवाले भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व पार्टी द्वारा मनपा चुनाव हेतु निर्वाचन प्रमुख बनाए गए पूर्व शहराध्यक्ष जयंत डेहनकर ही अमरावती शहर में भाजपा द्वारा बनाई गई कोर कमिटी में सबसे प्रमुख चेहरे थे. जिनकी पार्टी के लिए प्रत्याशी तय करने से लेकर पार्टी प्रत्याशियों की जीत के लिए रणनीति तय करने में भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी. साथ ही साथ जब पार्टी ने अपने सभी बडे नेताओं व पदाधिकारियों को शहर के अलग-अलग प्रभागों की जिम्मेदारी सौंपी, तो प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी एवं प्रदेश पदाधिकारी जयंत डेहनकर पर उनका ही गृह क्षेत्र व निवास क्षेत्र रहनेवाले जुनी बस्ती बडनेरा व नई बस्ती बडनेरा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. जिसके चलते उम्मीद जताई जा रही थी कि, पूरे शहर में भाजपा की राजनीति चलानेवाले इन दोनों नेताओं द्वारा अपने-अपने गृह क्षेत्र में जबरदस्त कमाल किया जाएगा. लेकिन कमाल की बात यह रही कि, इन दोनों नेताओं के प्रभागों में भाजपा का मामला ‘टायं-टायं फिस्स’ वाला हो गया. क्योंकि जुनी बस्ती बडनेरा व नई बस्ती बडनेरा की कुल 8 सीटों में से एक भी सीट पर भाजपा का प्रत्याशी निर्वाचित नहीं हो पाया. जिसके चलते बडनेरा शहर से भाजपा पूरी तरह साफ हो गई. जबकि किसी समय नई बस्ती बडनेरा विशेष रुप से भाजपा का मजबूत गढ हुआ करता था. जहां पर इस बार युवा स्वाभिमान पार्टी ने ‘क्लीन स्वीप’ कर दिया है. वहीं दूसरी ओर जुनी बस्ती बडनेरा में कभी भाजपा के लिए थोडी-बहुत गुंजाइश हुआ करती थी, वह भी अब एमआईएम और युवा स्वाभिमान पार्टी के बढते प्रभाग की वजह से खत्म हो गई है. जिसके चलते बडनेरा शहर से वास्ता रखनेवाले भाजपा के दो बडे और कद्दावर नेताओं के नेतृत्व कौशल व राजनीतिक क्षमता पर सवालिया निशान लगते दिखाई दे रहे है.





