जरूरतमंदों को ख्याल रखना भी इबादत

सउदी अरब के पूर्व खेल अधिकारी एजाजुद्दीन बासित का प्रतिपादन

अमरावती/ दि.12 – पवित्र रमजान माह के अवसर पर सउदी अरब के पूर्व खेल अधिकारी एजाजुद्दीन बासित ने रमजान के धार्मिक, सामाजिक और मानवीय महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह महीना नेकियों, इबादत, आत्मसंयम और मानवसेवा का संदेश देता है. उन्होंने बताया कि रमजान के पवित्र महीने में किए गये अच्छे कार्यो का कई गुना सवाब मिलता है. इसलिए इस दौरान लोगों को अधिक से अधिक भलाई और सेवा कार्य करने चाहिए.
उन्होंने कहा कि मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए रमजान वर्ष का सबसे मुकद्दस महिना होता है. इस महीने में सभी रोजगार सुर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं. रोजा केवल भूखे- प्यासे रहने का नाम नहीं है. बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन, धैर्य और बुराईयों से दूर रहने का अभ्यास भी सिखाता है. रमजान का महीना व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, आत्मशुध्दी करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की प्रेरणा देता है.
एजाजुद्दीन बासित ने बताया कि रमजान माह आपसी भाईचारे, प्रेम, सहानुभूति, क्षमा, दयालुता और मानवता का संदेश देता है. इस दौरान लोग जरूरतमंदों और गरीबों की सहायता कर सामाजिक समानता को बढावा देते हैं. रोजा रखने से व्यक्ति को भूख और प्यास का अहसास होता है. जिससे गरीब और वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशीलता बढती है और समाज में सहयोग एवं सेवा की भावना मजबूत होती है. उन्होंने विशेष रूप से जकात के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम धर्म में जकात को 5 प्रमुख स्तंभों में से एक माना गया है.
जकात अरबी भाषा का शब्द हैं, जिसका अर्थ पवित्र करना या शुध्द करना होता है. उन्होंने बताया कि साल भर की कमाई का लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सा जरूरतमंदोें, गरीबों और असहाय लोगों को देना फर्ज माना गया है. जकात से व्यक्ति की कमाई पवित्र होती है और समाज में आथिक संतुलन स्थापित करने में मदद मिलती है. उन्होंने आगे कहा कि रमजान का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का भी अवसर प्रदान करता है.
इस दौरान मस्ज्ञिदों में विशेष नमाज, कुरआन पाठ और दुआओं का आयोजन किया जाता है. वहीं इफ्तार के माध्यम से लोग एक- दूसरे के साथ मिलकर रोजा खोलते हैं. जिससे सामाजिक एकता और सदभाव को बढावा मिलता है. एजाजुद्दीन बासित ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि रमजान के इस पवित्र अवसर पर जरूरतमंदों की मदद करें, आपसी भाईचारा बनाए रखें और समाज में शांति, सौहार्द तथा इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करें. उन्होंने कहा कि रमजान का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा, आत्मशुध्दि और समानता को बढावा देना है, गंगा जमुनी तहजीब बनाए रखना चाहिए और अपने जीवन में अपनाना चाहिए.

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