विधायक राणा को लेकर भाजपा द्विधा स्थिति में!
युति में रहने के बावजूद राणा ने कई सीटों पर दी है भाजपा को चुनौती

* भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशी उतारे है मैदान में
* भाजपा का एक धडा बातचीत के जरिए समाधान के पक्ष में, दूसरा धडा राणा के साथ युति तोडने का पक्षधर
अमरावती/दि.7 – महानगरपालिका चुनाव के दौरान भाजपा एक और संवेदनशील अंदरूनी संकट से जूझती नजर आ रही है. यह संकट है विधायक रवि राणा को लेकर, जिनके साथ युति में रहते हुए भी उनकी पार्टी युवा स्वाभिमान ने कई प्रभागों में सीधे तौर पर भाजपा को चुनौती दे दी है. इस स्थिति ने भाजपा नेतृत्व को द्विधा में डाल दिया है.
* युति में रहकर ‘फ्रेंडली फायर’?
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि विधायक रवि राणा औपचारिक रूप से भाजपा के साथ युति का हिस्सा हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी पार्टी ने भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, युति में रहकर चुनावी मुकाबला भाजपा के लिए सबसे असहज स्थिति है.
* मनपा चुनाव में कई सीटों पर सीधी चुनौती
सूत्रों का दावा है कि युवा स्वाभिमान पार्टी द्वारा मैदान में उतारे गए प्रत्याशी कई प्रभागों में भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले बन रहे हैं और वोटों के बंटवारे का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में विधायक रवि राणा को लेकर भाजपा के भीतर स्पष्ट रूप से दो धड़े उभर आए हैं. जिसमें से पहला संवाद समर्थक खेमा यह मानता है कि चुनाव के बीच युति तोड़ना जोखिम भरा होगा. उनका तर्क है कि विधायक रवि राणा का स्थानीय प्रभाव अभी भी निर्णायक है. इसलिए बातचीत और सीट-समायोजन के जरिए समाधान निकाला जाए. वहीं दूसरी ओर सख्त रुख वाला दूसरे खेमे का कहना है कि यह व्यवहार पार्टी अनुशासन का उल्लंघन है. युति में रहकर भाजपा को चुनौती देना भविष्य में गलत मिसाल बनेगा. इसलिए स्पष्ट ब्रेक और राजनीतिक दूरी जरूरी है.
* हाईकमान की चुप्पी, संकेतों की राजनीति
सूत्र बताते हैं कि फिलहाल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व खुलकर कोई फैसला नहीं लेना चाहता. पार्टी की रणनीति है कि पहले चुनाव परिणाम देखना, उसके बाद युति और भविष्य के रिश्तों पर अंतिम निर्णय लेना. इस बीच, स्थानीय नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है, क्योंकि हर प्रभाग में नुकसान का आकलन अलग-अलग है.
* चुनाव के बाद बड़ा फैसला संभव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मनपा चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि भाजपा रवि राणा के साथ समझौते की राह पर आगे बढ़ेगी, या फिर कठोर रुख अपनाते हुए युति समाप्त करेगी. कुल मिलाकर, रवि राणा प्रकरण ने भाजपा को रणनीतिक मोड़ पर ला खड़ा किया है. यह मामला केवल एक नेता का नहीं, बल्कि भाजपा की युति नीति और संगठनात्मक अनुशासन की परीक्षा बन चुका है.





