सिपना और गडगा नदी का पुल वाहन चालकों के लिए बना खतरनाक
पुल की उंचाई बढाने का मुद्दा कई वर्षों से लंबित

* नागरिकों में तीव्र रोष
धारणी/दि.16 -तहसील में पुलों की कम ऊंचाई वाहन चालकों के लिए सदैव खतरा बनती रही है. बारिश में हर साल समस्या पैदा होती है. धारणी तहसील से होकर सालभर बहने वाली प्रसिद्ध सिपना नदी तथा गडगा नदी पर बने पुलों की ऊंचाई बढ़ाने का मुद्दा कई वर्षों से लंबित है. इसे लेकर नागरिकों में तीव्र रोष है. सार्वजनिक निर्माण विभाग और जिला परिषद निर्माण विभाग द्वारा समय-समय पर वरिष्ठ अभियंताओं की मौजूदगी में निरीक्षण, सर्वे और नए पुलों की मंजूरी की बातें सामने आई, लेकिन हकीकत में आज भी ये पुल बेहद कम ऊंचाई के हैं और काम कागजों तक ही सीमित है. धारणी तहसील में सिपना नदी पर दिया व उतावली तथा गडगा नदी पर रोहिणीखेड़ा के पुल अत्यंत कम ऊंचाई के हैं. हर वर्ष मानसून में भारी बारिश के दौरान इन पुलों पर पानी बहने लगता है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है और कई गांवों का तालुका मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है. इसका सबसे ज्यादा असर मरीजों, विद्यार्थियों, किसानों और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीणों पर पड़ता है. बाढ़ के समय मरीजों को अस्पताल पहुंचाना कठिन हो जाता है, विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है. और किसानों को कृषि उपज बाजार तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
कई बार वैकल्पिक मार्ग न होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पानी पार करना खतरनाक होता है. अमरावती के जिलाधिकारी आशीष येरेकर सहित संबंधित निर्माण विभाग और जिला परिषद निर्माण विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर पुलों की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य शुरू करने की ठोस मांग की है. अन्यथा भविष्य में बड़ी दुर्घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता, ऐसा चेतावनी भी दी गई है.
लोकनिर्माण विभाग अमरावती की तत्कालीन अधिकारी रूपा गिरासे ने धारणी दौरे के दौरान कम ऊंचाई वाले पुलों का निरीक्षण कर ऊंचाई बढ़ाने व मरम्मत के प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजे थे. तब शीघ्र मंजूरी और काम पूरा होने की उम्मीद जताई गई थी. लेकिन चार वर्ष बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है. हर मानसून में बाढ़ की समस्या निर्माण हो जाती है और नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग फिर से जोर पकड़ रही है.





