ठेकेदारों व बिल्डरों के ‘करप्शन’ का शिकार होने से बचा शहर
‘अमरावती मंडल’ की एक और लडाई हुई सफल

* मोसीकॉल कारखाने की जमीन की निविदा प्रक्रिया हुई रद्द
* जीत का पूरा श्रेय राकांपा नेता व विधायक संजय खोडके को
* विधायक खोडके के प्रयासों से निविदा प्रक्रिया हुई खारिज
* अब शहर के बीचों-बीच स्थित 25 एकड जमीन का होगा सार्वजनिक उपयोग
अमरावती /दि.13 – अमरावती शहर व जिले सहित पूरे संभाग के जनहितकारी व ज्वलंत मुद्दों के लिए हमेशा ही जागरुक, तत्पर व मुखर रहनेवाले दैनिक ‘अमरावती मंडल’ द्वारा शुरु की गई एक और लडाई आज सफल साबित हुई, जब सरकार द्वारा अमरावती की विलास नगर स्थित मोसीकॉल कारखाने की जमीन की विक्री हेतु जनवरी 2026 में शुरु की गई निविदा प्रक्रिया को रद्द करने की बात कही गई. इसके साथ ही अमरावती शहर ठेकेदारों व बिल्डरों की लॉबी के करप्शन का शिकार रहने से बाल-बाल बच गया, इस बात का पूरा श्रेय अजीत पवार गुट वाली राकांपा के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधान परिषद सदस्य संजय खोडके को दिया जा सकता है. जिन्होंने मोसीकॉल कारखाने की जमीन को बेचने हेतु चलाई जा रही निविदा प्रक्रिया को लेकर विधान परिषद में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया था. जिसके जरिए विधायक खोडके ने इस निविदा प्रक्रिया को रद्द करते हुए मोसीकॉल कारखाने की विगत कई वर्षों से खाली पडी जमीन को सरकार द्वारा अधिग्रहित कर इसका सार्वजनिक हित में प्रयोग किए जाने की मांग भी उठाई थी.
बता दें कि, पुराना कॉटन मार्केट परिसर से शेगांव नाका की ओर जानेवाले विएमवि रोड पर मौजे तारखेडा के सर्वे नं. 48, 49, 50 व 51 में महाराष्ट्र स्टेट ऑईल सिड्स कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल कार्पोरेशन लि. यानि मोसीकॉल की 9 लाख 87 हजार 12 स्क्वेअर फीट जमीन है. जहां पर किसी समय मोसीकॉल का कारखाना हुआ करता था. जो काफी समय पहले बंद हो चुका है. साथ ही मोसीकॉल ने इस जमीन की प्रयोग वर्गवारी में बदलाव करने के संदर्भ में अमरावती महानगर पालिका से वर्ष 2013 में पत्र व्यवहार किया था. जिसके बाद 19 दिसंबर 2013 को अमरावती मनपा ने मोसीकॉल के नाम जारी पत्र में इस जमीन का औद्योगिक की बजाए निवासी अथवा व्यवसायिक प्रयोजन के लिए प्रयोग करने की अनुमति देना संभव रहने की बात कही थी और ऐसी अनुमति हासिल करने के साथ ही इस जमीन का विकास करने हेतु आवश्यक शुल्क मनपा में भरने की बात कही थी. जिसके चलते मोसीकॉल ने इस जमीन की निवासी व वाणिज्यिक प्रयोग हेतु नीलामी करने का निर्णय लिया. जिसे आधार बनाते हुए मोसीकॉल द्वारा विगत 28 नवंबर को निविदा सूचना प्रकाशित की थी.
* पहले भी दो से तीन बार हो चुका था जमीन नीलामी का प्रयास
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, इस जमीन को निलाम करने का इससे पहले भी दो से तीन बार प्रयास हो चुका है. जिसके तहत वर्ष 2016 में इस जमीन की नीलामी प्रक्रिया शुरु की गई थी और 7 जनवरी 2016 को हुई नीलामी प्रक्रिया में 7 कंपनियों द्वारा हिस्सा लिया गया था. साथ ही उस समय इस जमीन की अपसेट प्राईज 35 करोड 51 लाख रुपए तय की गई थी. परंतु किसी कारणवश उस वक्त इस जमीन की नीलामी नहीं हो पाई थी. इसके उपरांत वर्ष 2019 में 19 अक्तूबर को निविदा सूचना प्रकाशित की गई थी और नवंबर माह के दूसरे सप्ताह में इस जमीन की नीलामी होनी थी. परंतु उस समय आश्चर्यजनक तरीके से इस निविदा प्रक्रिया में किसी भी इच्छुक ने हिस्सा ही नहीं लिया. जिसके चलते यह प्रक्रिया जस की तस धरी रह गई. वहीं वर्ष 2019 में मोसीकॉल की जमीन की नीलामी हेतु प्रकाशित निविदा सूचना में निविदा प्रपत्र का मूल्य 29 हजार 500 रुपए तथा अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (इएमडी) की रकम 30 हजार रुपए तय की गई थी. हालांकि इसके बावजूद उस समय उस निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए कोई इच्छुक आगे नहीं आया था. जबकि जनवरी 2026 में मोसीकॉल द्वारा अपनी जमीन की नीलामी हेतु जारी निविदा सूचना में निविदा प्रपत्र यानि बिड डॉक्युमेंट का मूल्य 5 लाख रुपए रखा गया. जो ‘नॉन रिफंडेबल’ भी था. साथ ही निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेनेवाले इच्छुकों के लिए अपने दस्तावेजों के साथ 8 करोड रुपए की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट जमा करने एवं निविदा हासिल करनेवाले व्यक्ति अथवा समूह को 10 करोड रुपए का बिड सिक्युरिटी डिपॉजिट जमा करने की शर्त रखी गई थी. इसके अलावा सबसे खास बात यह भी थी कि, मोसीकॉल द्वारा जारी निविदा सूचना में स्पष्ट कहा गया था कि, इस निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेने के इच्छुक व्यक्ति अथवा समूह को अपने विगत तीन वर्षों के आर्थिक लेन-देन का ब्यौरा भी प्रस्तुत करना होगा और विगत तीन वर्षों के दौरान संबंधित व्यक्ति अथवा समूह का आर्थिक लेन-देन कम से कम 150 करोड रुपए होना ही चाहिए, तभी उन्हें इस निविदा प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी. जिसका सीधा मतलब था कि, नीलामी के इस खेल को बडे-बडे ठेकेदारों व बिल्डरों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही तय किया गया था. जिसके पीछे बडे पैमाने पर करप्शन होने की संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता था. परंतु अब यह पूरा का पूरा खेल धरा का धरा रह गया.
* जमीन पर स्थित धार्मिक स्थलों की वजह से अधर में लटकी थी नीलामी
इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखने के साथ ही हर छोटी-बडी गतिविधि की पडताल के दौरान दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने यह तथ्य भी उजागर किया था कि, मोसीकॉल द्वारा विलास नगर परिसर स्थित जमीन को लेकर जारी टेंडर नोटिस में ‘एज इज, व्हेयर इज, व्हॉट इज’ जैसी तकनीकी शर्तों का उल्लेख किया गया है. ऐसे में चूंकि नीलामी वाली जगह पर मंदिर व दरगाह भी स्थित है. साथ ही वन विभाग की अनुमति और भूमि पर संभावित अतिक्रमण जैसे मामले भी प्रलंबित है. जिसके चलते यह पूरा मामला काफी संवेदनशील भी हो सकता है. संभवत: इस वजह से भी इस जमीन की नीलामी प्रक्रिया अधर में लटक सकती है और आखिरकार यह अंदेशा भी सही साबित हुआ. क्योंकि अब इस जमीन की नीलामी प्रक्रिया रद्द हो जाने का निर्णय खुद राज्य सरकार द्वारा घोषित किया गया. इसे दैनिक ‘अमरावती मंडल’ द्वारा जनहित में शुरु की गई लडाई की जीत कहा जा सकता है.
* 6 दिसंबर को ‘मंडल’ ने सबसे पहले छापी थी खबर
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, 28 नवंबर को मोसीकॉल कारखाने की नीलामी हेतु जारी की गई निविदा सूचना के बारे में सबसे पहले ‘अमरावती मंडल’ ने ही 6 दिसंबर को पूरी प्रमुखता के साथ समाचार प्रकाशित किया था. जिसमें बताया गया था कि, अमरावती शहर के बीचोबीच विलास नगर व मसानगंज परिसर के निकट विएमवि रोड पर स्थित मोसीकॉल कारखाने की 9 लाख 87 हजार 12 स्क्वेअर फीट यानि 91,693.41 स्क्वेअर मीटर जमीन को बेचने का प्रयास विगत दो दशकों से चला आ रहा है. जिसके लिए अब तक 4 बार निविदा सूचना प्रकाशित करते हुए जमीन को नीलाम करने का प्रयास किया गया है. इसी के तहत वर्ष 2025 में 28 नवंबर को भी निविदा सूचना प्रकाशित करते हुए यह संपत्ति खरीदने हेतु इच्छुक रहनेवाले व्यक्तियों अथवा कंपनियों के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे. जिसके तहत 29 दिसंबर को निविदा प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अंतिम दिन तय करते हुए इससे पहले 12 दिसंबर को मोसीकॉल के मुंबई स्थित कार्यालय में इच्छुकों को नीलामी हेतु प्रस्तावित जमीन की जानकारी देने हेतु प्री-बिड बैठक का आयोजन भी किया गया था और इसके बाद 30 दिसंबर को तकनीकी बिड खोलते हुए पात्र रहनेवाली कंपनियों के प्रस्तावों का समावेश कर 31 दिसंबर को फाइनेंशियल बिड खोलने की बात तय की गई थी.

* 9 दिसंबर को पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने उठाया था मुद्दा
यहां यह भी याद दिलाया जा सकता है कि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व जिले के पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने 6 दिसंबर को दैनिक ‘अमरावती मंडल’ में मोसीकॉल कारखाने से संबंधित खबर प्रकाशित होते ही इसे बेहद गंभीरता से लिया था और उस 25 एकड जमीन में से 10 एकड जमीन को सार्वजनिक उपयोग हेतु आरक्षित रखने एवं वहां पर साप्ताहिक हाट बाजार स्थापित करने की मांग भी की थी. जिसके बाद से ही मोसीकॉल कारखाने की जमीन की नीलामी प्रक्रिया के विरुद्ध अमरावती शहर में एक तरह से जन-जागरुकता आनी शुरु हुई थी, अन्यथा उस जमीन का निजी हाथों में चले जाना लगभग तय था.

* 10 दिसंबर को सांसद बोंडे सहित सभी जनप्रतिनिधि हुए थे मुखर
दैनिक ‘अमरावती मंडल’ द्वारा मोसीकॉल की जमीन को लेकर लगातार मुखर होकर प्रकाशित किए गए समाचारों का एक असर यह भी हुआ कि, 10 दिसंबर को भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे तथा विधायक संजय खोडके व रवि राणा सहित अन्य कई जनप्रतिनिधियों एवं व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भी इस नीलामी प्रक्रिया के खिलाफ मुखर होकर अपनी आवाज उठाई थी. जिसके तहत जहां सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने सरकार से उक्त जमीन को अधिग्रहित कर एक बार फिर अपने कब्जे में लेने की मांग की थी. वहीं अन्य सभी जनप्रतिनिधियों एवं व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने उस जमीन पर सार्वजनिक बाजार व व्यापारिक संकुल बनाने का सुझाव सरकार को दिया था.

* प्री-बिड बैठक में नीलामी प्रक्रिया को लेकर उठे थे सवाल
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, मोसीकॉल ने नीलामी प्रक्रिया हेतु तय कार्यक्रम के तहत विगत 12 दिसंबर को मोसीकॉल के मुंबई स्थित कार्यालय में प्री-बिड बैठक बुलाई थी. जिसमें इस जमीन की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के इच्छुक रहनेवाले 10 बोलीकर्ताओं एवं उनके प्रतिनिधियों द्वारा हिस्सा लिया गया. जिन्होंने मोसीकॉल की ओर से चलाई गई पूरी निविदा प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान उपस्थित किए थे. मुंबई में हुई उस बैठक से संबंधित समाचार भी दैनिक ‘अमरावती मंडल’ द्वारा उसी दिन यानि 12 दिसंबर की शाम में प्रकाशित अपने अंक में प्रमुखता के साथ छापा गया था.

* 19 जनवरी को नीलामी की प्रक्रिया आगे टली थी
12 दिसंबर को मुंबई में हुई प्री-बिड बैठक के बाद 19 जनवरी अकस्मात ही अमरावती स्थित मोसीकॉल कारखाने की जमीन की नीलामी प्रक्रिया को आगे टाल दिया गया था और जानकारी दी गई थी कि, टेक्नीकल बिड की प्रोसेस ही अपलोड नहीं होने की वजह को आगे करते हुए ऑफर लेटर की प्रक्रिया को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है. प्री-बिड बैठक के उपरांत मोसीकॉल प्रबंधन एवं नीलामी प्रक्रिया हेतु नियुक्त नोडल एजेंसी द्वारा इच्छुक कंपनियों की ओर से मिले निविदा प्रस्तावों में से तकनीकी पक्ष वाला लिफाफा यानि टेक्नीकल बिड को खोला गया था. जिसके बाद तय मानकों व शर्तों के आधार पर 6 कंपनियों को फाइनेंशियल बिड व ऑफर लेटर वाली प्रक्रिया के लिए पात्र माना गया था तथा सोमवार 19 जनवरी को यह प्रक्रिया पूरी होकर ऑफर लेटर दिया जाना प्रस्तावित था.

* कांग्रेस के मनपा गटनेता इंगोले व पार्षद बबलू शेखावत ने भी किया था विरोध
विगत जनवरी माह में हुए मनपा चुनाव के बाद पार्षद निर्वाचित हुए कांग्रेस के मनपा गटनेता विलास इंगोले एवं पार्षद बबलू शेखावत ने भी अपने निर्वाचन के तुरंत बाद जिम्मेदारी जनप्रतिनिधि होने का परिचय देते हुए शहर के बीचों-बीच स्थित मोसीकॉल कारखाने की 25 एकड जमीन को निजी हाथों में सौंपे जाने का पूरजोर तरीके से विरोध किया था और इस जमीन को सार्वजनिक कामों व हितों हेतु प्रयोग में लाए जाने की मांग उठाई थी, ऐसे तमाम प्रयासों की बदौलत आज मोसीकॉल कारखाने की जमीन की नीलामी प्रक्रिया आखिरकार रद्द हो गई है.






