संक्रांत और पतंगों का रिश्ता गहरा
पतंगे खरीदने मची होड, चरखी, मांजा से सजी दुकानें

* तिल के पदार्थ भी बन रहे घर-घर
अमरावती /दि.8 – सूर्य के उत्तरायण में आने के पर्व को संक्रांति के रुप में मनाने की प्रथा सहित अनेक दशकों से इस उत्सव पर पतंग उडाने का नाता भी गहरा जुडा माना जाता है, इसलिए अमरावती के पुराने शहर और अन्य भागों में पतंगों की दुकाने न केवल सजी है, बल्कि वहां ग्राहकी भी होती देखी जा रही है. चरखी, मांजा और रंग-बिरंगी अलग-अलग आकार की पतंगे सजी है. उधर घर-घर तिल और गुड के मिठास भरे व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं. दुकानों पर भी तिल लड्डू, तिल पापडी, गजक, फल्ली दाना पट्टी की विक्री बडे प्रमाण में होती दिखाई दे रही है.
* बढी कीमतें, उत्साह कम नहीं
संक्रांति को मात्र सप्ताह का समय शेष है. अभी से अमरावती के आसमान में पतंगे उडती दिखाई दे रही है. चरखी और मांजा तथा पतंगों की दरों में बढोत्तरी के बावजूद बच्चों और जवानों में पतंगबाजी को लेकर उत्साह भी बढता दिखाई दे रहा है. शहर के प्रसिद्ध पतंगबाज जावेद अहमद साबनपुरा ने बताया कि, विविध आकार की रंग-बिरंगी पतंगे खरीदी और उडाई जा रही है. डोरेमॉन, एंग्रीबर्ड, छोटा भीम, सुपरमैन आदि के चित्रों वाली पतंगे बच्चे खास तौर से पसंद कर रहे हैं. जावेद अहमद के अनुसार अमरावती जिले में उनके यहां से होलसेल रेट में भी पतंगे भेजी जाती हैं. उन्होंने नायलॉन मांजा कतई न रखने की जानकारी देते हुए बताया कि, साधे रील का बनाया गया मांजा ही बडी मात्रा में खरीदा जा रहा है. इस मांजे से पशु-पक्षियों को कोई इजा नहीं होती.
* बच्चों में कार्टून की पतंग पसंद
एक फुटकर विक्रेता अमीत तिरपुडे ने बताया कि, बच्चे ही अपने अभिभावकों के साथ दुकानों पर पतंग खरीदने आते हैं. उनकी पसंद बेशक कार्टून वाली पतंग होती है. छोटी-बडी सभी साइज की पतंगे उपलब्ध है. 10 रुपए से लेकर 70 रुपए तक पतंग ताव के साइज के आधार पर मिलती है. मांजा भी 100 रुपए से लेकर 200 रुपए रील में उपलब्ध है.
* तिल के व्यंजन भरपूर
उपाध्याय घेवर फिनी वर्क्स के संचालक रामेश्वर उपाध्याय ने बताया कि, संक्राति आते ही तिल के व्यंजनों की डिमांड बढ जाती है. अत: उनके यहां तिल के लड्डू, तिल पट्टी, गजक और अन्य आइटम उपलब्ध है. उसी प्रकार काफी मात्रा में लोग खरीद रहे हैं. घेवर और फिनी भी इस त्यौहार पर राजस्थानी समाज में खरीदने और एक-दूसरे को उपहार देने के लिए ली जाती है. उसमें भी अनेक फ्लेवर के घेवर आदि उपलब्ध है. तिल के ढेर सारे आइटम होने से सभी थोडी-थोडी मात्रा में खरीदी करने पर अमरावती के शौकिनों का जोर है.





