नियोजन विभाग की लापरवाही से जिले का विकास प्रभावित – विधायक संजय खोडके
पालकमंत्री ने तत्कालीन डीपीओ अभिजीत म्हस्के की विभागीय जांच के आदेश दिए

* जिला नियोजन बैठक में डीपीओ कार्यालय के कामकाज पर तीव्र रोष
अमरावती/ दि. 26 – जिले के वार्षिक विकास नियोजन को प्रभावी रूप से लागू करने की जिम्मेदारी जिला नियोजन विभाग की है, लेकिन लगातार लापरवाही और अनावश्यक देरी के कारण जिले का विकास नियोजन बिगड़ गया है. स्वीकृत वार्षिक योजना के अनुसार जनप्रतिनिधियों द्वारा सुझाए गए कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी मिलने में विलंब हो रहा है, जिससे अपेक्षित खर्च भी नहीं हो पा रहा, ऐसा आरोप विधायक संजय खोडके ने लगाया.
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में शनिवार को अमरावती जिला वार्षिक सर्वसाधारण नियोजन 2026-27 की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक की शुरुआत में जिला नियोजन अधिकारी वर्षा भाकरे ने पिछली बैठक का इतिवृत्त प्रस्तुत किया. इसी दौरान पालकमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से अपने सुझाव और आपत्तियां रखने को कहा. इस अवसर पर विधायक संजय खोडके ने जिला नियोजन विभाग की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि जिला नियोजन की बैठकों में जनप्रतिनिधि बार-बार मुद्दे उठाते हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती. न समय पर निधि जारी की जाती है और न ही पालकमंत्री अथवा जिलाधिकारी स्तर पर उचित पाठपुरावा किया जाता है, जिसके कारण कई विकास कार्य लंबित पड़े हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन जिला नियोजन अधिकारी अभिजीत म्हस्के ने अपने कार्यकाल में अमरावती मनपा क्षेत्र में नागरी सेवाओं एवं सुविधाओं के लिए स्वीकृत 50 करोड़ रुपये की राशि पांच से छह महीने तक रोके रखी. जिला नियोजन निधि को बैंक में जमा रखकर विकास कार्यों के भुगतान में जानबूझकर देरी की गई. यदि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवालों का अनुपालन नहीं होगा, तो जिला नियोजन समीक्षा बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा, ऐसा कहते हुए विधायक खोडके ने रोष व्यक्त किया. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने तत्कालीन डीपीओ अभिजीत म्हस्के के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए. साथ ही उनसे संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल का ऑडिट करने के निर्देश भी दिए गए. इसके अलावा, जिला नियोजन बैठकों में विधायकों द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों पर त्वरित कार्रवाई कर, संबंधित विभाग प्रमुख की हस्ताक्षरयुक्त रिपोर्ट जनप्रतिनिधियों को अवलोकन के लिए प्रस्तुत करने के आदेश पालकमंत्री ने दिए.





