सिंहासन पर विराजमान ‘दैवत’
छत्रपति संभाजीनगर के इस मंदिर में गूंजती है शिवाजी महाराज की विशेष आरती

छत्रपति संभाजीनगर/दि.19 – महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज को ‘जाणता राजा’ मानकर पूजा जाता है, लेकिन शहर के मध्य भाग में एक ऐसा मंदिर है, जहां शिवाजी महाराज केवल प्रतिमा नहीं, बल्कि देवता के रूप में विराजमान हैं. यह अनोखा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है.
बता दें कि, छत्रपति संभाजी नगर शहर के निराला बाजार स्थित न्यू समर्थनगर इलाके में, मोतीवाला कॉम्प्लेक्स के पीछे यह मंदिर बना हुआ है. इसे जीवन कला मंडल और शिवराम प्रतिष्ठान ने निर्मित किया है. इस मंदिर की परिकल्पना डॉ. विष्णु महाराज पारनेरकर की शिवभक्ति से साकार हुई. पहले नासिक जिले में और बाद में छत्रपति संभाजीनगर में मंदिर स्थापित किया गया. मंदिर का मुख्य आकर्षण सिंहासन पर पद्मासन मुद्रा में विराजमान शिवाजी महाराज की पंचधातु प्रतिमा है. वर्ष 2001 में विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी. प्रतिमा स्थानीय मूर्तिकार सुनील देवरे ने बनाई है. मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यहां होने वाली विशेष आरती है, जिसे स्वयं विष्णु महाराज पारनेरकर ने रचा है. आरती के दौरान पूरा परिसर शिवभक्ति और गौरव के भाव से गूंज उठता है.
* ऐतिहासिक संदर्भ भी मौजूद
इतिहासकारों के अनुसार छत्रपति संभाजी महाराज ने सिंधुदुर्ग किले पर शिवाजी महाराज का पहला मंदिर बनवाया था. दक्षिण दिग्विजय अभियान के दौरान श्रीशैलम में भी ऐसे संदर्भ मिलते हैं, जिससे शिवाजी महाराज की देवतुल्य पूजा की परंपरा का ऐतिहासिक आधार जुड़ता है. आज देश के कई हिस्सों में शिवाजी महाराज के मंदिर देखने को मिलते हैं. स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि शिवाजी महाराज के विचार, स्वाभिमान और संस्कारों को जीवंत रखने वाला प्रेरणाकेंद्र माना जाता है.





