खाडी युद्ध के कारण सरकारी प्रतिबंधों का असर

20 प्रतिशत बढा होटल्स का खर्च

* निजी कंपनियों से उंचे दाम पर कमर्शियल सिलेंडर की खरीदी
* डीजल और लकडी भट्टी तथा इंडक्शन का भी अपनाना पडा पर्याय
अमरावती/दि.21 – पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से सामान्य होटल संचालकों सहित कैटरर्स को व्यावसायिक सिलेंडर दाम बढाने के बावजूद देने से पाबंदी के कारण शहर में होटल-रेस्तरा चलाना मुश्किल हो गया है. अधिक दाम देखकर निजी कंपनियों और ब्लैक मार्केट से सिलेंडर खरीदना पड रहा है. जिससे 20-25 प्रतिशत खर्च बढ जाने की जानकारी संचालक गण दे रहे हैं. उनका यह भी कहना है कि, पखवाडा बीत गया. अब ऐसी ही स्थिति जारी रही तो होटल्स चलाना असंभव हो जाएगा. प्रतिष्ठान बंद करना ही पडेगा.
* पर्यायी इंधन को अपनाया
शहर में 2000 के करीब होटल, भोजनालय, उपहारगृह अर्थात नाश्ते के स्टॉल है. अनेक स्टॉल अपने-अपने एरिया में बडे प्रसिद्ध भी है. उन सभी को अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए पर्यायी इंधन का आसरा लेना पडा है. जिसमें इंडक्शन और डीजल भट्टीयों का समावेश है. फलस्वरुप खर्च बढ गया है. उसी प्रकार कुछ संचालकों ने बताया कि, अधिक दाम देकर सिलेंडर्स ब्लैक में खरीदे जा रहे हैं. इसके पीछे नियमित ग्राहकों को सेवा देना बताया गया.
* बढाये कटींग चाय के रेट
कमर्शियल सिलेंडर अधिक दाम पर खरीदे जाने के कारण कुछ स्टॉल्स और रेस्तरां ने अपने कटींग चाय से लेकर नाश्ते तक रेट बढा दिये हैं. कटींग चाय 6 रुपए से बढकर सीधे 10 रुपए कर दी गई है. इन स्टॉल संचालकों का कहना है कि, उन्हें एलपीजी सिलेंडर 900 की बजाय 1500-1600 रुपए देकर खरीदना पड रहा है. इसलिए रेट बढाने के अलावा चारा नहीं है. ऐसे ही एक नाश्ता सेंटर के संचालक ने बताया कि, रोज 1500 समोसे की खपत थी, अब इंधन की किल्लत के कारण वे 500 नग ही तैयार करते और बेच पाते हैं. धंधे पर सीधा असर होने की बात होटल संचालक कबूल कर रहे हैं. इस दिक्कत को दूर करने के लिए शासन-प्रशासन से उनकी एसोसिएशन के माध्यम से विनती की जा रही है. अनेक होटल्स ने रेट नहीं बढाये हैं. ऐसे में दूसरे रेस्तरां संचालकों का कहना है कि, अधिक दिनों तक नहीं चल पाएगा. रेट बढाना लाजमी है.
* मेनू किया कम, पनीर के लाले पडे
दूध से पनीर बनाने के लिए इंधन की आवश्यकता पडती है. ऐसे में पनीर अत्यल्प मात्रा में बनाया जा रहा है. शहर के एक प्रसिद्ध दूध डेयरी संचालक ने माना कि, पनीर बनाने के लिए सिलेंडर नहीं मिल रहा. इसलिए उन्होंने फिलहाल पनीर बनाने का काम रोक रखा है. उनका कहना है कि, डीजल भट्टी का भी पर्याय सोच रहे हैं. पनीर के साथ ही दही और श्रीखंड बनाने के लिए दूध को गर्म करने हेतु इंधन आवश्यक है. वह नहीं मिल पा रहा. जिससे होटल्स को भी पनीर सहित अनेक आइटम अपने मेनू से कम करने पडे हैं. उन्होंने बताया कि, कई अवसरों पर ग्राहक सहकार्य करते हैं. कई बार मनपसंद व्यंजन नहीं मिल पाने पर उठकर चले जाते हैं.

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