तिवसा में घटित हत्याकांड की गुत्थी सुलझी

दो आरोपी धरे गए, वारदात में प्रयुक्त वाहन भी जब्त

* ग्रामीण एलसीबी ने गुजरात जाकर पकडा दोनों आरोपियों को
अमरावती /दि.24 विगत 20 फरवरी को तिवसा पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत आईआरबी स्टॉफ के पास राष्ट्रीय महामार्ग क्र. 53 के बगल में स्थित ट्रक ले बाई पार्किंग स्थल पर 20 से 25 वर्ष की आयु वाले युवक का रक्तरंजित शव बरामद हुआ था. जिसके पास से मिले दस्तावेजों के आधार पर मृतक की पहचान विमल सतीश आग्रावत (22, आरएमसी क्वॉर्टर, ब्लॉक नं. 2, गांधी ग्राम, नानावटी चौक, स्टर्लिंग हॉस्पिटल के पास, राजकोट, गुजरात) के तौर पर हुई थी. पश्चात इस मामले की तेजी के साथ जांच करते हुए ग्रामीण पुलिस की क्राईम ब्रांच के दल ने तीन दिन में वारदात का पर्दाफाश किया और गुजरात के राजकोट शहर से दो आरोपियों को अपनी हिरासत में लिया. जिनके नाम माहीर माजीद सोलंकी (22, हुसैनी चौक, राजकोट) तथा राज वहीद चौहान (22, नानावटी चौक, राजकोट) बताए गए है. इन दोनों आरोपियों के पास से वारदात में प्रयुक्त बलेनो वाहन क्रमांक जीजे-03/पीडी-0911 को भी बरामद किया गया. पता चला है कि, यह वारदात पुरानी दुश्मनी के चलते अंजाम दी गई थी.
बता दें कि, विगत 20 फरवरी को भारवाडी परिसर में रहनेवाले चौकीदार जानराव ठाकरे (60) ने तिवसा पुलिस को जानकारी देते हुए बताया था कि, रात के समय दो युवक रेसर बाईक से घटनास्थल पर पहुंचे थे और वहीं पर सो गए थे. लेकिन इसके बाद सुबह के वक्त इसमें से एक मृतावस्था में मिला. जबकि दूसरा फरार था. घटनास्थल पर खून से सना हुआ चाकू पुलिस को बरामद हुआ था. घटना की गंभीरता को भांपते हुए जिला पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद के मार्गदर्शन में ग्रामीण अपराध शाखा के 3 और तिवसा का एक ऐसे चार दल आरोपी के तलाश में रवाना किए गए थे. मृतक की बैग में बरामद हुए आधार कार्ड से उसकी शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी का पता लगाया और फिर दोनों आरोपियों को गुजरात के राजकोट शहर से खोज निकाला.
जानकारी के मुताबिक इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद माहीर नामक मुख्य आरोपी सीधे गुजरात भाग गया था. इस अपराध में इस्तेमाल कार भी पुलिस ने ट्रेस की है. दोनों आरोपियों को अपनी हिरासत में लेने के बाद ग्रामीण एलसीबी का दल उन्हें अपने साथ लेकर अमरावती पहुंचा. जिसके उपरांत जानकारी देते हुए बताया गया कि, दिसंबर 2025 में विमल आग्रावत की नाबालिग बहन को राज चौहान के सुजल नामक रिश्तेदार ने भगा लिया था और इस काम में सुजल को राज चौहान व माहीर सोलंकी ने भी मदद की थी. जिसकी वजह से उनके बीच दुश्मनी पैदा हो गई थी. उस घटना को लेकर पोक्सो की धाराओं के तहत दर्ज मामले में समझौता करने हेतु विमल अक्सर ही माहीर व राज से पैसों की मांग किया करता था और पैसे नहीं मिलने पर दोनों के साथ गाली-गलौज भी किया करता था. साथ ही विमल ने 14 फरवरी को राज चौहान के घर के सामने खडे उसके चार पहिया वाहन को भी जला दिया था. ऐसे में राज और माहीर ने विमल को रास्ते से हटा देने की योजना बनाई और फिर पोक्सो मामले में समझौता करने के बहाने से वे दोनों उसे अपनी कार में बिठाकर अमरावती जिले के तिवसा शहर तक ले आए. जहां पर उसे चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया गया.
यह कार्रवाई ग्रामीण पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद, अपर पुलिस अधीक्षक पंकज कुमावत व एसडीपीओ संतोष खांडेकर के मार्गदर्शन तथा ग्रामीण अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक किरण वानखडे व तिवसा पुलिस स्टेशन के थानेदार गोपाल उपाध्याय के नेतृत्व में एपीआई अमोल मुडे, पीएसआई सागर हटवार व मुलचंद भांबूरकर, पुलिस कर्मी बलवंत दाभणे, रवींद्र बावणे, भूषण पेठे, पंकज फाटे, गजेंद्र ठाकरे, युवराज मानमोठे, रवि वर्‍हाडे, अमोल देशमुख, सुधीर बावने, मंगेश लकडे, विनेश कनोजिया, सचिन मसांगे, सागर नाठे, श्याम सोनोने, चालक पोकां हर्षद भुसे सहित तिवसा एवं साईबर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा की थी.

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