जफर और डॉ. देशमुख की राजनीतिक अदावत फिर बाहर निकली

पूर्व उपमहापौर शेख जफर का ‘दुश्मन’ वाला बयान चर्चा में

* पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने खुद को बताया अपराधियों का दुश्मन
अमरावती/दि.7 – इस समय जैसे-जैसे मनपा चुनाव को लेकर प्रचार का दौर आगे बढ रहा है और चुनावी सरगर्मीया तेज हो रही है, वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप वाला दौर शुरु होने के साथ ही राजनीतिक दलों के नेताओं एवं चुनाव लड रहे प्रत्याशियों के बीच जुबानी जंग शुरु होने के साथ ही उनकी पुरानी अदावते भी सामने आने लगी है. इसी श्रृंखला के तहत इस समय कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख तथा प्रभाग क्र. 15 छाया नगर-गवलीपुरा की ड-सीट से चुनावी मैदान में रहनेवाले राकांपा प्रत्याशी व पूर्व उपमहापौर शेख जफर शेख जब्बार के बीच जुबानी जंग शुरु हो गई है. साथ ही साथ दोनों की राजनीतिक अदावत भी उभरकर जनता के सामने आ गई है.
बता दें कि, गत रोज प्रभाग क्र. 15 छाया नगर-गवलीपुरा में आयोजित प्रचार सभा के दौरान राकांपा प्रत्याशी व पूर्व उपमहापौर शेख जफर ने कांग्रेस पार्टी सहित पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख को अल्पसंख्यकों, विशेष तौर पर मुस्लिम समुदाय का सबसे बडा राजनीतिक दुश्मन बताया था. साथ ही दावा किया था कि, इस बार उनके प्रभाग से कांग्रेस के एक भी प्रत्याशी को चुनाव में जीतने नहीं दिया जाएगा. इसके अलावा राकांपा प्रत्याशी शेख जफर ने क्षेत्र के मतदाताओं को लगभग उकसाते हुए आवाहन किया था कि, मुस्लिम बहुल प्रभागों के मतदाताओं ने किसी भी हाल में कांग्रेस प्रत्याशियों को वोट नहीं देना चाहिए. पूर्व उपमहापौर शेख जफर द्वारा दिए गए इस बयान के चलते शहर की राजनीति में काफी हद तक सनसनी मच गई थी.
वहीं दूसरी ओर पूर्व उपमहापौर शेख जफर द्वारा दिए गए बयान पर पलटवार करने के साथ ही अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता व पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि, उन्होंने कभी भी जाति व धर्म देखकर किसी के साथ कभी भी कोई भेदभाव वाली राजनीति नहीं की. साथ ही वे हमेशा ही अमरावती शहर को हर लिहाज से साफ-सुथरा रखने के पक्षधर रहे. इसके अलावा पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि, वे अमरावती शहर के सट्टा, मटका, गुटखा तस्करों, एमडी तस्करों, चोरों, जेबकतरों, उचक्कों के सबसे बड़े दुश्मन है, फिर चाहे ऐसे लोग किसी भी जाति या धर्म के हों, इसी प्रकार इन जैसी प्रवृत्तियों को अपना राजनीतिक संरक्षण देकर उनका संरक्षण करने वाले, उनकी दहशत के बल पर अपना राजनीति करना चाहने वाले नेताओं की प्रवृत्ति के भी वे उतने ही बड़े दुश्मन है. सुसंस्कृत अमरावती शहर की शांति, कानून-व्यवस्था को अबाधित रखने के लिए तथा नागरिकों को शहर में निर्भय वातावरण में अपना जीवन जीने के मूलभूत अधिकार के लिए उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ऐसी प्रवृत्तियों से कभी समझौता नहीं किया, इसका उन्हें उत्कट संतोष भी है.

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