किसान आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा
जिले में साल भर में 200 से अधिक किसानों ने की आत्महत्या

अमरावती/ दि. 31 – किसानों के प्रति शासन व प्रशासन गंभीर नहीं रहने की वजह से जिले में किसान आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा हैं. जिले में साल भर में 200 से अधिक किसानों ने गले में फांसी लगाकर आत्महत्या की है. आत्महत्याओं पर निय्रंत्रण के लिए शेतकरी ्रस्वावलंबी मिशन भी कामयाब नहीं हुआ है. जिसकी वजह से सभी किसान आसमानी व सुलतानी संकट की बलि चढ रहे हैं.
जिले में इस साल 11 महीनों में 181 किसानोंं ने प्राकृतिक आपदा, बैंक व साहूकारों के कर्ज के तकादे व बेटियों के विवाह , बीमारियों से त्रस्त होकर आत्महत्या की है. पिछले ढाई दशकों से किसान आत्महत्याओं का सिलसिला जारी ही है. कम होना तो दूर दिन ब दिन बढता ही जा रहा है. साल 2001 से आत्महत्याएं शासनस्तर पर दर्ज की गई है. उसके अनुसार अमरावती जिले में 5, 557 किसानों ने गले में फांसी लगाकर आत्महत्या की है. किसान आत्महत्यों को रोकने के लिए शासन ने स्व. वसंतराव नाइक शेतकरी स्वावलंबन मिशन की स्थापना की थी. लेकिन मिशन द्बारा किसी भी प्रकार की ठोस उपाय योजना न चलाये जाने की वजह से किसान आत्महत्या जारी ही है.
2001 से किसान आत्महत्या
– किसान आत्महत्या 5,557
– शासन की मदद के पात्र 2,918
– शासन की मदद से अपात्र 2547
– जांच के लिए प्रलंबित 92
* दो दशकों से शासन मदद में वृध्दि नहीं
किसान आत्महत्याग्रस्त परिवारों को 19 दिसंबर 2005 के आदेशानुसार सिर्फ 1 लाख रूपए की मदद शासन द्बारा दी जाती र्है. जिसमें 30 हजार रूपए का धनाकर्ष व 70 हजार रूपए की एफडी तहसीलदार तथा वारीस के संयुक्त नाम से रखी जाती है. सरकार द्बारा दी जानेवाली मदद में पिछले 20 सालों से वृध्दि नहीं की गई. सातबारा पर कर्ज कायम स्वरूपी दर्ज होने की वजह से किसानों को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिल पा रहा.
2025 में किसान आत्महत्या
इस साल 11 महीनों में जिले के 181 किसानों ने आत्महत्या की है जिसमें जनवरी में 11, फरवरी में 10, मार्च में 16, अप्रैल में 16, मई में 25, जून में 20, जुलाई में 16, अगस्त में 21, सितंबर में 27, अक्तूबर में 17 व नवंबर महीने में 12 किसान आत्महत्या दर्ज की गई है. जिसमें 49 प्रकरण पात्र तथा 40 प्रकरण अपात्र करार दिए गये व 92 जांच के लिए प्रलंबित है.





