संकुलों के किराए के मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
जनता से संपत्ति कर वसूली का दबाव लेकिन ...

* पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने प्रशासन से किया सवाल
अमरावती / दि.10 – वित्तीय वर्ष 2025- 26 समाप्ति की ओर है और इस समय अमरावती महानगरपालिका प्रशासन द्बारा नागरिकों से संपत्ति कर की वसूली के लिए लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. प्रशासन द्बारा नागरिकों से सख्ती से संपत्ति कर वसूलने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है. इसके साथ ही शहर में विभिन्न सरकारी संपत्तियों पर बकाया संपत्ति कर की वसूली कैसे की जाए, इस पर भी योजना बनाई जा रही है, ऐसी खबरें लगातार समाचार पत्रों में सामने आ रही है.
पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि दरअसल प्रशाासन काल में महानगरपालिका प्रशासन ने अमरावती के आम नागरिकों के संपत्ति कर में भारी बढोत्तरी की थी. कई जगह कर की राशि दोगुनी, तिगुनी और कहीं- कहीं चौगुनी कर दी गई, जिससे नागरिकों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पडा. उस समय भी जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर सुविधाजनक मौन साधे रखा. ऐसा अनुभव नागरिकों को हुआ. विधानसभा चुनाव के समय नागरिकों को संपत्ति कर में राहत देने के वादे किए गये थे. लेकिन बाद में उन वादों को पूरा नहीं किया गया. पूर्व पालकमंत्री सुनील देशमुख ने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्बारा बडे हुए संपत्ति कर के विरोध में बडे स्तर पर आंदोलन किए गये थे. इसके बाद महानगरपालिका प्रशासन को कुछ हद तक पीछे पडा था. फिर भी बढे हुए संपत्ति कर का बोझ आज भी नागरिकों के सिर पर बना हुआ है. इस बीच प्रशासन द्बारा संपत्ति कर की वसूली बढाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है और कर विभाग की टीमें बनाकर नागरिकों पर दबाव बनाया जा रहा है. लेकिन दूसरी ओर अमरावती महानगरपालिका के स्वामित्व वाले शहर के कई व्यावसायिक स्कूलों की लीज कई वर्षो पहले ही समाप्त हो चुकी है. महानगरपालिका की आय बढाने के उद्देश्य से इन संकुलों का किराया पुन: निर्धारित कर नए करार करने की प्रक्रिया पिछले 4-5 वर्षो से चल रही है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर किसके दबाव में महानगरपालिका इन संकुलों के किराए में बढोत्तरी का निर्णय नहीं ले रही है. प्रशासकीय शासन के दौरान इन मुद्दों का समाधान करना आसान था. लेकिन फिर भी निर्णय नहीं लिया गया. क्या जनप्रतिनिधियों का दबाव किराया नहीं बढाने के लिए था. इस बारे में प्रशासन को स्पष्टीकरण देना चाहिए . उन्होंने कहा कि एक और महानगरपालिका के खर्च और आय के बीच बडा अंतर दिखाई देता है, जबकि दूसरी ओर लीज समाप्त हो चुके मनपा संकूलों के नए करार नए किराए निर्धारित करके आय में बडी बढोत्तरी करना संभव है. इसके बावजूद नागरिकों से संपत्ति कर की सख्त वसूली कुछ प्रभावशाली लोगों के हितों की रक्षा के लिए व्यावसायिक संकूलों के किराए के मुद्दे पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी अमरावती के नागरिकों के हितों के खिलाफ है. अब भी समय है कि महानगरपालिका प्रशासन सभी मनपा संकुलों के नए करार कर किराया तय करने का त्वरित निर्णय ले और महानगरपालिका की आय बढाने के लिए ठोस कदम उठाए. अन्यथा यह संदेश जायेगा कि प्रशासन प्रभावशाली लोगों के हितों की रक्षा के लिए काम कर रहा है. यह स्पष्ट मत पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने व्यक्त किया है और महानगरपालिका प्रशासन से किसी भी दबाब में आए बिना शहर के हित में निर्णय लेने की अपील की है.
* मार्केट के दुकानदारों को ही क्यों बनाया जा रहा है निशाना ?
अमरावती शहर के महानगरपालिका के मार्केट में वर्षो से व्यवसाय कर रहे दुकानदार आज लीज नवीनीकरण की प्रतीक्षा कर रहे है. इन दुकानदारों ने अपने समय में मनपा को भारी प्रीमियम अदा किया था. जिसकी राशि कई मामलों में लगभग मालिकाना हक के बराबर आर्थिक मूल्य रखती थी. अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर इन व्यापारियों ने मार्केट को विकसित किया. रोजगार पैदा किया और महानगरपालिका को लगातार राजस्व भी दिया. महत्वपूर्ण बात यह है कि लीज और उसके नवीनीकरण से संबंधित नीति महाराष्ट्र राज्य शासन द्बारा पूरे राज्य के लिए बनाई गई है. केवल अमरावती के लिए नहीं. जब यह नीति पूरे महाराष्ट्र के लिए समान रूप से लागू है तो फिर सिर्फ अमरावती के दुकानदारों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है ? पिछले कुछ समय से कुछ समाचार पत्र मनपा अधिकारी और कुछ राजनेता इस विषय को इस तरह प्रस्तुत कर रहे हैं मानों दुकानदार कुछ विशेष लाभ मांग रहे हो. जबकि वास्तविकता यह है कि व्यापारी केवल महाराष्ट्र राज्य सरकार की घोषित नीति के अनुसार लीज नवीनीकरण चाहते है. ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता या निजी हित के कारण इस विषय को अनावश्यक रूप से विवादित बनाने का प्रयास कर रहे हैं ? अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या महानगरपालिका की आमसभा महाराष्ट्र राज्य शासन द्बारा पूरे राज्य के लिए बनाई गई उस नीति का पालन करेगी , जिसे राज्य में वर्तमान में शासन कर रहे भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के नेतृत्व वाली सरकार द्बारा लागू किया गया है और मनपा में भी इन्ही दलों का शासन है इस स्पष्ट सरकारी नीति के बावजूद इस विषय को अनावश्यक रूप से लंबित रखकर विवाद और असमंजस की स्थिति पैदा की जाएगी? अमरावती के मार्केट के दुकानदारों ने वर्षो से शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है. वे किसी विशेष रियासत की मांग नहीं कर रहे हैं, वे केवल महाराष्ट्र राज्य सरकार की नीति के अनुसार न्यायपूर्ण निर्णय चाहते हैं. इसलिए आवश्यक है कि इस विषय पर नियमों के अनुसार निर्णय लेकर शहर के व्यापारियों के साथ- साथ न्याय किया जाए. अगर व्यापारियों के साथ अन्याय हुआ तो भविष्य में मनपा के किसी व्यापारी संकुल में व्यापारी सहभागी नहीं होंगे. मनपा में गंभीरता से व्यापारियों के बारे में भी सोचना चाहिए.





