टीईटी संबंधी निर्णय पर शैक्षिक महासंघ की शिक्षा मंत्री से भेंट

शिक्षकोें के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग

अमरावती/दि.9 -अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसम) के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से संबंधित माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के संदर्भ में एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया. प्रतिनिधिमंडल ने नियुक्ति तिथि की परवाह किए बिना सभी सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की.
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख है कि कक्षा 1 ली से 8 वीं तक के शिक्षकों हेतु न्यूनतम योग्यताएँ अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होंगी तथा इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट रहेगी. महासंघ ने यह भी निवेदन किया कि उस समय प्रचलित वैध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं के अंतर्गत नियुक्त होकर वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा.
शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा मंत्री से यह अनुरोध किया कि वे इस विषय में हस्तक्षेप कर निर्णय को केवल भावी रूप से लागू किए जाने, अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की वरिष्ठता, गरिमा एवं वैध अपेक्षाओं की रक्षा किए जाने तथा शिक्षकों को संभावित सेवा-समाप्ति एवं पदोन्नति से वंचित किए जाने से बचाने हेतु आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक कदम उठाए जाने की दिशा में पहल करें. इस प्रतिनिधिमंडल में महासंघ के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महासचिव प्रो. गीता भट्ट, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, विद्यालय शिक्षा प्रभारी शिवानंद सिंदनकेरा, एनआईटी शिक्षक फोरम के संयोजक प्रो. महेंद्र श्रीमाली, तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष हनुमंत राव तथा महासंघ की तमिलनाडु इकाई देसीय अस्ररियार संगम के महासचिव कंदसामी सम्मिलित थे.

 

Back to top button