पंजीकृत विवाहों का चलन बढा

रोजाना 12 से अधिक जोडों का विवाह के लिए हो रहा पंजीयन

* जिले में अब तक 7,628 जोडों ने किया पंजीकृत विवाह
अमरावती /दि.26 समाज में पुरानी रुढियों और परंपराओं के अनुसार होने वाले खर्चिलें विवाहों को पीछे छोडकर अब सागदीपूर्ण पद्धति से विवाह कर नये जीवन की शुरुआत करने वाले जोडों की संख्या तेजी से बढ रही है. बदलते समय में समय की बचत और अनावश्यक खर्च से बचने के लिए यह विकल्प लोकप्रिय हो रहा है. वर्ष 2019 से 2026 के दौरान जिले में कुल 7 हजार 628 जोडों ने पंजीकृत विवाह किया है. विशेष बात यह है कि, रोजाना औसतन 12 जोडे जिला निबंधक कार्यालय में विवाह का पंजीकरण करा रहे है.
उल्लेखनीय है कि, पहले पंजीकृत विवाह को केवल आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों तक ही सीमित मानने की गलत धारणा थी. लेकिन अब उच्च शिक्षित और संपन्न परिवार भी कानूनी सुरक्षा और अनावश्यक खर्च से बचने के लिए इस प्रद्धति को प्राथमिकता दे रहे है. विवाह समारोह पर होने वाले अत्याधिक खर्च के कारण कई बार वर-वधु के पिता को कर्जदार होना पडता है. घर बनाकर देखो और विवाह करके देखो, इस पुरानी कहावत से विवाह में होने वाले खर्च का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस आर्थिक बोझ से मुक्ति पाने के लिए और आज के तेज रफ्तार जीवन में पंजीकृत विवाह एक सरल और सुरक्षित विकल्प बन रहा है.
दूसरी ओर अंतरजातिय विवाहों की संख्या भी जिले में उल्लेखनीय रुप से बढ रही है. जिला परिषद के समाज कल्याण विभाग के पास ऐसे विवाहों को मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता के लिए 941 जोडों ने आवेदन किया है. पंजीकृत विवाह के लिए सबसे पहले उप-निबंधक के माध्यम से आवेदन करना होता है. इसके लिए आधार कार्ड और स्कूल छोडने का प्रमाणपत्र सहित ये दस्तावेज अनिवार्य होते है. आवेदन के बाद 30 से 60 दिनों की अवधि दी जाती है और इस दौरान दोनों पक्षों के सीमित रिश्तेदारों की उपस्थिति में यह विवाह समारोह कानूनी रुप से संपन्न होता है. सामाजिक परिवर्तन की इस धारा में अब पारंपारिक धूमधाम की बजाय कानूनी मजबूति को अधिक महत्व दिया जा रहा है.

* पंजीकृत विवाह एक सरल और सुरक्षित विकल्प
पंजीकृत विवाह अब एक सरल और सुरक्षित विकल्प बन गया है. प्रेम विवाह करने वाले जोडों को कई बार पारिवारिक विरोध का सामना करना पडता है. ऐसे समय में पंजीकृत विवाह उन्हें कानूनी संरक्षण प्रदान करता है. पंजीकृत विवाह के कारण भविष्य में कई कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकता है. इसके अलावा शासन स्तर से अंतरजातिय विवाह करने वाले जोडों को प्रोत्साहन स्वरुप 50 हजार रुपए की सहायता सीधे उनके संयुक्त बैंक खाते में जमा की जाती है.

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