वेद वक्ताओं के निर्माण की पहली सीढी है संत गुलाबराव महाराज गुरूकुल
सभी जाति, धर्म के बच्चों को बचपन से ही यहां वेदों का ज्ञान दिया जाता है

* स्वामी गोविंददेव महाराज ने सदिच्छा भेंट दी
अमरावती/ दि. 9 -संत गुलाबराव महाराज गुरूकुल वेद वक्ताओं को निर्माण करने की प्रक्रिया में पहली सीढी है. यहां पर बच्चों को बचपन से ही वेदों का ज्ञान दिया जाता है और यहां के बाद पुणे के आलंदी में इन वेदपाटी बालकों को 4 वर्षीय वेद अध्ययन पूरा करना पडता है. महाराष्ट्र में ऐसी 48 वेद पाठशालाएं चल रही हैं. जहां पर बच्चों को सामान्य पढाई के साथ- साथ वेदों की भी शिक्षा दी जाती है. स्वामी गोविंदगिरी महाराज ने बताया कि बुलढाणा की वेदशाला में सभी जाति धर्म के बच्चों को वेदों की शिक्षा दी जाती है.
* वेदिक नहीं बल्कि वेदिक वीर बनाया जाता है
स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने कहा कि इस प्रकार की वेद पाठशलााओं में बच्चों को वेदिक नहीं बल्कि उन्हें वेदिक वीर बनाया जाता है जो आगे चलकर भारत की संस्कृति का जतन कर सकें.
स्वामी गोविंद गिरि महाराज ने उक्त बाते संत गुलाबराव महाराज गुरूकुल को सदिच्छा भेंट देने के दौरान कही. इस दौरान उनके साथ मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा (चांडक) और अकोला के एसपी अर्चित चांडक भी मौजूद थे. रविवार 8 फरवरी को सुबह 8.30 बजे गोविंद देव गिरि महाराज ने संत गुलाबराव महाराज गुरूकुल वेद विद्यालय बेलोरा को सदिच्छा भेंट दी. इस दौरान उन्होंने मनपा आयुक्त व अकेाला के एसपी को इस वेद पाठशाला के बारे में संपूर्ण जानकारी दी.
संत गुलाबराव महाराज गुरूकुल पहुंचने के बाद स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज और मनपा आयुक्त व अकोला के एसपी ने गुरूकुल की गौशाला का रूख किया और वहां मौजूद गायों को गुड व चारा खिलाया. इस दौरान स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने अधिकारी दंपत्ति को गुरूकुल के बारे में जानकारी दी. इसके पश्चात गुरूकुल अध्यक्ष एड. आर बी अटल ने स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को हार पहना कर स्वागत किया. इसके पश्चात संत गुलाबराव महाराज की प्रतिमा के समक्ष स्वामी गोविंद गिरि महाराज ने दीप प्रज्वलन किया. मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा (चांडक) और अर्चित चांडक ने भी संत गुलाबराव महाराज की प्रतिमा को नमन किया. स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज के स्वागत के लिए गुरूकुल के बच्चों ने योग प्रदर्शन किया. साथ ही लाठी चलाने की कला का प्रदर्शन किया. जिसकी गोविंद देव गिरि महाराज ने भूरि- भूरि प्रशंसा की. इसके बाद संतकुटी, गुरूकुल निवास सहित पूरा प्रांगण विद्यालय को समर्पित किया और उन्होंने बच्चों को मार्गदर्शन किया.
* बिना संस्कृति सुदृढ राष्ट्र निर्माण नहीं
इस दौरान सौम्या शर्मा ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि किसी भी सुदृढ राष्ट्र की कल्पना बिना संस्कृति के नहीं की जा सकती है. यदि हम अपनी संस्कृति को भी भूल जाएंगे तो फिर हम सुदृढ राष्ट्र का निर्माण नहीं कर पाएंगे. ऐसे में हमें ऐसी वेद पाठशालाओं की आवश्यकता है जो व्यक्ति को जीने का सही मार्ग बताए और उसे जीने का सही सलीखा सिखाए.
इस अवसर पर संत गुलाबराव महाराज गुरूकुल अध्यक्ष और बी. अटल, संजय नागपुरे, सुरेश रतावा, नगरसेवक ललिता रतावा, महेश गट्टाणी, संगीता गट्टाणी, रामेश्वर करवा, प्रमोद मुंदडा, उपाध्यक्ष ओमप्रकाश लढ्ढा, ट्रस्टी देवदत्त शर्मा, राजेंद्र हरकुट, शोभा हरकुट, सीए आशीष हरकूट, प्रवीण चांडक, गणेश अटल, सीए चंद्रशेखर सारडा, मनमोहन जाजू, मनोज डागा, महावीर सर, प्रज्ञा नागपुरे, पुराणिक गुरूजी, महेश गुरूजी, रमेश भट्टड, पराग करवा, सुरेश चांडक, रितेश चांडक सहित सभी सम्मानीय व्यक्ति उपस्थित थे.





