विशेष सभा में शहर की सफाई को लेकर जबरदस्त घमासान
विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष ने भी घेरा प्रशासन को

* प्रशासक राज के दौरान शहर का सत्यानाश होने का लगाया आरोप
* कामकाज में सुधार करने को लेकर प्रशासन को दी गई सक्त नसीहत
* सफाई ठेकेदार के खिलाफ भी पार्षदों का जमकर फूटा गुस्सा
* विपक्षी पार्षदों ने सफाई ठेका रद्द करने की मांग तक उठाई
* पार्षदों की सुलगते सवालों पर प्रशासन रह गया सन्न
* विशेष सभा में मनपा अधिकारियों से कोई जवाब तक देते नहीं बना
अमरावती/दि.28 – शहर में व्याप्त कचरे व गंदगी की समस्या तथा साफ-सफाई के अभाव को लेकर मनपा की पहली ही आमसभा में कई पार्षदों द्वारा उठाए गए मुद्दे को ध्यान में रखते हुए आज शनिवार 28 फरवरी को मनपा में खास तौर से साफ-सफाई के विषय पर ही चर्चा करने के लिए विशेष सभा बुलाई गई थी. जिसमें साफ-सफाई के मुद्दे को लेकर जबरदस्त घमासान मचा. क्योंकि विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के पार्षदों द्वारा भी मनपा प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त तरीके से मुखर होते हुए मनपा के अधिकारियों को जमकर आडे हाथ लिया गया. जिसके चलते ऐसी स्थिति बन गई थी कि, पार्षदों के सुलगते सवालों के सामने मनपा के अधिकारी पूरी तरह से सन्न रह गए थे और उन्हें सवालों के जवाब तक नहीं सूझ रहे थे. यह देखते हुए सभी दलों के पार्षद और भी अधिक संतप्त हो गए तथा उन्होंने साफ-सफाई हेतु दिए गए ठेके को रद्द करने और कर्तव्य में कोताही करनेवाले स्वास्थ्य व स्वच्छता अधिकारियों को निलंबित करने की मांग तक उठाई. साथ ही साथ मनपा को यह चेतावनी भी दी कि, यदि साफ-सफाई को लेकर मनपा के कामकाज में कोई सुधार नहीं होता है, तो कोणार्क कंपनी के साथ मनपा द्वारा किए गए करारनामे की मनपा परिसर में ही होली जलाई जाएगी.
साफ-सफाई के मुद्दे पर आज सुबह 11 बजे मनपा मुख्यालय स्थित भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सभागार में बुलाई गई विशेष सभा में सबसे पहले कांग्रेस पार्षद धीरज हिवसे ने मुद्दा उपस्थित करते हुए कहा कि, पुराने ठेकेदारों सहित मौजूदा ठेकेदार कोणार्क कंपनी द्वारा साफ-सफाई के ठेके में दर्ज नियमों व शर्तों का जमकर उल्लंघन किया जा रहा है तथा नियमानुसार मनुष्यबल व मशीनरी की उपलब्धता नहीं कराई जा रही. जिसे लेकर कार्रवाई का प्रावधान रहने के बावजूद भी मनपा प्रशासन द्वारा इसकी अनदेखी की जा रही है. साथ ही एक माह पहले निर्वाचित मनपा पार्षदों को भी साफ-सफाई के बारे में अब तक कोई रिपोर्टींग नहीं की गई. जिसके लिए पूरी तरह से स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय जाधव जिम्मेदार है. जिन्हें निलंबित करते हुए सफाई ठेकेदार के साथ किए गए करार को रद्द किया जाना चाहिए.
पार्षद धीरज हिवसे द्वारा उठाए गए मुद्दे का अनुमोदन करते हुए कांग्रेस पार्षद बबलू शेखावत ने कहा कि, प्रशासन ने पार्षदों की ओर से रखे जानेवाले सभी मुद्दों व सवालों पर साफ व स्पष्ट जवाब देने चाहिए. क्योंकि इस विशेष सभा का आयोजन केवल टाल-मटोल अथवा टाइमपास करने के लिए नहीं किया गया है. इस समय सभागृह नेता चेतन गावंडे ने कुछ हद तक प्रशासन का बचाव करने का प्रयास करते हुए कहा कि, विशेष सभा में सभी की राय एवं सुझावों का स्वागत है. लेकिन प्रशासन तथा मनपा अधिकारियों के लिए पार्षदों द्वारा सम्मानजनक शब्दों व संसदीय भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए. जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने अपनी चिरपरिचित शैली में सदन को संबोधित करते हुए कहा कि, आज की सभा का मुख्य मुद्दा ही शहर की साफ-सफाई से संबंधित है और इस विषय को लेकर पूरे शहर में जबरदस्त रोष व गुस्से वाला माहौल है. ऐसे में मनपा प्रशासन ने जनभावनाओं को समझना चाहिए. साथ ही उन्होंने सत्ता पक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि, विपक्ष की बातों को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं किया जा सकता. जिसके बाद साफ-सफाई के मुद्दे पर सदन में आगे की कार्रवाई शुरु हुई.
इस समय एमआईएम के पार्षद सलाउद्दीन ने विषय को आगे बढाते हुए कहा कि, 4 साल बाद जनप्रतिनिधियों को नागरिकों की आवाज बनकर सदन में बोलने का मौका मिला है. जिसके चलते 4 साल तक जमकर अपनी मनमानी कर चुके मनपा प्रशासन को जनता की आवाज सुननी ही पडेगी. वहीं प्रभाग क्र. 7 जवाहर स्टेडियम से शिवसेना की पार्षद रहनेवाली स्नेहा लुल्ला ने कृष्णा नगर व रामपुरी कैम्प परिसर में व्याप्त कचरे व गंदगी के फोटो सदन में दिखाते हुए कहा कि, इन दोनों परिसरों में विगत लंबे समय से कई साफ-सफाई नहीं हुई है. जिसे लेकर बार-बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद मनपा अधिकारियों द्वारा इसकी ओर कोई ध्यान भी नहीं दिया जा रहा. ऐसे में अब खुद आयुक्त सौम्या शर्मा ने इन दोनों परिसरों को भेंट ेदते हुए दौरा करना चाहिए.
इसके साथ ही भाजपा पार्षद सुरेखा लुंगारे व आशीष अतकरे तथा राकांपा पार्षद मनीष बजाज ने भी अपने-अपने प्रभागों में कचरे व गंदगी के ढेर लगे होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि, विगत पांच वर्षों के दौरान सफाई ठेके के नाम पर ठेकेदारों को 1284 करोड रुपयों का भुगतान किया जा चुका है. लेकिन इसके बावजूद पूरे शहर में कचरे व गंदगी के ढेर पडे दिखाई दे रहे है. क्योंकि सफाई ठेकेदारों द्वारा सही ढंग से साफ-सफाई करते हुए कचरा संकलन व कचरे की ढुलाई कर उसे कंपोस्ट डिपो पर ले जाकर डालने का काम ही नहीं किया जा रहा, बल्कि सफाई ठेकेदारों के सफाई कर्मियों द्वारा प्रभागों में ही अलग-अलग स्थानों पर कचरा जमा करते हुए उसे जला दिया जा रहा है. जिसके चलते जहां एक ओर शहर में कभी भी किसी भीषण अग्निकांड की आशंका बनी रहती है. वहीं नागरिकों के स्वास्थ्य एवं प्रदूषण के लिए भी खतरा बना हुआ है. ऐसे में सफाई ठेकेदार के खिलाफ कडी कार्रवाई होना अपेक्षित है.
इसके अलावा एमआईएम के पार्षद अब्दुल हमीद एवं मजीद खान सहित नवसारी प्रभाग की पार्षद कल्याणी तायडे ने कहा कि, इस समय मुस्लिम समाजबंधुओं का पवित्र रमजान माह चल रहा है. लेकिन इसके बावजूद भी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कोई साफ-सफाई नहीं की जा रही. वहीं सफाई ठेकेदार द्वारा कचरे को कंपोस्ट डिपो पर ले जाकर फेंकने की बजाए नवसारी रोड पर लाकर फेंका जा रहा है. इस समय पार्षद कल्याणी तायडे ने जानना चाहा कि, अमरावती शहर की साफ-सफाई का ठेका रखनेवाली कोणार्क कंपनी का ऑफीस अमरावती शहर में कहां है और कंपनी के किस व्यक्ति से साफ-सफाई के बारे में बातचीत की जाए. सबसे पहले तो इसकी जानकारी मनपा प्रशासन ने पार्षदों को देनी चाहिए. वहीं एमआईएम पार्षद मजीद खान ने सफाई ठेकेदारों द्वारा सफाई कामगारों के हाजिरी रजिस्टर में रहनेवाली गडबडियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि, मनपा द्वारा हर महिने सफाई कामगारों के नाम पर 9 लाख रुपए का भुगतान अदा किया जाता है. जिसमें बडे पैमाने पर अपहार हुआ है. अत: इस रकम की संबंधितों से वसूली की जानी चाहिए.
इसके साथ ही भाजपा पार्षद मिलिंद बांबल व लवीना हर्षे ने कहा कि, वे शहर के बीचोबीच स्थित प्रभाग क्र. 13 अंबापेठ-गौरक्षण का प्रतिनिधित्व करते है. जिसमें आधा क्षेत्र रिहायशी व आधा क्षेत्र कमर्शियल है और इस प्रभाग से होकर शहर का सबसे बडा अंबा नाला भी गुजरता है. साथ ही इस प्रभाग में 158 नालियां है. यदि रोजाना 10 नालियों की भी सफाई होती है, तो भी प्रभाग की सभी नालियों को साफ करने में 15 दिन का समय लगता है. क्योंकि सफाई ठेकेदार द्वारा पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मी नहीं लगाए गए है. इसके अलावा कचरे व गंदगी का संकलन भी सही तरीके से नहीं किया जाता, बल्कि नालियों से निकलने वाली गंदगी को सडकों के किनारे छोड दिया जाता है और घरों से निकलने वाले कचरे को जोन क्र. 2 कार्यालय के पीछे लाकर फेंक दिया जाता है. जिसके चलते तारासाहब बगीचा परिसरवासियों का स्वास्थ्य खतरे में कहा जा सकता है. इसके अलावा सत्ता पक्ष में शामिल युवा स्वाभिमान पार्टी की पार्षद सुमती ढोके ने भी साफ-सफाई के मुद्दे पर आक्रामकता दिखाते हुए कहा कि, जहां एक ओर शहर में जनसंख्या और रिहायशी बस्तियों की बढोतरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मियों की संख्या को घटाकर कम किया जा रहा है. पहले जहां एक प्रभाग में 55 सफाई कर्मी लगाए जाते थे, वहीं अब उनकी संख्या को घटाकर 40 कर दिया गया है, यानि मनपा प्रशासन द्वारा साफ-सफाई के मामले में उलटी गंगा बहाई जा रही है. सूतगिरणी प्रभाग की वायएसपी पार्षद सुमती ढोके ने मनपा प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि, भले ही वे मनपा के सत्ता पक्ष में शामिल है. लेकिन इसके बावजूद जरुरत पडने पर साफ-सफाई के मुद्दे को लेकर मनपा प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने से नहीं चुकेंगी.

* शहर की जनता देख रही है, बात को हलके में मत लो
– पार्षद अनिल अग्रवाल ने पहली ही बैठक में मनपा प्रशासन को जमकर लिया आडे हाथ
– हर माह रिपोर्ट देने व ठेका शर्तों के पालन की मांग उठाई
– ठेका देने में हुई जल्दबाजी और 2 घंटे में निविदा तैयार होने पर भी उठाया सवाल,
शहर की साफ-सफाई के मुद्दे पर बुलाई गई इस विशेष सभा को बेहद धीर-गंभीर मोड पर ले जाते हुए मनपा के स्वीकृत पार्षद व दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के संपादक अनिल अग्रवाल ने कहा कि, साफ-सफाई के काम में सुधार करने के उद्देश्य से मनपा द्वारा प्रभागनिहाय पद्धती की बजाए जोन निहाय पद्धती का अवलंब किया गया था और फिर पूरे शहर के लिए संयुक्त व एकल ठेका दिया गया. लेकिन स्थिति सुधरने की बजाए और भी अधिक बिगड गई और अब ‘कुएं से निकले, खाई में गिरे’ वाले हालात है. पार्षद अनिल अग्रवाल ने यह भी कहा कि, साफ-सफाई को लेकर संयुक्त ठेके के खिलाफ अदालत में याचिका दायर होने के साथ ही बडे पैमाने पर आपत्तियां भी दर्ज हुई थी. लेकिन इसके बावजूद मनपा प्रशासन ने संयुक्त ठेका जारी करने में जबरदस्त जल्दबाजी की. जिससे मनपा के अधिकारियों का हेतु व उद्देश समझा जा सकता है. पार्षद अग्रवाल ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि, शहर में व्याप्त कचरे व गंदगी की समस्या को लेकर शहर के कई अखबारों द्वारा फोटो के साथ पन्ने भर-भरकर खबरें प्रकाशित की जा रही है. लेकिन इसके बावजूद मनपा प्रशासन की आंखें और नींद नहीं खुली. यही वजह है कि, आज तक संबंधितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. जिसके चलते आज शहर की साफ-सफाई के मुद्दे पर बात करने के लिए विशेष सभा बुलाए जाने की नौबत आन पडी है. जिसे मनपा प्रशासन के लिए एक शर्मनाक स्थिति कहा जा सकता है.
इस समय स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल ने इस बात पर भी विशेष रुप से प्रकाश डाला कि, पहले जहां प्रति माह 35 करोड रुपयों का सफाई ठेका दिया जाता था और ठेके की अधिकतम अवधि 2 से 3 वर्ष हुआ करती थी. जिसमें समयावृद्धि का प्रावधान हुआ करता था. वहीं अब कोणार्क कंपनी को 84 माह के लिए प्रति माह 45 करोड रुपयों के हिसाब से ठेका दिया गया है. जिसके तहत घरों से निकलनेवाले कचरे को संकलित करने हेतु 4160 रुपए प्रति टन तथा कचरे को कंपोस्ट डिपो पर ले जाकर डालने हेतु 1260 रुपए प्रति टन की दरों से भुगतान किया जा रहा है. लेकिन हैरत की बात यह है कि, न तो घरों से निकलने वाले कचरे को संकलित किया जा रहा है और न ही कचरे से भरे कंटेनरों को कंपोस्ट डिपो पर ले जाया जा रहा रहा. ऐसे में मनपा प्रशासन ने लिखित जवाब देना चाहिए कि, अब तक कंपोस्ट डिपो में कितना कचरा पहुंचा है और वहां पर कचरे के वर्गीकरण की क्या व्यवस्था है.
उन्होंने इस बात का भी विशेष उल्लेख किया कि, पहले निविदा करार अंतिम होने के बाद प्रशासन द्वारा निविदाधारक कंपनी को काम शुरु करने के लिए 60 दिनों का समय दिया जाता था. जबकि कोणार्क कंपनी को 90 दिनों का समय दिया गया और 90 दिन का यह समय आज 28 फरवरी को ही पूरा भी हो गया. इस दौरान ठेकेदार कंपनी द्वारा कचरा उठाने के लिए 48 वाहन लगाना जरुरी था, परंतु इस समय केवल 22 वाहन ही काम पर लगाए गए है. ऐसे में सवाल पूछा जाना चाहिए कि, मनपा के वरिष्ठ स्वास्थ्य निरीक्षकों व स्वास्थ्य निरीक्षकों द्वारा इस दौरान कितने इन्स्पेक्शन किए गए और कितने आब्जेक्शन दर्ज कराए गए. साथ ही इस बात का भी जवाब मिलना चाहिए कि, शहर के सभी प्रभागों में दो शिफ्टों के तहत साफ-सफाई का काम क्यों किया जा रहा है.
इन तमाम मुद्दों को उठाने के साथ ही पार्षद अनिल अग्रवाल ने मांग उठाई कि, प्रत्येक प्रभाग में मनपा के सफाई कर्मियों की हाजिरी हेतु बायोमैट्रीक प्रणाली लगाई जानी चाहिए और मनपा के कंट्रोल रुम से सभी सदस्यों को शहर में चल रहे साफ-सफाई के कामों की जानकारी नियमित तौर पर दी जानी चाहिए. * हमें कचोरी-समोसा खाने के लिए यहां बुलाया क्या?
साफ-सफाई के मुद्दे पार्षदों द्वारा उपस्थित किए जा रहे सवालों को लेकर मनपा के अधिकारियों की ओर से की जा रही टाल-मटोल को देखते हुए कांग्रेस के स्वीकृत पार्षद व पूर्व महापौर मिलिंद चिमोटे जबरदस्त तरीके से बिफर उठे और उन्होंने पीठासीन सभापति महापौर श्रीचंद तेजवानी व पीठासीन अधिकारी मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा से जानना चाहा कि, क्या इस विशेष सभा में मनपा के पार्षदों को चर्चा करने के नाम पर कचोरी व समोसा खाने के लिए बुलाया गया है. जिसके बाद राकांपा के गुटनेता व शिवसेना-बसपा गट के गुटनेता राजेंद्र तायडे भी मनपा प्रशासन के खिलाफ भडक गए और उन्होंने अधिकारियों द्वारा की जा रही टाल-मटोल पर आक्षेप दर्ज कराते हुए कहा कि, संभवत: मनपा के अधिकारी अब भी विषय की गंभीरता और जनभावनाओं को समझ नहीं पा रहे. बल्कि बात को हलके में लेते हुए इसे मजाक समझ रहे है. जबकि मनपा प्रशासन को धीर-गंभीर होकर पार्षदों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए. साथ ही साथ प्रभाग क्र. 14 जवाहर गेट-बुधवारा के कांग्रेस पार्षद डॉ. संजय शिरभाते ने जानना चाहा कि, जब मनपा द्वारा नागरिकों से तमाम तरह के टैक्स व जुर्माने की वसूली की जा रही है, तो नागरिकों को सेवाएं व सुविधाएं कौन देगा. साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि, कर्तव्य में कोताही करनेवाले अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कब होगी. इसके अलावा वायएसपी के पार्षद प्रशांत वानखडे व प्रीति रेवणे ने बाकायदा मनपा प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि, यदि जल्द ही साफ-सफाई के काम को लेकर सुधार नहीं किया गया, तो मनपा परिसर में ही सफाई ठेका करार की होली जलाई जाएगी.
* इंगोले व डेंडूले के बीच हुई थोडी तनातनी
साफ-सफाई के मुद्दे को लेकर बुलाई गई आमसभा में कुछ समय के लिए वातावरण गरमा गया था. जब नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने पीठासीन अधिकारी को संबोधित करते हुए कहा कि, सदन को विपक्ष की बात सुननी ही पडेगी. जिसके जवाब में राकांपा पार्षद रतन डेंडूले ने बाकायदा विलास इंगोले का नाम लेते हुए कहा कि, ‘विलासजी धमकी नहीं चलेगी और सदन का काम किसी दबाव से नहीं चलेगा.’ पार्षद रतन डेंडूले द्वारा यह कहे जाते ही विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस की ओर से इस पर आपत्ति जताई गई. पश्चात सत्ता पक्ष व विपक्ष के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा अपनाई गई सामंजस्यपूर्ण भूमिका के चलते माहौल शांत होकर सदन का काम आगे बढा.

* 3-4 वर्षों से हुई तकलीफ का जिम्मेदार कौन, कार्रवाई कब?
– पार्षद बबलू शेखावत ने महापौर तेजवानी से मांगी ‘रुलिंग’
इस विशेष सभा में साफ-सफाई के मुद्दे पर बेहद आक्रामक तेवर दिखाते हुए कांग्रेस पार्षद बबलू शेखावत ने जानना चाहा कि, विगत 3-4 वर्षों के दौरान कचरे व गंदगी की समस्या के चलते अमरावती शहर वासियों को जिन भयानक तकलीफों का सामना करना पडा, उसके लिए जिम्मेदार कौन लोग है और उन जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी, इसे लेकर पीठासीन सभापति व महापौर श्रीचंद तेजवानी ने आज की सभा खत्म होने से पहले ‘रुलिंग’ देनी चाहिए. साथ ही मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा ने संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई भी करनी चाहिए. सफाई ठेके के नाम पर लाखों-करोडों रुपयों के भुगतान को हडप कर जानेवाले सफाई ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड किए जाने की मांग उठाते हुए कांग्रेस पार्षद बबलू शेखावत ने कहा कि, ठेकेदारों के साथ मिलिभगत करते हुए बहती गंगा में हाथ धोनेवाले मनपा के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता है, तो एक गलत परंपरा शुरु व स्थापित होगी कि, काम नहीं करने या गलत काम करने पर भी कुछ नहीं होता.
इस समय कांग्रेस पार्षद बबलू शेखावत ने यह भी कहा कि, अमरावती मनपा का 60 फीसद खर्च साफ-सफाई पर ही होता है. लेकिन इसके बावजूद शहर में ढंग से साफ-सफाई नहीं होती, यह सीधे-सीधे आम जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी है. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि, प्रशासक राज के दौरान सफाई ठेके को लेकर मनपा के लगभग सभी आयुक्तों द्वारा जमकर मनमानी की गई और मौजूदा आयुक्त के कार्यकाल में भी एकल व संयुक्त ठेके का निर्णय बेहद जल्दबाजी में लिया गया. जिसमें साफ-सफाई से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समावेश ही नहीं किया गया. यदि जल्दबाजी करने की बजाए मनपा की आमसभा गठित होने के बाद सफाई ठेके के बारे में निर्णय लिया जाता, तो शायद निविदा के नियमों व शर्तों का दायरा और भी अधिक व्यापक होता. इस समय पार्षद बबलू शेखावत ने सुझाव दिया कि, आज की आमसभा में उठे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कोणार्क कंपनी को दिए गए सफाई ठेके के नियमों व शर्तों पर पुनर्विचार किया जाए और कुछ नए नियमों व शर्तों का ठेका करार में समावेश किया जाए.

* कोणार्क को दिया गया ठेका पूरी तरह से अवैध
– नियमों पर रखा गया ताक पर, प्रशासन की भूमिका संदिग्ध
– स्वीकृत पार्षद व पूर्व महापौर मिलिंद चिमोटे का कथन
कांग्रेस की ओर से मनपा में स्वीकृत पार्षद रहनेवाले पूर्व महापौर मिलिंद चिमोटे ने प्रशासक राज के दौरान शहर की साफ-सफाई हेतु मनमाने ढंग से अमल में लाई गई ठेका पद्धति पर सवालिया निशान उठाने के साथ ही इस समय अस्तित्व में रहनेवाले साफ-सफाई के एकल व संयुक्त ठेके को भी पूरी तरह से अवैध बताया. पार्षद चिमोटे का कहना रहा कि, कोणार्क कंपनी को सफाई ठेका देने हेतु मनपा प्रशासन ने सभी नियमों को ताक पर रख दिया था और इसके लिए मनपा में भारी भ्रष्ट्राचार भी हुआ. ऐसे में इस अवैध व नियमबाह्य सफाई ठेके को पूरी तरह से रद्द करते हुए सफाई ठेके की प्रक्रिया को नए सिरे से अमल में लाया जाना चाहिए. जिसके लिए सर्वसाधारण सभा में प्रस्ताव रखने के उपरांत उसे स्थायी समिति की मंजूरी दिलाई जानी चाहिए.