इस बार मनपा के चुनावी मैदान में तीन प्रमुख चेहरे नदारद
पूर्व पार्षद दिनेश बूब, बलदेव बजाज व अ. नाजीम ने नामांकन ही नहीं भरा

* दिनेश बूब लगातार चार बार हो चुके निर्वाचित, पिछली बार सदन में थे एकमात्र निर्दलीय पार्षद
* भाजपा के बलदेव बजाज व एमआईएम के अ. नाजीम पहली बार पहुंचे थे सदन में
* तीनों ने अलग-अलग व्यक्तिगत कारणों के चलते इस बार चुनाव लडने से किया इंकार
अमरावती /दि.1- वर्ष 2017 में हुए मनपा चुनाव पश्चात निर्वाचित होकर पार्षद बने दिनेश बूब, बलदेव बजाज व अब्दुल नाजीम इस बार के चुनावी अखाडे में दिखाई नहीं दे रहे है. क्योंकि तीनों ही पूर्व पार्षदों ने अपनी-अपनी व्यक्तिगत वजहों को आगे करते हुए इस बार मनपा का चुनाव लडने से ही इंकार कर दिया और अपना नामांकन भी दाखिल नहीं किया. जिसके चलतेे पिछले सदन का हिस्सा रहे तीनों पूर्व पार्षद इस बार के सदन में दिखाई नहीं देंगे.
बता दें कि, पूर्व पार्षद दिनेश बूब अब तक चार बार पार्षद पद का चुनाव जीतने के साथ ही लगातार 20 वर्षों तक अमरावती मनपा के सदन का हिस्सा रहे. खास बात यह भी थी कि, जहां पिछली बार भाजपा ने जवाहर स्टेडियम प्रभाग की एक सीट पर निर्विरोध प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल करने के साथ ही मनपा के सदन में रिकॉर्ड 45 सीटें जीती थी. वहीं दूसरी ओर उसी जवाहर स्टेडियम प्रभाग से दिनेश बूब ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की थी और वे मनपा के छठवें सदन में एकमात्र निर्दलीय पार्षद भी थे. किसी जमाने में कट्टर शिवसैनिक के तौर पर पहचान हासिल रखनेवाले पूर्व पार्षद दिनेश बूब ने आगे चलकर पूर्व मंत्री बच्चू कडू के नेतृत्ववाली प्रहार जनशक्ति पार्टी में प्रवेश करते हुए वर्ष 2024 के संसदीय चुनाव में भी हिस्सा लिया था. जिसमें उन्हें हार का सामना करना पडा था. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि, पूर्व पार्षद दिनेश बूब द्वारा लगातार पांचवीं बार मनपा के चुनाव में हिस्सा लिया जाएगा. परंतु मनपा की चुनावी धामधूम शुरु होने के साथ ही पूर्व पार्षद दिनेश बूब ने स्पष्ट कर दिया था कि, वे इस बार मनपा का चुनाव नहीं लडने जा रहे. जिसे लेकर वजह पूछे जाने पर पूर्व पार्षद दिनेश बूब ने कहा कि, चुनाव नहीं लडने के पीछे कई वजहें है. जिनका खुलासा वे अगले एक-दो दिन में बाकायदा पत्रवार्ता लेकर करनेवाले है.
उधर दूसरी ओर वर्ष 2017 के चुनाव में प्रभाग क्र. 18 राजापेठ-संत कंवरराम से पहली बार निर्वाचित भाजपा पार्षद बलदेव बजाज का पहला कार्यकाल काफी हद तक समाधानकारक रहा और वर्ष 2022 में सदन का कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद भी पूर्व पार्षद बलदेव बजाज का पार्टी और क्षेत्र के सामाजिक कामों से लगातार संपर्क बना रहा. जिसके चलते पूर्व पार्षद बलदेव बजाज को इस बार के मनपा चुनाव में भाजपा की ओर टिकट के लिए प्रबल दावेदार माना जा रहा था. साथ ही साथ भाजपा में भी पूर्व पार्षद बलदेव बजाज की टिकट लगभग पूरी तरह से पक्की थी. लेकिन नामांकन प्रक्रिया के शुरु होने से ऐन पहले पूर्व पार्षद बलदेव बजाज ने अपने पारिवारिक कारणों एवं स्वास्थ्य संबंधी वजहों का हवाला देते हुए इस बार चुनाव लडने से साफ तौर पर इंकार कर दिया था. जिसे लेकर चली चर्चाओं पर खुद ही विराम लगाते हुए पूर्व पार्षद बलदेव बजाज ने स्पष्ट किया था कि, पार्टी को लेकर उनकी कोई नाराजगी नहीं है. साथ ही पार्टी के सभी स्थानीय नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध है. इसके अलावा पार्टी की ओर से उन्हें टिकट लेकर चुनाव लडने का संदेश भी दिया गया है, परंतु वे खुद ही इस बार चुनाव लडने में असक्षम है. जिसके चलते उनके चुनाव नहीं लडने के फैसले का कोई भी अन्य अर्थ न निकाला जाए.
इसके अलावा प्रभाग क्र. 16 अलिम नगर-रहमत नगर से पिछली बार एमआईएम की टिकट पर पार्षद निर्वाचित होने के साथ ही मनपा के सदन में एमआईएम के गुट नेता रह चुके पूर्व पार्षद अब्दुल नाजीम ने भी इस बार एमआईएम से उनकी टिकट कनफर्म रहने के बावजूद भी चुनाव लडने से स्पष्ट इंकार कर दिया. विशेष उल्लेखनीय है कि, पिछली बार की चुनाव में एमआईएम ने पहली बार अमरावती मनपा के सदन में रिकॉर्ड 10 सीटें जीती थी. उस समय इस सफलता का स्थानीय स्तर पर पूरा श्रेय अब्दुल नाजीम और उनकी टीम को दिया गया था. जिसके चलते यह तय माना जा रहा था कि, इस बार के चुनाव में भी एमआईएम की ओर से अब्दुल नाजीम प्रत्याशी रहने के साथ-साथ मुस्लिम बहुल प्रभागों में पार्टी का दमदार व सशक्त चेहरा भी रहेंगे. लेकिन हैरत-अंगेज तरीके से इस बार भी चुनाव में अब्दुल नाजीम का चेहरा ही नदारद है. क्योंकि एमआईएम द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने हेतु तैयारी दर्शाने के बावजूद खुद अब्दुल नाजीम ने मनपा का चुनाव लडने से साफ तौर पर इंकार कर दिया. इस बारे में जानकारी व प्रक्रिया हेतु संपर्क किए जाने पर अब्दुल नाजीम ने बताया कि, वे पहले की तरह आज भी ‘मजलिसी’ यानि एमआईएम के समर्पित कार्यकर्ता है और पार्टी प्रमुख सांसद असदउद्दीन ओवैसी के नेतृत्व पर पूरी निष्ठा भी रखते है. परंतु इन दिनों पार्टी में स्थानीय स्तर पर जिस तरह की अंतर्गत गुट बाजी व अंत:र्कलह वाला माहौल है, उसे देखते हुए वे बुरी तरह से व्यथित और दुखी है. जिसके चलते उन्होंने इस बार खुद को मनपा के चुनाव से अलग रखने का निर्णय लिया. पार्टी की ओर से टिकट कनफर्म रहने के बावजूद चुनाव लडने से किए गए इंकार को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में पूर्व पार्षद अब्दुल नाजीम ने कहा कि, इन दिनों अमरावती शहर में पार्टी का नेतृत्व कर रहे लोगों ने मनपा चुनाव हेतु प्रत्याशी तय करते समय उन्हें (अ. नाजीम को) भरोसे में नहीं लिया. साथ ही मनमाने ढंग से प्रत्याशियों के पैनल तय किए गए. जिसमें प्रभाग क्र. 16 से उनके साथ बेहद कमजोर प्रत्याशियों को पैनल किया जा रहा था. जिसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने चुनाव नहीं लडना ही बेहतर समझा.





