इस वर्ष महाशिवरात्रि पर बनेंगे दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग
लक्ष्मी नारायण और बुध-आदित्य योग से बढेगा पर्व का महत्व

* सुबह 7.17 से रात 8 बजे तक रहेगा सर्वार्थ सिद्धि योग
अमरावती /दि.12 – इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे है. करीब 19 वर्षों के बाद लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण हो रहा है, जिससे यह महाशिवरात्रि विशेष फलदायी मानी जा रही है. रविवार 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन सूर्योदय के बाद सुबह 7.17 से लेकर रात 8 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. इस अवधि में भगवान शिव की पूजा, अभिषेक, जप और उपवास करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होगी.
ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष शुक्र और बुध के कुंभ राशि में एक साथ प्रवेश करने से लक्ष्मी नारायण योग बनेगा. वहीं कुंभ राशि में सूर्य, शुक्र और राहू-चार ग्रहों की युति से अद्भूत और दुर्लभ योग का निर्माण हो रहा है. इन ग्रह योगों के प्रभाव से महाशिवरात्रि पर की गई शिव उपासना अत्यंत फलदायी मानी जा रही है. कुंभ राशि में सूर्य और बुध की युति से बुध-आदित्य योग भी बन रहा है. यह योग पूजा, व्रत, अभिषेक और साधना करने वालों को विशेष लाभ प्रदान करता है.
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस योग में शिवलिंग पर जल, दूध, वेदपत्र, धतूरा, अर्पित कर पुरुष सूक्त, शिव मानस पूजा, रुद्राष्टाध्यायी, रुद्राष्टक, शिव पंचाक्षर स्त्रोत तथा महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. महाशिवरात्रि पर्व पर उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है. सुबह से लेकर निशिथकाल यानि मध्यरात्रि तक शिव उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होगा. ज्योतिषी पंडित मुरलीधर शर्मा (जरीपटका, नागपुर) के अनुसार इस दिन व्यतिपात योग भी रहेगा, जिससे किये गये दान का अक्षय पुण्य मिलता है.
फाल्गुन पक्ष की त्रयोदशी तिथि रविवार को शाम 5.07 बजे तक रहेगी. इसके बाद चतुर्दशी तिथि का आरंभ होगा. चतुर्दशी तिथि का समापन अगले दिन 16 फरवरी को शाम 5.35 बजे होगा. शास्त्रों में उल्लेख है कि, महाशिवरात्रि पर उपवास और पूजन करने से वर्ष भर की समस्त एकादशियों का फल प्राप्त होता है. भगवान शिव की विशेष पूजा मध्यरात्रि में रात 12.09 बजे से 1.15 बजे तक करना अत्यंत शुभ माना गया है. वहीं श्रवण नक्षत्र का आरंभ रात्रि 7.48 बजे से होगा. जो शिव आराधना को और अधिक फलदायी बनाएगा. इस पावन अवसर पर रात्रि जागरण, जप और व्रत करने से भक्तों पर भगवान शिव की वर्ष भर विशेष कृपा बनी रहती है.