तीन वर्षीय गोजिरी ने रच दिया अनूठा इतिहास
अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पाने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की शोधकर्ता बनी

नागपुर/दि.16 – नागपुर की मात्र तीन वर्षीय बालिका गोजिरी अजिंक्य कोत्तावार ने विज्ञान के क्षेत्र में अनोखी उपलब्धि हासिल करते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया है. उन्हें एक विशेष वैज्ञानिक प्रयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय पेटेंट प्राप्त हुआ है, जिसके साथ ही वह दुनिया की सबसे कम उम्र की अंतरराष्ट्रीय पेटेंट धारक शोधकर्ता बन गई हैं.
मनीषनगर स्थित स्मॉल वंडर प्री-स्कूल में नर्सरी में पढ़ने वाली गोजिरी ने साबुन के बुलबुलों (बबल्स) को नए वैज्ञानिक रूप में प्रस्तुत किया है. आमतौर पर साबुन के बुलबुले गोल आकार के होते हैं, लेकिन गोजिरी के प्रयोग के माध्यम से इन्हें त्रिमितीय (3-डी) और विभिन्न ज्यामितीय आकारों में बनाया जा सकता है. इस अनोखे प्रयोग के लिए विशेष प्रकार का एक आधार (बेस) तैयार किया गया है, जिसकी मदद से हवा में छोड़े गए बुलबुले गोल न रहकर अलग-अलग वैज्ञानिक आकृतियाँ धारण करते हैं.
इस अभिनव प्रयोग को 20 नवंबर 2025 को जर्मनी सरकार की ओर से आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय पेटेंट प्रदान किया गया. इसके बाद ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्डस् ने भी गोजिरी को यंगेस्ट इंटरनेशनल पेटेंट होल्डर के रूप में दर्ज किया है.
* पिता से मिला शोध का संस्कार
गोजिरी की इस उपलब्धि के पीछे उनके पिता डॉ. अजिंक्य कोत्तावार की प्रेरणा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. डॉ. कोत्तावार स्वयं प्रसिद्ध शोधकर्ता हैं और उनके नाम पर 48 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट दर्ज हैं. शिक्षा और कृषि क्षेत्र में उनके नवाचारों के कारण उन्हें महाराष्ट्र का फुनसुक वांगडू भी कहा जाता है. उन्होंने यवतमाल में उबुंटू प्रयोगशील विद्यालय की स्थापना की है, जहां बच्चों को प्रयोग आधारित शिक्षा दी जाती है. डॉ. कोत्तावार का कहना है कि गोजिरी के साथ खेलते-खेलते ही इस शोध की अवधारणा सामने आई. उनका मानना है कि युवाओं को केवल नौकरी के पीछे भागने के बजाय शोध और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.
गोजिरी की इस असाधारण उपलब्धि ने नागपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है. इतनी छोटी उम्र में वैज्ञानिक सोच और नवाचार का यह उदाहरण आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है.





