विदर्भ में बाघों के अवैध शिकार का खतरा

सोशल मीडिया ही समस्या, गर्मी के मौसम में वन अधिकारियों की परीक्षा

* पांच हजार गांवों में जन जागरूकता बैठक
अमरावती /दि.11 विदर्भ के शेरों पर इसने अंतरराष्ट्रीय तस्करों का ध्यान आकर्षित किया है. वर्तमान में पर्यटक सोशल मीडिया पर बाघों के स्थानों की जानकारी साझा कर रहे हैं और गर्मी के मौसम के आगमन के साथ ही वन विभाग सतर्क हो गया है. गांवों में बाघों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. विदर्भ के चंद्रपुर, नागपुर, गढ़चिरोली, यवतमाल, गोंदिया, भंडारा, अमरावती और वर्धा जिले बाघों की बढ़ती संख्या के कारण ’भीड़भाड़’ से भर गए हैं.
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय शिकार समूहों को जानकारी है कि विदर्भ में बाघों की संख्या बहुत अधिक है. इसलिए, बाघ अभ्यारण्यों के बाहर स्थित बाघों को संरक्षित किया जाना आवश्यक था. तदनुसार, 7 और 8 फरवरी 2026 को सारिस्का में देश भर के बाघ अभ्यारण्यों के अधिकारियों की एक बैठक आयोजित की गई. इसमें ग्रीष्म ऋतु के मद्देनजर बाघों के संरक्षण और अवैध शिकार पर नियंत्रण के मुद्दों पर चर्चा की गई. यह ज्ञात है कि राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशानिर्देशों के अनुसार, देश भर के 48 बाघ अभ्यारण्यों में बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए योजना बनाई गई है.

* दो महीनों में छह बाघों की मौत
– विदर्भ के चार जिलों भंडारा, अमरावती, चंद्रपुर और अमरावती में पिछले दो महीनों में छह बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. वन विभाग ने बाघों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया है. इतना ही नहीं, सरकारी फोरेंसिक प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद भी वन विभाग ने उसे सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे बाघों की मौत का रहस्य अभी भी बना हुआ है.
– मेलघाट और वारुद में बाघों की हत्या को लेकर चर्चा जारी है. बताया जा रहा है कि मेलघाट में मृत बाघ के ठिकाने की जानकारी सोशल मीडिया पर उपलब्ध थी. विदर्भ में दो महीने में छह बाघ मारे जा चुके हैं.

* बाघ संरक्षण हेतु ग्राम सभा
ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ हो चुका है और वन विभाग ने विदर्भ के जंगलों में 2200 जल निकाय बनाए हैं. हालांकि, मई माह में बाघ परियोजना के अंतर्गत आने वाले इन जल निकायों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ती है. बाघों की प्यास बुझाने के लिए सौर पंपों और बोरवेलों की कमी है. इसका कारण निधियों का अभाव है. वन विभाग ने ग्रीष्म ऋतु में बाघों को शिकारियों से बचाने के लिए गांवों में जागरूकता अभियान शुरू कर दिए हैं. वर्तमान में विदर्भ में ग्राम स्तर पर 5 हजार बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं.

 

Back to top button