विशिष्ट नेता को फेवर करने चौकडी ने बांटी मनमानी उम्मीदवारी और किया बीजेपी का बेडा गर्क

किरण पातुरकर का सनसनीखेज और बडा आरोप

* पार्टी फोरम पर भी एक्सपोज करूंगा वे नाम
* भाजपा आराम से मनपा में जीत सकती थी 50 सीटें
* टिकट वितरण और चुनाव नियोजन सभी से रखा गया उन्हें और महल्ले तथा खांडेकर को दूर
अमरावती/ दि. 17- बीजेपी के बडे नेता और अमरावती शहर जिलाध्यक्ष रहे किरण पातुरकर ने बडा धमाका किया है. पातुरकर ने खुल्लमखुल्ला आरोप लगाया कि विशिष्ट नेता को फेवर करने के लिए अमरावती महापालिका चुनाव में मनमाने रूप से उम्मीदवारी दी गई. जिससे 50 से अधिक सीटें जीतने की पोजिशन रखनेवाली भाजपा 25 स्थानों पर सिमट गई. इसके लिए टिकट वितरण करनेवाली चौकडी जिम्मेदार रहने का खुला आरोप पातुरकर ने लगाया और कहा कि समय आने पर वे पार्टी मंच पर वह नाम उजागर करेंगे. पातुरकर ने अमरावती मंडल के यू ट्यूब चैनल मंडल न्यूज से चर्चा दौरान उपरोक्त बेबाक आरोप किए. उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ किरण महल्ले, रवीन्द्र खांडेकर जैसे अनुभवी नेताओं को उम्मीदवारी और चुनाव नियोजन से पूरी तरह दूर रखा गया्. बीजेपी नेता ने दावा किया कि इन्हीं कारणों से बीजेपी मनपा चुनाव में पिछड गई.
40 वर्षो का राजकीय अनुभव
मंडल न्यूज से खास चर्चा, विश्लेषण करते हुए किरण पातुरकर ने पहली बार अपने आक्रमक रूख को दर्शाया. उन्होंने कहा कि वे उस समय से पार्टी से जुडे हैं.् जब यहां भाजपा का झंंडा उठानेवाला भी न रहता. बावजूद इसके परिश्रम और समर्पण से भाजपा का काम किया. 1990 में पार्टी के शहर के पहले विधायक को चुनकर लाया. इसके बाद 1992 के पहले मनपा चुनाव में वे चुनाव प्रमुख और टिकट वितरण करनेवाले रहे. 1995 के विधानसभा चुनाव में भी उम्मीदवारी देने से लेकर प्रत्येक बात में उनकी सक्रिय भागीदारी रही.
नेताओं पर टूट पडे पातुरकर
किरण पातुरकर भाजपा में अनेक पदों और जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं. उन्होंने मंडल न्यूज से बडी बेबाकी से कहा कि वर्तमान स्थिति में शहर भाजपा अत्यंत मजबूत स्थिति में थी. मनपा चुनाव में भाजपा के 50 से अधिक उम्मीदवार आसानी से चुनाव जीत सकते थे. इसी कारण बीजेपी के पास 650 से अधिक इच्छुक आए थे. जबकि अन्य दलों में हालत यह थी कि वे लोगों को चुनाव लडने के लिए हाथ पैर जोड रहे थे. उसी प्रकार बीजेपी से टिकट न पानेवाले का इंतजार कर रहे थे. हुआ भी ऐसा. पातुरकर ने बताया कि कम से कम 55 लोगों को भाजपा द्बारा ठुकराए जाने के बाद अन्य दलों ने हाथों हाथ उम्मीदवारी दी थी. जबकि बीजेपी के चुनाव के कर्ताधर्ता ने बगैर उम्मीदवार की आर्थिक, सामाजिक, चुनकर आने की मेरिट जांचे मनमाने अंदाज में और सुनियोजित रूप से टिकट थमा दिए.
* याद किया अपना दौर, कैसे दिए थे उम्मीदवार
मंडल न्यूज के निवेदक, अमरावती के जाने माने राजकीय समीक्षक माधव पांडे के साथ चर्चा में पातुरकर ने पिछला 2017 का ही चुनाव स्मरण कराया. जब उन्होंने तत्कालीन बीजेपी विधायक डॉ. सुनील देशमुख के साथ अनेक बातों को ध्यान में रखकर विचारपूर्वक कमल की उम्मीदवारी मनपा के दावेदारों को दी थी. उस समय भी भाजपा के पास 500 से अधिक प्रबल इच्छुक थे. किंतु उन्होंने और डॉ. देशमुख ने योग्यता, मेरिट, प्रभाग की भौगोलिक, सामाजिक स्थिति और इच्छुक की आर्थिक स्थिति आदि की कसौटी पर परखने पश्चात भाजपा की उम्मीदवारी दी थी. पातुरकर ने बताया कि बडी संख्या में इच्छुक नाराज भी होने की आशंका थी. इसलिए उसका भी प्लान बनाकर रखा था. खुद उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ सहयोगी रवीन्द्र खांडेकर, पूर्व मेयर किरणताई महल्ले व अन्य नेताओं के साथ टिकट न मिल पानेवाले इच्छुकों से चर्चा कर विद्रोह नहीं होने दिया. इसी का सुपरिणाम रहा कि भाजपा ने अमरावती मनपा के इतिहास में पहली बार किसी एक दल का बहुमत 45 का आंकडा प्राप्त किया.
इस चुनाव में क्या हुआ, वरिष्ठों की अनदेखी
पातुरकर ने भाजपा के उन नेताओं पर आरोप का सिलसिला जारी रखते हुए बेबाकी से कहा कि जिन्हें कोई अनुभव नहीं, जनाधार नहीं, पार्टी पर कब्जा करने की मंशा रखनेवाले नेताओं के कारण भाजपा का मनपा चुनाव में यह हाल हुआ. खुद को नेता मानते तीन चार लोगों ने उन्हें अर्थात पातुरकर, रवीन्द्र खांडेकर, किरणताई महल्ले व वरिष्ठ से चर्चा नहीं की. टिकट वितरण की बात दूर, चुनाव नियोजन मेंं कहीं भी साथ नहीं लिया. चर्चा नहीं की. पातुरकर ने बताया कि उन्होने इस विषय पर पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से चर्चा का प्रयत्न करने की कोशिश की. वे नाकाम रहे.
शहर का चप्पा चप्पा और बीजेपी कार्यकर्ता की पहचान
किरण पातुरकर ने इस बातचीत दौरान काफी बातें धारा प्रवाह कही. अमरावती में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सहित अन्य विकास योजनाओं के लिए प्रयास करनेवाले पूर्व शहर भाजपा अध्यक्ष पातुरकर ने कहा कि वे अमरावती शहर का एक- एक एरिया जानते हैं. भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं को जानते हैं. उनके रिश्तेदारों को भी जानते हैं. क्षेत्र की सामाजिक स्थिति की भी उन्हें जानकारी हैं. फिर भी स्पष्ट कहना चाहते हैं कि भाजपा के वर्तमान दो चार नेताओं ने अपने हाथ में कमान रखी. भाजपा कब्जाने का प्रयत्न किया. जबकि भाजपा सभी की है. पातुरकर ने वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में साथ में न लेने के आरोप का पुुनरूच्चार किया.
नवनीत राणा की क्रेज, किंतु समझाया जा सकता था
किरण पातुरकर ने यह भी कहा कि नवनीत राणा भाजपा में अभी नयी है. उन्हें पार्टी की पूरी जानकारी नहीं है. राणा को युवा स्वाभिमान की कार्यप्रणाली पता है. बीजेपी में कैसे कामकाज होता है, निर्णय होते हैं. इसकी नवनीत राणा को जानकारी नहीं. बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट कहा कि नवनीत राणा ने चुनाव दौरान युवा स्वाभिमान के उम्मीदवारों को वोट देने की खुल्लमखुल्ला अपील की. उन्हें वह नहीं करना चाहिए था. इस बारे में राणा को समझाने का जिम्मा बीजेपी के बडे पदों पर विराजमान लोगों पर था. उन्होंने वैसा नहीं किया. पातुरकर ने स्वीकार किया कि नवनीत राणा की अमरावती में बडी क्रेज है. महिलाएं तो नवनीत राणा के पीछे पागल हैं. राणा के साथ सेल्फी की होड मचती है. किंतु उन्होंने चुनाव दौरान जो किया , उसका समर्थन करना मुश्किल है.
कार्यकर्ताओं को समझाना पडता है
इसी चर्चा दौरान मौजूद बीजेपी के पूर्व पदाधिकारी डॉ. अविनाश चौधरी ने भी पातुरकर के स्वर में स्वर मिलाकर कहा कि कार्यकर्ताओं को समझाना पडता है. तब जाकर मनमाफिक, अपेक्षित रिजल्ट मिलते हैं. चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर भी चर्चा महत्वपूर्ण होती है. शहर भाजपा उपाध्यक्ष रहे डॉ. चौधरी ने बताया कि उस समय में पार्टी में खासे एक्टीव थे और शिवसेना के साथ गठजोड तय करने तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. प्रदीप शिंगोले उन्हें भी साथ रखते थे. डॉ. चौधरी ने उदाहरण दिया कि एक- एक सीट पर निर्णय विचारपूर्वक होता. तुषार भारतीय की सीट हो या विलासनगर में तायवाडे और करेशिया की. बडे सोच विचार कर निर्णय किए गये.
फडणवीस की नीतियों को मानता और चलता हूं
किरण पातुरकर ने बताया कि वे आज की घडी में महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय नेता और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की नीतियों को मानते हैं. उन्हीं की नीति के अनुरूप काम करते हैं. भाजपा को अमरावती में बडी मेहनत, लगन, कार्यकर्ताओं के त्याग से खडा किया है. उसके आज के हालात देखते हुए थोडा मलाल और गुस्सा दोनों है. वे पार्टी फोरम पर यह बात अवश्य रखेंगे.

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