देश की आजादी को बचाए रखने के लिए हर किसी को बिना वर्दी वाला सिपाही बनना होगा

‘जिंदा शहीद’ मनिंदरजीतसिंह बिट्टा ने आतंकवाद को आजादी के लिए बताया खतरा

* आतंकवाद के खिलाफ हर नागरिक के लिए सतर्क व सजग रहने को बताया जरुरी
* मराठी पत्रकार संघ की ‘मीट द प्रेस’ में कई विषयों पर खुलकर बोले बिट्टा
अमरावती /दि.7 – हमारे देश के महान बलिदानियों व स्वाधीनता संग्राम सेनानियों ने सैकडों साल के त्याग, बलिदान व संघर्ष के बाद देश के लिए आजादी हासिल की थी. ऐसे में अपने पुरखों के जरिए मिली इस आजादी को आनेवाली पीढियों के लिए सुरक्षित बचाए रखना इस समय देश के प्रत्येक नागरिक की सबसे बडी जिम्मेदारी है. क्योंकि देश विरोधी ताकतों द्वारा हमारे देश की आजादी के खात्मे हेतु आतंकवाद का सहारा लिया जा रहा है. जिससे निपटने के लिए हमारी देश की सेना व पुलिस के जवान तो अपनी जिम्मेदारी निभा ही रहे है. साथ ही साथ जरुरत पडने पर अपने प्राणों का बलिदान भी दे रहे है. लेकिन यह लडाई तब तक अधूरी है, जब तक देश का एक-एक नागरिक बिना वर्दीवाला सिपाही बनकर इस लडाई में शामिल नहीं होता. जिसके चलते यदि हमें वाकई आतंकवाद की कमर तोडनी है, तो देश के हर एक नागरिक को सजग व सतर्क रहते हुए आतंक के खिलाफ लडाई में बिना वर्दीवाले फौजी के तौर पर अपना योगदान देना होगा, यह मौजूदा दौर में देश की सभी नागरिकों की सबसे बडी जिम्मेदारी भी है, इस आशय का प्रतिपादन ‘जिंदा शहीद’ के रुप में विख्यात रहनेवाले अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के संयोजक मनिंदरजीतसिंह बिट्टा द्वारा किया गया.
गत रोज अमरावती शहर के दौरे पर पहुंचे ‘जिंदा शहीद’ मनिंदरजीतसिंह बिट्टा को जिला मराठी पत्रकार संघ ने वॉलकट कंपाउंड परिसर स्थित मराठी पत्रकार भवन में सदिच्छा भेंट हेतु आमंत्रित किया था, जहां पर उन्होंने ‘मीट द प्रेस’ के तहत स्थानीय मीडिया कर्मियों से वार्तालाप करते हुए कई विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी. इस दौरान एम. एस. बिट्टा का पूरा फोकस देश की सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ लडाई एवं राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर रहा. इस समय बिट्टा ने दावा किया कि, देश ने विगत करीब 30-40 वर्षों तक आतंकवाद व नक्सलवाद का दंश झेला है. लेकिन अब सरकार ने इन दोनों ही मोर्चों पर काफी हद तक फतह हासिल करते हुए आतंकियों व नक्सलियों की कमर तोड दी है. लेकिन देश ने इसकी काफी बडी कीमत भी चुकाई है. क्योंकि आतंकियों व नक्सलियों से लडते व जुझते हुए देश की सुरक्षा में तैनात भारतीय सेना व अर्ध सैनिक दलों के कई जवान शहीद हुए है. जिनकी शहादत बिल्कुल भी व्यर्थ नहीं जानी चाहिए. इसी बात को आगे बढाते हुए एम. एस. बिट्टा ने कहा कि, उन्होंने देश के कई हिस्सों में रहनेवाले शहीद परिवारों के घरों पर भेंट दी है और वे कई शहीदों के परिवारों से प्रत्यक्ष मिले है. साथ ही उनके दुख व दर्द को महसूस भी किया है. जिसके चलते वे लंबे समय तक शहीद परिवारों को समुचित सम्मान दिए जाने की मांग भी उठाते रहे और अब उन्हें खुशी है कि, देश की मौजूदा सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ-साथ शहीदों व सैनिकों के सम्मान को भी अपनी प्राथमिकताओं की सूची में शामिल किया है.

* बोनस की जिंदगी में अब किसी पद की कोई लालसा नहीं
इस समय एम. एस. बिट्टा ने यह भी कहा कि, वे अब तक दर्जनों व सैकडों बार आतंकी हमलों का शिकार हुए है. जिसमें से 14 हमले ही रिकॉर्ड पर दर्ज है. साथ ही वर्ष 1993 में आतंकवादियों ने उन्हें आरडीएक्स विस्फोट के जरिए निशाना बनाने का प्रयास किया था. लेकिन वे हमेशा ही ऐसे जानलेवा हमलों में चमत्कारिक रुप से बच गए और मौत को छूकर वापिस लौटे. जिसके चलते लोगों ने उन्हें ‘जिंदा शहीद’ कहना शुरु किया, यानि वैसे तो वे कबके शहीद हो चुके है. लेकिन शरीर के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद जीवित रहने के चलते जिंदा भी है. ऐसे में उनका जीवन अब उनके लिए एक बोनस की तरह है. जिसमें उन्होंने अपने लिए किसी भी तरह की कोई आशा, अभिलाषा व उम्मीदें नहीं रखी है. उनका यह भी कहना रहा कि, वे इससे पहले केंद्रीय मंत्री सहित कई राजनीतिक पदों पर रह चुके है. लेकिन अब उन्हें मंत्री, मुख्यमंत्री, विधायक अथवा सांसद बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है.

* नए दौर में बदल रहा आतंकवाद का स्वरुप
इस अवसर पर मनिंदरजीतसिंह बिट्टा ने यह भी कहा कि, जैसे-जैसे सूचना क्रांति वाले इस दौर में नई-नई तकनीकों का इजाद हो रहा है, वैसे-वैसे आतंकवाद का खतरा और स्वरुप भी बदल रहा है. पहले जहां आरडीएक्स व हथियारों की तस्करी के जरिए आतंकी वारदातों को अंजाम दिया जा रहा था. वहीं अब आतंकवादियों द्वारा नई टेक्नॉलॉजी का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है. आज जहां आतंकियों द्वारा सीमा पार से हथियार एवं विस्फोटक भेजने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है, वहीं अब आत्मघाती हमले करने की बजाए रिमोट कंट्रोल से विस्फोट करने का प्रयास किया जाता है. जिसके चलते हर सर्वसामान्य नागरिकों को अपने आस-पडोस में चलनेवाली गतिविधियों पर बेहद चौकस व चौकन्ना होकर नजर रखनी चाहिए, ताकि आतंकियों के मनसूबों को नाकाम किया जा सके.

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