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डॉक्टर बनने की इच्छूक छात्रा को हाईकोर्ट से मिली राहत

नागपुर/दि.29 – मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने अनुसूचित जनजाति के लिए पात्र ठहराए जाने के चलते डॉक्टर बनने का सपना देख रही एक छात्रा को काफी बडी राहत मिली. इस मामले में फैसला सुनाते हुए न्या. अतुल चांदुरकर व न्या. वृषाली जोशी ने सृजनी घारट नामक छात्रा को दो सप्ताह के भीतर माना अनुसूचित जनजाति का वैधता प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश नागपुर की विभागीय जाति वैधता जांच समिति के नाम जारी किया है.
इस समिति द्बारा सृजनी घारट के पिता को 30 नवंबर 2006 को अनुसूचित जनजाति वैधता प्रमाणपत्र जारी किया गया था, जो अब भी कायम है. साथ ही सृजनी के रक्त संबंध में रहने वाले अन्य रिश्तेदारों को भी वैधता प्रमाणपत्र दिया गया है. लेकिन ऐसा रहने के बावजूद समिति ने 2 नवंबर 2022 को सृजनी के नाम अनुसूचित जनजाति का वैधता प्रमाणपत्र देने से इंकार कर दिया था. साथ ही उसका अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र भी जब्त कर लिया था. ऐसा करते समय समिति ने तर्क दिया था कि, सृजनी मुलत: चंद्रपुर जिले की निवासी है. ऐसे में उसने चंद्रपुर जिले से भी जाति प्रमाणपत्र व जाति वैधता प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहिए. इस फैसले के खिलाफ सृजनी ने नागपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विभागीय पडताल समिति के फैसले को रद्द करते हुए सृजनी घारट को जाति वैधता प्रमाणपत्र के लिए पात्र ठहराया.

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