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मनपा क्षेत्र के सभी भूखंडधारकों के निर्माण होंगे नियमानुकूल

विधायक सुलभा खोडके के प्रयास रंग लाये

  • 31 दिसंबर 2020 तक के निर्माण होंगे ‘रेग्यूलर’

  • राज्य मंत्रिमंडल ने लिया गुंठेवारी को रेग्यूलर करने का फैसला

अमरावती प्रतिनिधि/दि.७ – गत रोज राज्य मंत्रिमंडल द्वारा भूखंड नियमानुकूल गुंठेवारी विकास को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया गया. जिसके तहत 31 दिसंबर 2020 से पहले तक लेआउट कर्न्व्हटेड नहीं रहनेवाले भूखंडों एवं उन पर किये गये निर्माण को नियमित व नियमानुकूल मानने का फैसला किया गया. ऐसे में अब संबंधित भूखंड धारकों को उनकी संपत्ति के पीआर कार्ड मिलने का रास्ता खुल गया है और वे सरकारी रिकॉर्ड में अधिकारिक तौर पर संपत्ति धारक माने जायेंगे. राज्य सरकार द्वारा लिये गये इस फैसले का अमरावती शहर के नवसारी सहित मुस्लिम बहुल इलाकों में रहनेवाले भूखंड धारकों को बडे पैमाने पर लाभ मिलेगा.
बता देें कि, शहर में कई भूखंड ऐसे है, जिन्हें लेआउट कर्न्व्हट किये बिना ही प्लॉट बनाकर बेच दिया गया और ऐसे प्लॉट खरीदनेवाले लोगों ने बाद में उस जमीन पर अपने रिहायशी घर भी बना लिये. शहर में ऐसे घरोें की संख्या हजारों में है. इस बात के मद्देनजर विधायक सुलभा खोडके द्वारा विगत नवंबर माह में पीआर कार्ड के संदर्भ में एक मिटींग बुलायी गयी थी. जिसमें मनपा, राजस्व एवं भुमि अभिलेख विभाग से संबंधित अधिकारी उपस्थित थे. इस बैठक में पीआर कार्डधारकों की समस्याओं को सुनने व समझने के साथ ही उन संपत्ति धारकोें के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया. जिनके निवास बिना लेआउट कर्न्व्हटेड भूखंडों पर बने है और वे विगत 15-20 वर्ष से अधिक समय से उन्हीं भूखंडोें पर बने घरों में रह रहे है. पश्चात विधायक सुलभा खोडके ने इस विषय से राज्य के मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार एवं नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे के साथ चर्चा करते हुए कहा कि, जिस तरह वर्ष 2001 में भूखंड नियमानुकूल गुंठेवारी विकास अधिनियम तैयार करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की सरकार ने 2001 से पहले भूखंडों पर हुए निर्माण को नियमानुकूल किया था. ठीक उसी तर्ज पर 31 दिसंबर 2020 से पहले हुए निर्माण को नियमानुकूल करते हुए संबंधितों को पीआर कार्ड हेतु पात्र माना जाये.
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, जिस समय अमरावती शहर के लिए नया डीपी प्लान लागू किया गया था, तब सहसंचालक जाधव की अध्यक्षतावाली एक सरकारी समिती ने अमरावती मनपा क्षेत्र का सर्वेक्षण करते हुए नवसारी से सटे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जितने भी भूखंडोें पर निर्माण हुआ है. उन्हेें नियमित करने की सिफारिश की थी. पश्चात इस मसले को लेकर मनपा आमसभा द्वारा अंतिम निर्णय व नियोजन करने हेतु तत्कालीन महापौर संजय नरवने की अध्यक्षता में एक समिती का गठन किया गया था. जिसमें तत्कालीन उपमहापौर संध्या टिकले, स्थायी सभापति बालु भूयार, पक्ष नेता सुनील काले, नेता प्रतिपक्ष बबलू शेखावत, पार्षद चेतन गावंडे व असमा फिरोज खान सहित गोविंद चव्हाण, विजय कापसे व राजकुमार कदम इन तीन प्रशासनिक अधिकारियों का समावेश किया गया था. मनपा द्वारा गठित इस समिति ने जाधव समिती की सिफारिशों को खारिज करते हुए मनपा क्षेत्र में भूखंडों पर हुए निर्माण को नियमित नहीं करने की सिफारिश की थी, और इस संदर्भ में राज्य के प्रधान सचिव को प्रस्ताव भेजा गया था.
किंतु मौजे नवसारी के सर्वे नं. 91, 92, 93, 99, 100, 101 तथा 102 व इनसे सटी जमीनों पर विगत 20 वर्षों के दौरान हुए निर्माण कार्यों को देखते हुए विधायक सुलभा खोडके ने सरकार के समक्ष यह पक्ष रखा कि, इतनी बडी संख्या में इन भूखंडों पर बने घरों को तोडना कतई संभव नहीं रहेगा. ऐसे में यह ज्यादा बेहतर होगा कि, इन भूखंडोें पर हुए निर्माण कार्यों को सरकार द्वारा अधिकृत तौर पर नियमित किया जाये.
विधायक सुलभा खोडके द्वारा सतत किये जाते प्रयासों के चलते गत रोज राज्य मंत्रिमंडल द्वारा बिना लेआउट कर्न्व्हटेड भूखंडों पर हुए आवासिय निर्माण को नियमित व नियमानुकूल मानने का निर्णय लिया गया है. इस फैसले का अमरावती मनपा क्षेत्र सहित समूचे राज्य के विभिन्न शहरी इलाकों में भूखंडों पर निर्माण करनेवाले लोगों को फायदा होगा.

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