सोशल ड्रिंकिंग के नाम पर पुरुषों के साथ महिलाएं भी छलका रही जाम
महिलाओं में लगातार बढ रहा व्यसनाधिनता का प्रमाण

* कम उम्र में ही व्यसनाधिन होने का प्रमाण भी बढा
नागपुर /दि.4– इन दिनों व्यसनों की उम्र कम होती जा रही है, यानि कम आयु में ही व्यसनाधिन होने का प्रमाण बढ रहा है. साथ ही साथ पुरुषों की तरह महिलाएं भी बडे पैमाने पर व्यसनों की ओर बढ रही है. सोशल ड्रिंकिंग कहते कहते इसका रुपांतरण का व्यसनों को हो जाता है. यह भी उन्हें पता नहीं चलता. लेकिन व्यसनों की वजह से समाज में वंध्यत्व एवं नपुंसकता का प्रमाण बढ रहा है, जो अपने आप में चिंता का विषय है.
विशेष उल्लेखनीय है कि, नागपुर के साईंटीफिक सोसायटी के लॉन पर टेमोगा हॉस्पिटल्स व ओम चेरिटेबल ट्रेट की ओर से ‘कोजागर्ती’ शीर्षक के तहत ‘सोलहवां वर्ष खतरे का’ नामक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था. जिसमें समाज के समक्ष रहने वाले विभिन्न समस्याओं के संदर्भ मेंं उपस्थित विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे. इस समय स्त्री व प्रसूतिरोग तज्ञ डॉ. चैतन्य शेंबेकर, एनेस्थेसिस्ट डॉ. मनीषा शेंबेकर एवं पुणे स्थित मुक्तांगण व्यसन मुक्ति केंद्र की संचालिका डॉ. मुक्ता पुणतांबेकर उपस्थित थी.
* शारीरिक, मानसिक व आर्थिक स्तर पर व्यसनों का दुष्परिणाम
इन दिनों समाज में बडे पैमाने पर शराब, सिगरेट व तंबाखू के साथ ही मोबाइल फोन का व्यसन छोटे बच्चों से लेकर बडे बुजुर्गों तक में दिखाई देता है. जिसका शारीरिक, मानसिक, आर्थिक व सामाजिक स्थर भी दुष्परिणाम दिखाई देने लगा है. ऐसे में किसी भी तरह के व्यसन से हमेशा बचे रहने का प्रयास किया जाना चाहिए.
* हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण रखे
इस विशेष कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने उपस्थितों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि, व्यसनों की ओर बढने की बजाय अपने भावनाओं पर जीत हासिल करना बेहद जरुरी होता है. जिसके लिए योग्य लोगों का मार्गदर्शन किया जाना चाहिए. साथ ही अपने मन के सुख-दुख को योग्य व्यक्ति के पास चेकअप करके हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण रखा जाना चाहिए. इसके साथ ही महिलाओं में विशेषकर गर्भवती महिलाओं ने तमाम तरह के व्यसनों से बेहद दूर ही रहना चाहिए, ताकि पैदा होने वाले बच्चे पर किसी भी तरह का कोई दुष्परिणाम न हो.