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साग-सब्जियों के नाम पर चल रही लूट

मंडी में मिरची 20 रूपये व घर के पास 80 रूपये किलो

  •  फूटकर में अनाप-शनाप दामों पर हो रही सब्जियों की बिक्री

  •  ग्राहकों को टिकाई जा रही सडी-गली सब्जियां

अमरावती/प्रतिनिधि दि.30 – इन दिनों साग-सब्जियों की आवक कम रहने की वजह को आगे करते हुए फूटकर सब्जी विक्रेताओं द्वारा बेहद अनाप-शनाप दामों पर सब्जियों की बिक्री की जा रही है. जिसके चलते सब्जियों के होलसेल व फूटकर दामों में करीब 3 से 4 गूना फर्क है. खासकर हाथठेलों पर गली-गली घुमते हुए साग-सब्जियों की बिक्री करनेवाले फूटकर विक्रेताओं द्वारा घर पहुंच सेवा के नाम पर आम ग्राहकों की जमकर आर्थिक लूट की जा रही है.
बता दें कि, इस समय होलसेल मंडी में मिरची के दाम 20 रूपये किलो है, किंतु वहीं मिरची फूटकर विक्रेताओं द्वारा 80 रूपये किलो से बेची जा रही है. इसी तरह होलसेल मंडी में 15 रूपये किलो के दाम रहनेवाली फुलगोभी हाथठेलों पर 60 रूपये प्रति किलो की दर पर बेची जा रही है. चूंकि पाव-आधा किलो साग-सब्जी लाने के लिए थोक मंडी में जाना महंगा पडता है. ऐसे में लोगबाग अपने घर के आसपास हाथठेले पर साग-सब्जी बेचनेवाले विक्रेताओं से अपनी जरूरत की साग-सब्जियां खरीदते है. साथ ही इन दिनों कई लोगबाग कोविड संक्रमण के खतरे को देखते हुए बाजार जाना टालते है. इस बात का फूटकर सब्जी विक्रेताओं द्वारा जमकर फायदा उठाया जा रहा है. यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, इन दिनों बारिश की वजह से राज्य के सभी इलाकों में आवाजाही व मालढुलाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है. साथ ही डीजल के दामों में वृध्दि होने के चलते मालढुलाई काफी महंगी भी हो गई है. जिसकी वजह से साग-सब्जियों के दाम पहले ही आसमान छू रहे है. वहीं फूटकर विक्रेताओं द्वारा इसमें और भी अधिक चारगुना वृध्दि किये जाने की वजह से आम लोगों का बजट ही गडबडा गया है.

  • इतना अधिक फर्क क्यों

जिस समय किसानों द्वारा अपनी साग-सब्जियों को थोक मंडी में लाया जाता है, तो दलाल द्वारा उसकी बोली लगायी जाती है और अडत व्यवसायी द्वारा उसकी खरीदी की जाती है. जिसके बाद फूटकर विक्रेताओं द्वारा इन सब्जियों को ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है. ऐसी एक श्रृंखला बाजार में काम करती है. किंतु इसमें खुद किसान को अपनी साग-सब्जियों के दाम तय करने का अधिकार नहीं है. बल्कि सब्जी मंडी में पहुंचे माल के दाम अपने फायदे को देखते हुए विक्रेताओं द्वारा तय किये जाते है और उन दामों पर साग-सब्जियों की बिक्री की जाती है. वहीं होलसेल मंडी से साग-सब्जियों की खरीदी करने के बाद फूटकर विक्रेताओं द्वारा उसमें अपना फायदा जोडा जाता है. जिससे सब्जियों के दाम और भी अधिक तीन-चारगुना बढ जाते है.

  • उगाते है किसान, कमाता कोई और

किसानों द्वारा दिन-रात मेहनत करते हुए गर्मी व पानी को सहन करते हुए अपने खेतों में साग-सब्जियां उगाई जाती है. जिन्हें शाम में वाहनों में भरकर एकदम तडके थोक मंडी में लाया जाता है. किंतु उत्पादन खर्च सहित मालढुलाई के खर्च को काटने के बाद किसान को बेहद अत्यल्प कमाई होती है. लेकिन मंडी से ग्राहक तक माल पहुंचाने के ऐवज में विक्रेताओं की श्रृंखला बैठे-बिठाये कहीं अधिक फायदा कमा लेती है.

  •  थोक बाजार से खरीदा आधा माल जाता हैं फेंकने में

इस बारे में सब्जियों का फूटकर व्यवसाय करनेवाले विक्रेताओें का कहना है कि, थोक मंडी से खरीदी गई सब्जियों, विशेषकर पालक, मेथी जैसी हरी सब्जियों को घर लाकर छांटना और साफ करना पडता है. जिसमें से आधे से अधिक माल को खराब निकलने की वजह से फेंक देना पडता है. इसके बाद ग्राहकों के घर-घर जाकर माल बेचने की ऐवज में अपनी मेहनत-मजदूरी भी निकालनी होती है. इसमें कोई खास कमाई नहीं होती.

  •  सब्जियोें की होलसेल व फूटकर दरें

सब्जी        होलसेल दरें      फूटकर दरें
प्याज             18                 30
आलू               14                 30
लहसून            90                160
टमाटर            20                  60
बैंगन              16                  40
फूलगोभी         20                  60
पत्तागोभी         20                  40
पालक             15                  60
मेथी               35                  40
करेला             22                  40

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