केवल दो कमरे से चल रहा मराठी विश्वविद्यालय
सीएम के दावे की रिध्दपुर में ऑनस्पॉट पडताल

* जून से कक्षाएं प्रारंभ करने की घोषणा
* समाज मंदिर जैसे भवन पर लगा है केवल बोर्ड
* फर्निचर का काम शुरू रहने का भी क्लेम
अमरावती/ दि. 10- देश के पहले मराठी विश्वविद्यालय की दो वर्ष पूर्व प्रदेश के अर्थ संकल्प में घोषणा के पश्चात अब विद्यापीठ शुरू होने का दावा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने किया. प्रत्यक्ष रिध्दपुर में जाकर ऑनस्पॉट अवलोकन करने पर खुलासा हुआ कि थीम पार्क के हॉल पर विद्यापीठ का बोर्ड लगा दिया गया है. अंदर फर्निचर के नाम पर कुछ नहीं हैं. आगामी जून से क्लासेस शुरू करने का भी दावा है. वहीं मराठी भाषा विद्यापीठ समिति के सदस्य महंत कारंजेकर बाबा ने कहा कि फर्निचर बन रहा है. जल्द उपलब्ध होगा.
अमरावती वीएमवी से कामकाज
मराठी विश्वविद्यालय के कुलगुरू के रूप में डॉ. अविनाश आवलगांवकर को मनोनीत किया गया. वे अमरावती स्थित विदर्भ महाविद्यालय के दो कक्ष से मराठी भाषा विद्यापीठ का संचालन कर रहे हैं. अब तक एक दर्जन विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है. जबकि जून माह से नियमित क्लासेस और अभ्यास शुरू करने के दावे किए जा रहे हैं. मुख्यमुंत्री ने नांदेड के श्रीकृष्ण मंदिर कलशारोहण समारोह में महानुभाव की काशी रिध्दपुर में मराठी भाषा विश्वविद्यालय प्रारंभ होने का दावा किया था. उसकी पडताल करने पर जमीनी हकीकत सामने आयी.
* 50 एकड जमीन अधिग्रहण शेष
रिध्दपुर के दाभेरी मार्ग पर 50 एकड जमीन पर विद्यापीठ साकार होना है. इस जमीन का अब तक अधिग्रहण नहीं होने की जानकारी भी वहां के लोगों ने दी. उल्लेखनीय है कि अग्रणी संत और समानता के विचार को सदियों पहले प्रस्तुत करनेवाले श्री गोविंद प्रभु के निवास से पवित्र श्री क्षेत्र रिध्दपुर को महानुभाव पंथ और मराठी साहित्य की काशी कहा जाता है. मराठी की पहली रचना लीलाचरित्र रिध्दपुर में रची गई थी.
200 करोड खर्च की मान्यता
अमरावती जिले में मराठी भाषा विश्वविद्यालय की घोषणा पश्चात राज्य शासन के उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग ने रिध्दपुर में मराठी भाषा विवि स्थापना का कार्य प्रारंभ किया. मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के प्रयत्नों से 200 करोड खर्च की मान्यता दी गई. जिससे 50 एकड जमीन अधिग्रहण होना है. उसी प्रकार विद्यापीठ भवन निर्माण भी प्रस्तावित है. वित्त वर्ष समाप्ति पर है. ऐसे में मराठी भाषा विद्यापीठ के आगामी जून माह से शुरू होने पर जानकार संशय व्यक्त कर रहे हैं. 4 माह में कुलगुरू डॉ. आवलगांवकर को स्टॉफ नियुक्ति और प्रत्यक्ष पढाई का काम शुरू करना है.