जातिनिहाय महामंडलों पर नियोजन विभाग का आक्षेप

मुंबई./दि.22 – राज्य में प्रत्येक समाज के सर्वांगिण विकास हेतु स्थापित किए गए अलग-अलग महामंडलों का आर्थिक बोझ संभालने में अब वित्त विभाग को काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा है. जिसके चलते कुछ महामंडलों की संख्या को कम किया जा रहा है. परंतु कुछ विशिष्ट समाजों को खुश करने हेतु स्थापित किए जाने वाले महामंडलों की घोषणा को लेकर नियोजन विभाग ने अपनी तीव्र नाराजी जताई है. जिसके चलते नियोजन विभाग की ओर से कहा गया है कि, जाति, जनजाति व वर्ग निहाय आर्थिक विकास महामंडल स्थापित करने का प्रस्ताव पेश करते समय अन्य पिछडा वर्गीय व बहुजन कल्याण विभाग की ओर से अपनी भूमिका विशद किया जाना आवश्यक है.
उल्लेखनीय है कि, राज्य सरकार के बजट में जाति निहाय 4 महामंडल स्थापित करने की घोषणा राज्य के मुख्यमंत्री व तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्बारा की गई. राज्य में अब तक 60 से अधिक महामंडल स्थापित किए जा चुके है. जिसमें से कुछ अपवादों को छोडकर अन्य सभी महामंडल ‘सफेद हाथी’ साबित हुए है. जिसके चलते इसमें से कई महामंडलों को ताला लगाने का निर्णय राज्य सरकार को लेना पडा. इसके अलावा इन महामंडलों पर गैरसरकारी नियुक्तियां भी विगत 4 वर्षों से अधर में लटकी पडी है. क्योंकि सत्ताधारी दल इन महामंडलों पर नियुक्तियां करते हुए नियुक्ति से वंचित रहने वाले कार्यकर्ताओं का गुस्सा मोल लेने के लिए तैयार नहीं है.
* किन-किन महामंडलों के प्रस्ताव नियोजित
राज्य सरकार ने वीरशैव लिंगायत समाज के लिए जगतज्योति महात्मा बसवेश्वर आर्थिक विकास महामंडल, मंदिरों का व्यवस्थापन संभालने वाले गुरव समाज के लिए संत काशिबा गुरव युवा आर्थिक विकास महामंडल, रामोशी समाज के लिए राजे उमाजी नाईक आर्थिक विकास महामंडल तथा वडार समाज के लिए पै. मारुती चव्हाण वडार आर्थिक विकास महामंडल ऐसे 4 महामंडल स्थापित करने की निर्णय लिया है. अन्य पिछडा वर्गीय बहुजन कल्याण विभाग की ओर से तैयार किए गए इन प्रस्तावों पर नियोजन विभाग ने अपनी नापसंदगी व्यक्त की है.
* आपत्ति की वजह
प्रत्येक पिछडा वर्गीय समाज के विकास हेतु इससे पहले महाराष्ट्र राज्य अन्य पिछडा वर्गीय वित्त व विकास महामंडल तथा वसंतराव नाईक विमुक्त जाति व भटक्या जनजाति विकास महामंडल कार्यरत है. इसके बावजूद समाज के युवाओं की प्रगती के लिए 4 नये मंडल उपकंपनी के नाम पर स्थापित किए जाने वाले है. जिनकी स्थापना करते समय आवश्यक रहने वाली सांख्यिकी जानकारी आर्थिक सर्वेक्षण एवं सामाजिक व शैक्षणिक रिपोर्ट प्रस्तूत नहीं किए गए है. किसी भी समाज की शैक्षणिक पात्रता, क्षमता व कौशल्य को विचार में न लेते हुए केवल उपरी तौर पर योजना चलाने के निर्णय की वजह से उस योजना के ज्यादा असफल साबित होने की संभावना नियोजन विभाग द्बारा व्यक्त की जाती है. वर्ष 2021 में पिछडा वर्गीय वित्त व विकास महामंडल ने 12 बलुतेदारों के लिए आर्थिक विकास महामंडल स्थापित करने का निर्णय लिया है. साथ ही सभी समाजों की ओर से अपने लिए स्वतंत्र महामंडल स्थापित करने के प्रस्ताव आ रहे है. परंतु इस तरह के महामंडल स्थापित करने से पहले राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कुछ मार्गदर्शक तत्व भी तय किए जाने चाहिए. इस आशय के शब्दों में नियोजन विभाग में बहुजन विभाग को खडे बोल सुनाए है.