उधर मरीज तडप रहे थे, इधर डॉक्टर झगड रहे थे
डॉक्टरों के झगडे की वजह से तीन मरीजों की गई जान

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संतप्त परिजनों ने कार्रवाई के लिए दिया ठिय्या
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यवतमाल के सरकारी मेडिकल अस्पताल की घटना
यवतमाल/प्रतिनिधि दि.21 – यहां के वसंतराव नाईक सरकारी मेडिकल कॉलेज में नाईट ड्यूटी पर रहनेवाले दो डॉक्टरों के बीच हुआ झगडा अस्पताल में भरती तीन मरीजों पर भारी पडा. क्योंकि एक ओर तो मरीज इलाज के अभाव में तडप रहे थे, वहीं दूसरी ओर मरीजों पर ध्यान देने की बजाय डॉक्टर एक-दूसरे के साथ आपस में झगड रहे थे. ऐसे में मरीजों की मौत के बाद उनके संतप्त परिजनों ने दोनों दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर अस्पताल में ही धरना देना शुरू कर दिया. पश्चात वैद्यकीय अधिष्ठाता द्वारा लिखीत आश्वासन दिये जाने के बाद यह आंदोलन पीछे लिया गया.
जानकारी के मुताबिक शनिवार की शाम संजय विलास दरांडे (16) नामक सिकलसेल संक्रमित मरीज को उसकी मां रत्नमाला दरांडे अपने साथ अस्पताल लेकर पहुंची. इस समय मरीज की हालत काफी गंभीर थी. ऐसे में रत्नमाला दरांडे ने अपने बेटे को जल्द से जल्द भरती कराने का निवेदन करना शुरू किया. इसी समय मेडिसीन विभाग के डॉक्टर व सर्जरी विभाग के डॉक्टर में इस बात को लेकर विवाद होना शुरू हुआ कि, यह मरीज किसका है. मेडिसीन विभाग के डॉक्टर का कहना रहा कि सिकलसेल का मरीज मेडीसीन में नहीं आता, अत: उसे सर्जरी विभाग में भरती कराया जाये. वहीं सर्जरी विभाग के डॉक्टर का कहना रहा कि, वे सिकलसेल संक्रमित मरीज का इलाज नहीं करते. ऐसे में दोनों ही विभाग के डॉक्टर एक-दूसरे से वादविवाद करते हुए अपनी-अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड रहे थे. जबकि इस दौरान संजय दरांडे की स्थिति लगातार बिगड रही थी. पश्चात रविवार की सुबह संजय दरांडे को खुन की उल्टी हुई. जिसके बाद उसकी मौत हो गयी. इसी दौरान अस्पताल में पहले से भरती दो अन्य मरीजों की भी मौत हुई. हालांकि इन दोनों मरीजों की आयु काफी अधिक थी. अत: उनके रिश्तेदारों ने इसे लेकर कोई शिकायत नहीं की. किंतु संजय दरांडे की मौत होते ही उसके परिजन काफी संतप्त हो गये और दोषी डॉक्टरों पर सदोष मनुष्यवध का अपराध दर्ज करने की मांग करने लगे. इन परिजनों का कहना रहा कि, जब तक दोषी डॉक्टरों पर अपराध दर्ज नहीं होता, तब तक वे संजय दरांडे के पार्थिव को अपने कब्जे में नहीं लेंगे. इसके बाद अस्पताल में काफी हद तक तनाव पैदा हो गया था. वहीं मामले की जानकारी मिलते ही महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मिलींद कांबले तथा शहर पुलिस स्टेशन के थानेदार प्रदीप सिरस्कर तुरंत अस्पताल पहुंचे और उन्होंने दरांडे परिवार के सदस्यों को समझा-बुझाकर शांत किया. इस समय अधिष्ठाता कांबले द्वारा जांच समिती गठित किये जाने की बात कहने पर तनाव काफी हद तक कम हुआ और दरांडे परिवार ने संजय का शव अपने कब्जे में लेकर रविवार की दोपहर उस पर अंतिम संस्कार किये.
संजय दरांडे की मौत को लेकर उसके परिजनों द्वारा की गई शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया गया है और न्याय वैद्यक शास्त्र विभाग प्रमुख के नेतृत्व में जांच समिती गठित की गई है. उनकी रिपोर्ट आने के बाद संबंधित दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी.
– डॉ. मिलींद कांबले
अधिष्ठाता
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अस्पताल के काम पर लगे सवालिया निशान
आरोप है कि, सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से गडबडा गई है. यहां के डॉक्टरों व नर्सों पर किसी का कोई अंकूश नहीं है और हर कोई अपने मनमाने ढंग से काम करता है. जिसकी वजह से यह अस्पताल इससे पहले भी कई बार विवादों के घेरे में फंस चुका है. ऐसे में अस्पताल के कामकाज को जल्द से जल्द सुधारे जाने की मांग की जा रही है.